‘चेतना यात्रा-6’ (प्रथम भाग) दिल्ली से चण्डीगढ़ के रास्ते रुद्रपुर तक

पृथ्वी के बढ़ते जा रहे तापमान के कारण प्रकृति में आ रहे बदलावों का संदेश भले ही हर एक शख्स ना समझ पा रहा हो लेकिन बदलाव तो आते ही रहेंगे, बशर्तें उन बदलावों के कारण को समझ कर जब तक मानव जाति निवारण की ओर कदम नहीं बढ़ाएगी। दुनिया भर के तमाम देश प्रकृति के उन बदलावों के प्रति गाहे-बगाहे चिन्ता जताते रहते हैं लेकिन अकेले उनकी चिन्ता समाधान नहीं बन सकती है। धीरे-धीरे समस्या ने इतना विकराल रूप धारण कर लिया है कि अब पृथ्वी के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिह्न लगने लगे हैं।

आवश्यकता समूची मानव जाति को जागरूक करने की है, अन्यथा हमारी भावी पीढ़ियां स्वयं को बहुत ही भयानक वातावरण में पाएंगी। हम बहुत ही तेजी के साथ उस भविष्य की ओर बढ़ते जा रहे हैं। पृथ्वी के बढ़ते तापमान के साथ-साथ हमारा देश इलेक्ट्रॉनिक कचरे का भी ढे़र बनता जा रहा है। दुनिया भर के देशों से यह कचरा भारत में डम्प हो रहा है। इस ई कचरे के कारण भी हमारे देश के वातावरण में विषैली गैसों का मिश्रण बढ़ता जा रहा है। अब वह दिन दूर नहीं रह गए हैं जब शुद्ध श्वांस लेने के लिए तमाम ऑक्सीजन चैम्बर उपलब्ध होंगे। जिस प्रकार से अब डॉक्टर के पास पहुंचते ही अनेक टैस्टों की पर्ची थमा दी जाती है, उसी प्रकार से वही डॉक्टर मरीजों को ऑक्सीजन चैम्बर में घन्टे-दो घन्टे सुबह-शाम या पिफ़र केवल सुबह के समय या पिफ़र सिपफ़र् शाम को ऑक्सीजन चैम्बर का मशविरा भी देने लगेंगें।

यह निरी कल्पना नही है बल्कि जिस प्रकार से हम अपने वायुमण्डल को दूषित होने के प्रति सजग नही हैं, उस स्थिति में जिन्दा रहने के लिए हमें ऑक्सीजन तो किसी ना किसी रूप में लेनी ही होगी। हो भी सकता है कि भविष्य में जब आप डॉक्टर के यहां जाएं तब वह यह भी कहे कि आप की कौन से सैल्स में ऑक्सीजन की मात्र कापफ़ी कम है, बेहतर होगा कि आप ऑक्सीजन चैम्बर में जाकर ऑक्सीजन लें। पिफ़लहाल हमें केवल पैसा और बस पैसा इकट्ठा करने की ही हवस लगी हुई है। इसी पैसे से तमाम सुविधाओं के साथ हमें या फिर हमारी पीढ़ियों ने कितनी बड़ी कीमत चुकानी होगी, उसकी हमने कल्पना भी नहीं की है।

बहरहाल पृथ्वी के बढ़ते जा रहे तापमान एवं इलैक्ट्रॉनिक कचरे के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के लिए आरम्भ की गई ‘चेतना यात्र-6’ को ‘ग्रीन ब्रॉडकास्टिंग चेतना यात्र-6’ नाम दिया गया है। ग्रीन ब्रॉडकास्टिंग से अभिप्राय है कि समूची ब्रॉडकास्टिंग एण्ड केबल टीवी इंडष्ट्री इस अभियान में पूर्ण ईमानदारी के साथ लोगों में जागरूकता लाने के लिए एक जुट होकर योगदान करें, क्योंकि यह इण्डष्ट्री मीडिया की सशक्त भूमिका में बहुत प्रभावशाली बन गई है। प्रिन्ट मीडिया के मुकाबले में इलैक्ट्रॉनिक मीडिया जनमानस को ज्यादा प्रभावित करता है, अतः समूची मानव जाति की रक्षार्थ मिीडया की भूमिका एक बड़ा बदलाव ला सकती है। ब्रॉडकास्टर से लेकर लास्टमाईल ऑपरेटर तक समस्त कड़ियां इस पर कुछ ना कुछ योगदान करें तो निश्चित ही आम जनमानस में बड़ी जागरूकता लाई जा सकती है।

