चेतना यात्रा-6’ (भाग-दो) रुद्रपुर से कानपुर तक

ग्रीन ब्रॉडकास्टिंग चेतना यात्र-6 पर अपनी इंडष्ट्री से जुडे अधिकांश लोगों के साथ-साथ अन्य लोग भी पूछ लिया करते हैं ें कि भाई चेतना यात्र-6 तो समझ में आता है लेकिन यह ग्रीन ब्रॉडकास्टिंग का क्या मतलब है\ ब्रॉडकस्टिंग एण्ड केबल टीवी उद्योग से जुड़े लोगाें के सहयोग से समूची मानव जाति को ग्लोबल वार्मिंग के प्रति जागरूक करने के इस अभियान को ग्रीन ब्रॉडकास्टिंग नाम दिया गया है। यही इस चेतना यात्र में किया भी जा रहा है। अभी तक की यात्र में दिल्ली से लेकर रूद्रपुर तक जितने भी कार्यक्रम हुए वह सभी ब्रॉडकास्टिंग एण्ड केबल टीवी उद्योग में संलग्न व्यक्तियों के विशेष योगदान के कारण ही हो पाए हैं। मुरादाबाद में वरिष्ठ वकीलों के सानिध्य में आयोजित बार कौंसिल मुरादाबाद का आयोजन एक ऐसा उदाहरण है, जिसे स्वयं आर्गेनाईज कर पाना सम्भव ही नहीं था, लेकिन मुरादाबाद में केबल टीवी की कमान सम्भाल रहे पिफ़रासत खान के प्रयासों से बार कौंसिल में चेतना यात्र-6 के भव्य स्वागत सत्कार के बाद-वृक्षारोपड़ भी किया गया। हमें पूरी उम्मीद है पिफ़र मुरादाबाद बार कौसिल में रोपे गए पौधे चेतना यात्र का इतिहास बनेंगे।
बाढ़ की आशंकाओं के साथ-साथ यात्र रूद्रपुर पहुंची क्योंकि भूस्खलन और निरन्तर बारिस के चलते नैनीताल जाने के सभी रास्ते
पूर्णतया बन्द हो चुके थे। स्वयं नदीम बाबी भाई नैनीताल से बाहर होने के कारण अचानक आए प्राकृतिक बदलाव के कारण नैनीताल पहुंचने की मशक्कत कर रहे थे। रूद्रपुर में बाढ़ की विभीषिका की खबरें मिल रही थीं। टैलिविजनों पर भिन्न समाचार चैनलों द्वारा प्रसारित खबरों में पूरा पफ़ोकस बाढ़ की विनाशलीला पर ही था। रामगंगा की कोशी का विकराल रूप लोगों को भयभीत किए था जबकि कालागढ़ बांध भी भयानक हो गया था, गंगा अपने साथ हरिद्वार की विशाल शिवमूर्ति ही वहीं ले गई जबकि टिहरी बांध ओवरफ्रलो की स्थिति को छूने लगा था, उधर यमराज की बहन यमुना शान्त होने का नाम ही नहीं ले रहीं थी, पिफ़र एक बार 7-44 लाख क्युसेक पानी हथिनीकुण्ड से छोड़ा जा चुका था।
हरियाणा के तमाम जिलों सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बाढ़ का प्रकोप जनता-जनार्दन को डरा रहा था। तमाम मवेशी बाढ़ में बह गए तो तैयार खड़ी पफ़सल पूर्णतया बहा ले गई बाढ़।
चार धाम की यात्र रूक गई, यहां-वहां यात्री फंस गए। पहाड़ों का गिरना, सड़कों का धंसना जारी था। खबरें लोगों को डरा रहीं थीं। क्या-पहाड़ या क्या प्लेन सारा पानी मय हो गया। मुरादाबाद-रामनगर, बिजनौर, बाजपुर, रामपुर, हरिद्वार, ऋषिकेश सभी क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गए। कार्बेट पार्क के जीव-जन्तुओं पर पानी का कहर बरपा रही तो उसके बाहर बनी कई पांच सितारा रिसोर्ट् बाढ़ मेें बह गई। चार हाथियों के बाढ़ में बह जाने की खबरें भी आई।

