उपभोक्ताओं की जरूरत मात्र चैनलों तक ही नहीं निबट जाती है-

भारतीय ब्रॉडकास्टिंग एण्ड केबल टीवी इंडष्ट्री में भी अब भारी बदलावों की सम्भावनाएं बन रही हैं, निश्चित ही एक बहुत बड़ी तकनीकी क्रान्ति चौखट पर दस्तक दे रही है। बेशक केबल टीवी ऑपरेटरों को यह समझने में देर लग जाए लेकिन टैक्नोलॉजी को रोक पाना सम्भव नहीं होता। बीस वर्षों का लम्बा दौर इस इण्डष्ट्री को एक चैनल से हांकते हुए सैकडों चैनलों के प्रसारण तक ले आया है। जैसे कि ब्लैक एण्ड व्हाइट टैलीविजन से रंगीन टैलीविजन पर जाने में संकोच किया करते थे लोग। तब कहा जाता था कि रंगीन टैलीविजन देखने से आंखाें पर ज्यादा जोर पडे़गा, इसी प्रकार से स्टील के बर्तनों का जब प्रचलन शुरू हुआ था तब भी लोगों में स्टील के बर्तनों के विरूद्ध भारी भ्रांतियां थी, जबकि प्रेशर कुकर को अपनाने में तो खासा लम्बा समय लिया था लोगों ने। लेकिन समय बदलता गया और अब वह बातें हास्यास्पद सी लगेंगी।
केबल टीवी के मामले में भी कुछेक वर्षों बाद ऐसा ही बदलाव देखने को मिलेगा, जबकि उसकी शुरूआत हो चुकी है। टेलीपफ़ोन के लिए तो बुकिंग करवाने के बाद कई साल इंतजार करनी पडती थी, लेकिन अब—। कल्पनाओं में भी तब ऐसा सोच पाना बहुत मुश्किल था कि कभी ऐसा दौर भी आएगा जब आपके हाथों में पकड़ा चलेगा टेलीपफ़ोन। तकनीकी क्रान्ति के दौर में आवश्यकतानुसार आविष्कारों के लिए मानव मस्तिष्क में चौबीसों घन्टों कुलबुलाहट होती रहती है, ऐसी उठा-पटक केबल टीवी के क्षेत्र में भी देखने को मिलनी तय है। उपभोक्ताओं को सीधे-सीधे प्रभावित करने के लिए केबल टीवी बहुत ही सरल और सटीक माध्यम है इसीलिए इस तकनीक के द्वारा अब सैकड़ों चैनल उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवाने भी मुमकिन हो गए हैं। उपभोक्ताओं की पसंदानुसार चौबीसों घन्टे कुलबुलाहट होती रहती है, ऐसी उठापटक केबल टीवी के क्षेत्र में भी देखने को मिलनी तय है। उपभोक्ताओं को सीधे-सीधे प्रभावित करने के लिए केबल टीवी बहुत ही सरल और सटीक माध्यम है। इसीलिए इस तकनीक के द्वारा अब सैकड़ों चैनल उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवाने भी मुमकिन हो गए हैं। उपभोक्ताओं की पसंदानुसार चौबीसों घन्टे उनके टैलीविजनों पर नाना प्रकार के चैनलों का पहुंचना अब सामान्य सी बात हो गई है, जबकि केबल टीवी के आरम्भिक दौर में ऐसी कल्पना करना भी कठिन हुए करता था।