भिन्न समाचार चैनलों का इस मामले में योगदान नहीं मिल सका, शायद समूची मानव जाति पर मण्डरा रहे खतरे की घन्टी के मुकाबले में खान-क्रिकेट-मुन्नी बदनाम हुई कॉमनवैल्थ गेम्स, डेंगू या पिफ़र बाढ़ से डराने का सिलसिला ज्यादा महत्वपूर्ण है। हालांकि ब्रॉडकास्टर को ऐसी चेतना यात्र के लिए प्रायोजक भी मिल सकते थे, लेकिन अभी उनके लिए ग्लोबल वार्मिंर्ग से भी ज्यादा जरूरी शायद अन्य मामले रहे होंगे। ‘ग्रीन ब्रॉडकस्टिंग चेतना यात्र-6’ की शुरूआत देश के प्रथम हिन्दी मनोरंजन चैनल जी टीवी के सहयोगी, हिन्दी भाषी क्षेत्रें में सर्वाधिक देखे जाने वाले समाचार चैनल ‘जी न्यूज’ ने प्रसारित कर हौसला अफजाई की। 5 सितम्बर से 31 अक्टूबर तक देश के करोड़ों लोगों तक ग्लोबल वार्मिंग के प्रति जागरूकता के सन्देश पहुंचाने के लिए चेतना यात्र-6 दिल्ली से भिवानी पहुंची।

ग्लोबल वार्मिंग पर चेतना यात्र भिवानी पत्रकारों के लिए अनेक प्रश्न लिए हुई थी, जबकि भिवानी व नजदीकी क्षेत्रें से आए केबल टीवी ऑपरेटरों के लिए ग्रीन ब्रॉडकास्टिंग सवाल बना हुआ था, तमाम प्रश्नों के उत्तर मिल जाने पर बात इण्डष्ट्री के भविष्य की ओर बढ़ गई, तब इण्डष्ट्री में होने वाली उथल-पुथल व भावी सम्भावनाओं के बारे में जानकारी प्राप्त कर सबकी सन्तुष्टि हुई। भिवानी में वृक्षारोपड़ भी किया गया, तत्पश्चात यात्र अगले पड़ाव की ओर बढ़ गई। अगला पड़ाव हरियाणा से निकल कर राजस्थान के बीकानेर में होना था। भिवानी से बीकानेर तक का सफर कुछ लम्बा रहा, लेकिन हरियाली से रेगिस्तान की ओर जाने का भी अनुभव हुआ। भिवानी से चल कर हरियाणा राजस्थान सीमा पर हरियाणा के आखिरी कस्बे बहल के केबल टीवी ऑपरेटर को ग्लोबल वार्मिंग के प्रति लोगों को जागरूक करने का सन्देश देते हुए राजस्थान की सीमा में प्रवेश किया चेतना यात्र ने।
राजस्थान में केबल टीवी व्यवसाय में खासा बदलाव देखने को मिला। झुंझनू, सीकर,चुरू आदि अनेक कस्बों में केबल टीवी का संचालन तकरीबन एक ही जगह से होता है। छोटे-छोटे कस्बों में छोटे-छोटे नेटवर्क लगे हुए हैं। यात्र जैसे-जैसे आगे बढ़ती रही हरियाली उतनी ही दूर होती रही। बीकानेर तक पहुंचते-पहुंचते सारा क्षेत्र मरूस्थल नजर आने लगा। ऐसे क्षेत्र में हरियाली के लिए दुबई से प्रेरणा लेकर ही राजस्थान सरकार चाहे तो बहुत कुछ कर सकती है, लेकिन सरकारों के लिए ऐसे कार्य प्राथमिकता पर नहीं हुआ करते हैं। इन क्षेत्रें में केबल टीवी ऑपरेटरों का स्थान निजी कर्मचारियों ने ले लिया है अतः उनसे यात्र में किसी सहयोग की अपेक्षा नहीं की जा सकती है। भिवानी से बीकानेर और पिफ़र बीकानेर से श्रीगंगानगर तक की यात्र ने पूर्णरूप से रेगिस्तान थकावट को हर लिया। मुस्कान केबल के मनोज द्वारा ग्लोबल वार्मिंग के प्रति लोगों में जागरूकता लाने के प्रयासों का आश्वासन लेकर यात्र भटिण्डा के लिए रवाना हो गई।