प्रकृति में हो रहे बदलाव की यह तस्वीरें एक नया इतिहास रचने की दिशा में बढ़ने लगी। कहा जा रहा है कि ऐसी बारिस और बाढ़ ने 140 साल का रिकॉर्ड तोड़ा है जबकि दिल्ली को डुबो रही यमुना भी अपना नया रिकॉर्ड दर्ज कर रही है। प्रकृति का यह प्रकोप अभी थमा नहीं है, लेकिन सत्ताधीशों के दौरे , घड़ियाली आंसू और सरकारी खजाने की लूट-खसोट शुरू हो चुकी है। उत्तराखण्ड सरकार ने राज्य में हुई क्षति के लिए केन्द्रीय सरकार से कुछ हजार करोड़ की मदद की गुहार लगाई है। इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश की माया मेमसाहब ने भी केन्द्रीय सरकार से भारी राशि की मदद मांगी है। क्षेत्रें के हवाई-दौरे शुरू हो गए हैं। राहत कार्याें के दावे जोर-शोर से किए जा रहे हैं। यात्र रूद्रपुर से बरेली होते हुए शाहजहांपुर पहुंची। बरेली भी बाढ़ की आशंकाओं में डूबा मिला, लेकिन केबल टीवी कम्युनिटी को ग्रीन सन्देश देते हुए यात्र का शाहजहांपुर में गर्मजोशी से स्वागत किया गया। शाहजहांपुर में भी बाढ़ का भय स्पष्ट दिखाई दिया। रात्रि विश्राम के बाद हरदोई मार्ग
उत्तराखण्ड का हरेक मार्ग प्रकृति के प्रकोप से प्रभावित हो गया। से सीतापुर होते हुए उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ पहच गई यात्र। लखनऊ में बाढ़ से ज्यादा 24 सितम्बर के खतरे से भयभीत दिखाई दिए लोग। रामजन्मभूमि विवाद पर उच्च न्यायालय इलाहाबाद में चल रहे वर्षाें पुराने मुकदमे पर फैसला सुनाए जाने की घोषणा के बाद से समाचारों में विशेष सुरक्षा बन्दोबस्त का ऐसा वातावरण तैयार किया जा रहा है जैसे कि देशभर में भारी दंगे होने वाले है। आम आदमी एक ओर तो प्रकृति के प्रकोप की ही मार झेल रहा है तिस पर आप्रकृतिक आशंकाओं के बादल छाने लगे हैं। समाचार चैनलों द्वारा इस सन्दर्भ में अमन-शान्ति के नाम पर जिस प्रकार से विशिष्ट वाद-विवाद कार्यक्रमों का प्रसारण किया जा रहा है, उसे देखते हुए प्रशासनिक सतर्कता बढ़ाए जाने के कारण आम आदमियों में दहशत बढ़ती जा रही है।
विशेष पफ़ोर्स की गस्त आम आदमी की अटकलों को पुख्ता किए दे रही है, कि वास्तव में ही यदि दंगों की आशंकाएं नहीं होती तब विशेष पफ़ोर्स को बुलाने पर उनके गस्त लगाने की जरूरत ही ना होती, शायद दंगे होंगे और बड़े पैमाने पर आयोजित हो, इसी को देखते हुए ऐसी तैयारियां भी की जा रही है।। लखनऊ के शान्त वातावरण में अब रहस्यमय चुप्पी सी व्याप्त दिखाई दे रही है। यात्र का सन्देश देते हुए लखनऊ से कानपुर पहुंची यात्र, लेकिन कानपुर की स्थिति भी लखनऊ से अलग नहीं थी। कानपुर में भी रैपिड एक्सन पफ़ोर्स कापफ़ी संख्या में अपनी जिम्मेदारी सम्भाले हुए थी। 24 सितम्बर को क्या होगा को लेकर जितने मुंह उतनी ही बातें थीं, लेकिन गणेशोत्सव का विसर्जन उत्सव बड़े गाजे-बाजे के साथ हरेक चौराहों प्रमुख मार्गाें पर दिखाई दिया।
कानपुर में बाढ़ से ज्यादा ध्यान 24 सितम्बर पर अटका दिखा। ग्लोबल वार्मिंग पर ब्रॉडकास्टिंग एण्ड केबल टीवी कम्युनिटी की जिम्मेदारी के प्रति भिन्न-भिन्न बैठकें हुई। यात्र के सन्देश के साथ- साथ इंडष्ट्री की भावी सम्भावनाओं पर अगर-मगर, किन्तु-परन्तु पर भी चर्चाएँ की गई।

कानपुर में ही जानकारी मिली कि 24 सितम्बर की मुसीबत टल गई है, क्योंकि माननीय उच्चतम् न्यायालय द्वारा इस मामले में एक अपील स्वीकार कर ली है, जिस पर 28 सितम्बर को सुनवाई होगी, अतः पिफ़लहाल 28 सितम्बर तक के लिए मामला टाल दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के रूख से देशवासियों को बड़ी राहत मिली है अन्यथा जिस प्रकार से देशभर में दंगों की सम्भावनाओं को लेकर दहशत का वातावरण बना हुआ था उसके परिणाम कुछ भी हो सकते थे।
प्राकृतिक आपदा के तौर पर बाढ़-बारिस की तबाही की खबरों के बीच दिल्ली में होने वाले कॉमनवैल्थ गेम्स की दुर्दशा के समाचारों ने भी देशवासियों का दुनिया के सम्मुख शर्मिन्दा होने का डर सताता प्रतीत हो रहा है। वहां भी तमाम अटकलों का बाजार गर्म है। एक के बाद एक-एक करके तमाम खामियां गेम्स आयोजन पर बट्टा लगा रही है। गेम्स शुरू होने में अब कुछ घन्टे बचे हैं जबकि तैयारियों के लिए अभी भी लम्बा समय लग सकता है। गेम्स के आयोजन से पूर्व ही दिल्ली में आतंकवादी घटना को भी अंजाम दे दिया गया है जबकि गंदगी-बीमारी और अनियमितताओं से भरी तमाम खामियां तो शार्मिदा कर ही रही हैं। दुनिया के सम्मुख भ्रष्टाचार के एक नए कीर्तिमान के रूप में दर्ज हो चुके इस आयोजन पर पैरवी के लिए अब प्रधानमंत्री भी आगे आए हैं, लेकिन रोजाना नई-नई खबरें-खुलासे देशवासियों को शर्मिंदा किए दे रहे हैं।

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