आज की सच्चाई की कडुवी हकीकत यह भी है कि एक नए व्यवसाय के रूप में जिन लोगों ने इसे व्यवसायिक तौर पर सींचा था उन्होंने भी तब यह कल्पना नहीं की थी कि एक मामूली सा व्यवसाय जिसे समाज भी हेय दृष्टि से देखता था, वह देखते ही देखते इतना बड़ा बन जाएगा कि सारी दुनिया के धनकुबेरों को ही ललचाने लगेगा—, तब यह कल्पनाओं से परे था। तब जब कोई सौ चैनलों की बात करता था, तब हर किसी के लिए यकीन से परे की बातें लगा करती थीं, क्योंकि तब भारत में प्रचलित टैलीविजन ही मात्र 8 या 12 चैनलों के ट्यूबर वाले हुआ करते थे। बहुत तेजी के साथ बदलाव आया, चैनलों की संख्या बढ़ने के साथ-साथ केबल टीवी उपभोक्ताओं की संख्या भी खूब बढ़ती गई। धीरे-धीरे टेलिविजन ड्राइंग रूम के साथ-साथ हरेक कमरे में होते हुए रसोईघर तक पहुंच गए। चैनलों पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों ने समाज को एक नई संस्कृति में ही रंगना शुरू कर दिया। घरेलू वातावरण भी धीरे-धीरे केबल रेड्डी सा होने लगा। हरेक वर्ग व उम्र के लिए अलग-अलग चैनल व कार्यक्रमों ने सबके लिए अलग-अलग टैलीविजन के रास्ते बनाए। इस प्रकार से बाजार की धारा में देश की सारी आबादी को ही बहा लिया जाएगा, इसकी उम्मीद नहीं थी, लेकिन सच यही है। सवा सौ करोड़ से भी अधिक देश की आबादी आज विश्व के सबसे बडे उपभोक्ता प्रधान देश के रूप में सारी दुनिया को ललचा रही है।
जबकि इन उपभोक्ताओं को केवल कुछ चैनल पहुंचा कर ही केबल टीवी ऑपरेटरों ने मान लिया है कि उन्होंने अपना काम कर दिया है। इण्डष्ट्री में आने वाले बदलावों को देखते हुए अभी निश्चित तौर पर यह दावा भी नहीं किया जा सकता है कि भविष्य में यह उपभोक्ता केबल टीवी ऑपरेटरों पर निर्भर रहेंगे भी कि नहीं—\ हो भी सकता है कि टैक्नोलॉजिकल बदलाव के बाद केबल टीवी आपरेटरों पर निर्भरता बिल्कुल ही खत्म हो जाए—। उपभोक्ता ही ऑपरेटरों की मूल पूँजी है, लेकिन टैक्नोलॉजी ऑपरेटरों से उपभोक्ताओं को बिल्कुल अलग भी कर सकती है। इस सच्चाई से ऑपरेटरों का आंखें मूदना घातक साबित हो सकता है, लेकिन अभी उपभोक्ता पूर्णतया आपरेटरों पर ही निर्भर है, जबकि कुछेक उपभोक्ताओं ने केबल टीवी से अलग होकर अन्य तकनीक डीटीएच भी अपना लिए हैं।
डीटीएच की एक दो नहीं बल्कि सात कम्पनियां प्रचलन में हैं, जो टुकुर-टुकुर कर केबल टीवी ऑपरेटर खमोशी से अपने उपभोक्ताओं को अपने से अलग होते देख तो रहे हैं लेकिन उपभोक्ताओं से सदैव जुड़े रहने के लिए कोई प्रयास नहीं कर रहे हैं, जबकि चैनलों के अतिरिक्त उनकी जरूरतें भिन्न सेवाओं के साथ-साथ तमाम प्रोडक्ट्स भी हैं। ऑपरेटरों को चाहिए कि केबल टीवी के लिए भले ही उपभोक्ताओं की निर्भरता खत्म हो जाये लेकिन अन्य सेवाओं के लिए वह सदैव ऑपरेटरों से जुड़े रहेें। उपभोक्ताओं के खजाने से भरे होने के कारण ही आज ऑपरेटरों का महत्व है अन्यथा उनके प्रति नजरिए ठीक नहीं प्रतीत होते हैं किसी के भी।
केबल टीवी में तकनीकी बदलावों को समय के अनुरूप छोड़ कर उपभोक्ताओं के लिए अन्य सेवाओं की शुरूआत अब कर दी जानी चाहिए, क्योंकि अभी ऑपरेटरों के पास मीडिया का माध्यम भी है, जिसका इस्तेमाल वह अपनी मर्जीनुसार कर सकते हैं। अन्य सेवाओं के लिए वह उपभोक्ताओं के साथ सदैव के लिए जुड़े रह सकते हैं, तब उपभोक्ताओं को वह कई प्रोडक्ट्स भी उपलब्ध करवा सकते हैं, लेकिन ऑपरेटरों को केबल टीवी के साथ-2 अन्य सेवाएँ भी उपलब्ध करवाने में अब और विलम्ब ना कर तुरन्त जुट जाना चाहिए।