राजस्थान में केबल टीवी में संलग्न लोगों से अपील की गई कि वह अपनी खराब केबल कबाड़ियों को ना बेचें, क्योंकि कबाड़ी केबल में से कापर-धातु निकालने के लिए उन्हें खुले में जलाते हैं, जिससे जहरीली गैसें निकल कर वायुमण्डल में मिलती हैं। वायुमण्डल को प्रदूषित ना होने दें व ना ही वह ऐसा कोई काम करें जिसके कारण वायुमण्डल प्रदूषित हो। बीकानेर से पंजाब की ओर बढ़ती यात्र में राजस्थान का हरियाणा पंजाब सीमा पर स्थित कस्बा श्री गंगानगर हरा-भरा समृद्ध व राजस्थान में होते हुए भी राजस्थान से भिन्न लगा। गंगानगर पर राजस्थान से ज्यादा हरियाणा और पंजाब का प्रभाव दिखाई देता है। इस मार्ग से खुशहाल पंजाब के प्रमुख शहर भटिण्डा पहुंचने पर यात्र का भव्य स्वागत हुआ। सर्वप्रथम तो भटिन्डा का आमन्त्रण पफ़ूड कोर्ट यात्र के स्वागत की प्रतीक्षा में मिला। दरअसल भटिण्डा में नया-नया शुरू हुआ मित्तल माल का प्रमुख आकर्षण बना।

आमंत्रण पफ़ूड कोर्ट माल में आने वाले हर किसी को आकर्षित करता है। इसी आमन्त्रण ने चेतना यात्र-6 को भी निमन्त्रित किया एवं ग्लोबल वार्मिंग के प्रति लोगों को जागरूक करने व प्रदूषण को रोकने के लिए यथासम्भव योगदान का आश्वासन दिया। आमन्त्रण में आने वाले तमाम ग्राहकों को भी ग्लोबल वार्मिंग के प्रति जागरूकता अभियान में सहयोग देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। भटिण्डा में मदन जिन्दल आदि के साथ वृक्षारोपड़ भी किया गया। वृक्षारोपड़ कार्यक्रम के बाद मोगा के रास्ते यात्र लुधियाना पहुंची। पफ़ास्टवे मीडिया ग्रुप द्वारा लुधियाना में यात्र के भव्य स्वागत सहित वृक्षारोपड़ एवं मीडिया कवरेज के द्वारा पूरे पंजाब में यात्र का सन्देश पहुंचाया गया। लुधियाना के बाद चेतना यात्र जालन्धर पहुंची, जहां दर्शन कपूर आदि यात्र के स्वागत में तत्पर मिले।

रात्रि विश्राम जालन्धर में कर दिन में वहां के प्रमुख उद्योगपति शीतल विज जी के साथ भेंटवार्ता में कापफ़ी सकारात्मक आशाएं लिए यात्र अमृतसर पहुंची। अमृतसर में स्वर्ण मन्दिर दर्शन कर जालियांवाला बाग की स्मृतियों का अनुभव किया। अमृतसर में ही रात्रि विश्राम कर अगले दिन वहां भी वृक्ष लगाए, ग्लोबल वार्मिंग के प्रति की जा रही यात्र को जलियांवाला बाग के शहीदों को समर्पित करते हुए। अमृतसर में वृक्षारोपड़ का बन्दोबस्त राजूभाई के निर्देशन में बब्बी भाई के द्वारा किया गया। अमृतसर से यात्र जम्मू पहुंची, जहां सुभाष चौधरी के साथ दिल्ली से पधारे इंडष्ट्री के कई अन्य प्रमुख ब्रॉडकास्टिंग एण्ड चैनल डिस्ट्रीब्यूशन में संलग्न लोगाें ने भी गर्मजोशी के साथ स्वागत किया।