अन्य सेवाओं के लिए ‘राष्ट्रव्यापी वृहत सेवा योजना’ की रूप रेखा आविष्कार मीडिया ग्रुप ने रची है, जो कि देशभर के केबल टीवी प्रदाताओं को केन्द्रीयकृत कर शुरू की जाएगी। केबल टीवी ऑपरेटरों के देशभर में करोड़ों उपभोक्ताओं को यह सेवा उपलब्ध होगी, जिसका मुख्य सूत्रधार ही ऑपरेटर होगा। आरम्भ में कुछ सीमित सेवाओं से शुरूआत की जाएगी, लेकिन आवश्यकतानुसार सेवाओं में वृद्धि की जाती रहेगी। चौबीसों घन्टों देश के किसी भी शहर-कस्बे गांव पहुंचने में केबल टीवी नैटवर्क को केन्द्रीयकृत किया जाएगा एवं उपलब्ध सेवाओं की जनकारी उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के लिए केबल टीवी माध्यम सहायक बनेगा।
‘चेतना यात्र-5’ में जिस प्रकार से देशभर के केबल टीवी ऑपरेटरों के सहयोग से ग्लोबल वार्मिंग के प्रति लोगों में जागृति लाने के लिए देशभर में वृक्षारोपड़ अभियान चलाया गया, उसी प्रकार ‘चेतना यात्र-6’ के अन्तर्गत ग्रीन ब्रॉडकास्टिंग एण्ड ई वेष्ट निदान के अन्तर्गत ग्रीन ब्रॉडकास्टिंग एण्ड ई वेष्ट निदान पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। ग्रीन ब्रॉडकास्टिंग के अर्न्तगत ब्रॉडकासि्ंटग इण्डष्ट्री में संलग्न भिन्न सैटेलाइट चैनलों सहित उनके प्रतिनिधियों का भी सहयोग इस मिशन में लिया जाएगा, जबकि प्रोडक्शन हाऊसेस एवं टेक्नीकल क्षेत्र में रिनेबल इनर्जी के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
ब्रॉडकास्टिंग क्षेत्र व उससे जुडे़ समस्त सम्बन्धियों को मात्र इतना सा सन्देश देने का प्रयास किया जाएगा कि उनके द्वारा किए जाने वाले किन्हीं भी कार्यों से पृथ्वी के तापमान में होने वाली वृद्धि को रोकने एवं उसके एवज में पर्यावरण को शुद्ध करने के लिए वह यथासम्भव योगदान दें।
इसी प्रकार देशभर के केबल टीवी ऑपरेटरों को अलग से यह सन्देश देने की कोशिश की जाएगी, कि केबल टीवी में खराब होने वाले पुराने तारों को वह जिस प्रकार से कबाड़ियों को बेंच देते हैं, कबाड़ी उन तारों में से कापर निकालने के लिए जब उन्हें जलाते हैं, तब कई जहरीली गैसें वातावरण में घुल जाती हैं जोकि वापिस हमारे ही श्वांस में पहुंचती हैं, ऐसी स्थितियों को पूर्णतया रोकने के लिए हमें मिलकर इलैक्ट्रानिक कचरे के प्रति लोगो में जागरूकता लानी होगी। जरूरत राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान की है, जिसे ब्रॉडकास्टिंग एण्ड केबल टीवी क्षेत्र से जुड़े लोग बहुत ही बेहतर तरीके से निभा सकते हैं, शुरूआत बस एक पहल की है—!!

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