सभी ने प्राथमिकता के साथ यात्र में सहभागी बन वृक्षारोपड़ में भी सहयोग दिया। एक प्रकार से इस यात्र का जम्मू ही एक ऐसा पड़ाव रहा जहां वास्तव में ब्रॉडकास्टिंग एण्ड केबल टीवी इंडष्ट्री के लोग एक साथ मौजूद रहे। जम्मू से गुदगुदाती स्मृतियों के साथ सबसे विदाई लेकर पठानकोट के रास्ते नूरपुर होते हुए सीधे पहुंची यात्र। डलहौजी की प्राकृतिक सौन्दर्यता से भी ज्यादा स्वास्थ्य वर्धक प्राकृतिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध ‘खाज्जियार’ पहुंच विश्राम किया, जबकि वृक्षारोपण की यहां कोई गुंजाईश नहीं दिखाई दी। देवदार के घने वन और उनकी महक जादू सा असर कर रही थी, लेकिन चेतना यात्र-6 को तो आगे ही बढ़ते रहना है, इसलिए भारत का स्विट्जरलैण्ड कहे जाने वाले खज्जियार से रवाना होकर चम्बा की ओर बढ़ी यात्र।

यहां यह उल्लेख किया जाना जरूरी है कि जम्मू के बाद पठानकोट होकर नूरपुर से डलहौजी,खज्जियार,सुल्तानपुर,चम्बा से मैक्लोरगंज के मार्ग में ऐसे तमाम पहाड़ दिखाई दिए जो बिल्कुल नंगे हो चुके हैं। बिना हरियाली के वह पहाड़ दीमक की बड़ी बाम्बी जैसे प्रतीत होते हैं। उन पहाड़ों की स्थिति भविष्य पर मण्डरा रहा खतरा दर्शाती है। घने वन भी पहाड़ों की शोभा बढ़ा रहे हैं, लेकिन इन्ही घने वनों के बीच-बीच में उन नंगे हो चुके पहाड़ों की स्थिति चिंताजनक है। खज्जियार में डलहौजी पब्लिक स्कूल की छात्रओं के साथ ग्लोबल वार्मिंग के प्रति जागरूकता अभियान का सन्देश देते हुए यात्र चम्बा की ओर बढ़ी।

इस पूरे मार्ग पर रास्ता ढ़लाव वाला ज्यादा रहा, अतः खज्जियार से उतरते हुए गाड़ी के अगले पहियों में से रबड़ जलने की बदबू के साथ पहिये गर्म होने लगे हैं। लगातार घुमावदार ढ़लाव मार्गों से गुजरते हुए सबसे बड़ा खतरा गाड़ी के ब्रेक पफ़ेल होने का लगा हुआ था, लेकिन दूर तलक कोई ऐसा साधन नही था जहां इलाज सम्भव हो। इसी स्थिति में गाड़ी को चम्बा तक ले जाना विवशता थी, अतः बहुत ही सावधानी के साथ गाड़ी को धीमी गति पर चलाते हुए किसी तरह रास्ता पूर्ण कर चम्बा से सटे सुल्तानपुर तक पहुंचाया गया, वहां गाड़ी ठीक करवाकर ऐतिहासिक देवभूमि चम्बा पहुंची यात्र। वहां श्री आशाराम जी के प्रवचन चल रहे थे, पूर्णतया छुट्टी का माहौल बना हुआ था चम्बा में। चम्बा के केबल टीवी ऑपरेटरों को इंडष्ट्री की भावी सम्भावनाओं के साथ-साथ इन नंगें पहाड़ों के प्रति भी आगाह कर यात्र धर्मशाला के लिए आगे बढ़ी।

धर्मशाला की ऊंचाईयों को पार कर यात्र दलाई-लामा नगरी मैक्लोटगंज पहुंची। हिमाचल प्रदेश के अन्य शहरों से बिल्कुल ही अलग दिखाई दिया मैक्लोटगंज। यहां विदेशी सैलानियों की भारी मौजूदगी बहुत कुछ बयान कर रही थी। इतनी भारी संख्या में यहां पहुंचने वाले विदेशी सैलानियों का दलाईलामा भक्त होना कारण नहीं है, उनकी पूजा-पाठ, सभ्यता-संस्कृति जानने की जिज्ञासा तो हमें भी रही, लेकिन वहां पहुंचने वाले सभी विदेशी पर्यटकों का आकर्षण लामा जीवन के अतिरिक्त कुछ और भी है ऐसा प्रतीत हुआ। मैक्लोटगंज में लामा की दिनचर्या, मठ, मन्दिर पूजा खान-पान के दर्शन कर यात्र बिलासपुर पहुंची। पूर्वयात्र में बिलासपुर के जिस गांधीसागर डैम का जिक्र हमने एक सूखी बरसाती नदी की भांति किया था, वह डैम अब पानी से लबालब भरा मिला। निरन्तर बारिस में यात्र आगे बढ़ रही है, लेकिन कई जगह पहाड़ गिरे हुए और उनका मलबा हटाने के काम में लगे लोग दिखाई देते हैं।

बिलासपुर से शिमला पहुंच वहां के ऑपरेटरों एस-एन-खन्ना एवं मुकेश मल्होत्र के साथ पृथ्वी के बढ़ते जा रहे तापमान के प्रति जागरूकता अभियान में सहभागिता करने के साथ इंडष्ट्री की भावी सम्भावनाओं पर भी लम्बी चर्चा हुई, तत्पश्चात शिमला से सोलन पहुंची चेतना यात्र। सोलन से आगे का रास्ता हरियाणा में अम्बाला यमुनानगर से सहारनपुर का पूर्व नियोजित था लेकिन बाढ़ के पानी के कारण अवरूद्ध हो चुके उस मार्ग को बदलना पड़ा। सोलन से पंचकुला पहुंच राजेश मलिक व चण्डीगढ़ में मनमोहन सिंह बाजवा एवं टीम के साथ यात्र का मकसद शेयर कर यात्र नाहान-पौन्टा साहिब मार्ग से देवभूमि उत्तराखण्ड देहरादून पहुंची। देहरादून के मार्ग में भी पौन्टा साहब से पूर्व भूस्खलन के कारण घन्टों मार्ग अवरूद्ध रहा।

वायस ऑपफ़ नेशन (टव्छ) चैनल प्रमुख मनीष वर्मा द्वारा यात्र के देहरादून पहुंचने पर बड़ी गर्मजोशी से स्वागत करते हुए सीधा प्रसारण भी किया गया। टव्छ चैनल के समस्त कर्मचारियों के स्वागत सत्कार के बाद चेतना यात्र-6 पर चैनल द्वारा लिया गया साक्षात्कार भी सीधे प्रसारित किया गया। देहरादून में यात्र वायस ऑपफ़ नेशन चैनल की मेहमान नवाजी में रही। देहरादून से आगे के सपफ़र पर चलने से पहले गाड़ी की पूर्णतया मरम्मत का कार्य करवाया गया, इस कार्य में सारा दिन ही बीत गया, अतः गाड़ी ठीक करवाने के बाद देहरादून से रवाना होकर हरिद्वार ही पहुंच सकी यात्र। हालांकि टैन स्पोटर्स द्वारा आयोजित देहरादून पार्टी का निमन्त्रण भी मिला, जहां इस क्षेत्र के बहुत सारे ऑपरेटरों के साथ एक ही स्थान पर भेंट का अवसर था, लेकिन पूर्व नियोजित कार्यक्रमानुसार यात्र का ठहरना बहुत कठिन है।

हरिद्वार में कैप्टन गुप्ता एवं हरीश मल्होत्र आदि के साथ ग्लोबल वार्मिंग पर्यावरण सम्बन्धित जागरूकता पर लम्बी चर्चा के साथ-साथ इंडष्ट्री की भावी सम्भावनाओं पर जानकारी देकर यात्र अगले पड़ाव बिजनौर पहुंची। बिजनौर में बिजनौर जिले के भिन्न क्षेत्रें के ऑपरेटरों से एक स्थान पर ही बैठक हो गई। उन्हें पर्यावरण को स्वच्छ रखने एवं ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी पर लगने वाले प्रश्न चिह्न के प्रति आम जनमानस में जागरूकता लाने के लिए विशेष अभियान चलाने का आह्वाहन कर स्यौहाराकांठ मार्ग से यात्र मुरादाबाद पहुंची।

मुरादाबाद बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य वकीलों, भिन्न राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं एव प्रैस क्लब मुरादाबाद के साथियों को पृथ्वी पर बढ़ते जा रहे खतरे के प्रति आगाह करते हुए समूची मानव जाति की सुरक्षार्थ हर शख्स को इसके लिए अपनी योगदान देने का आग्रह किया। इलैक्ट्रानिक कचरे के कारण वायुमण्डल में बढ़ते जा रहे प्रदूषण के बारे में जानकारी दी गई एवं वहां वृक्षारोपड़ का कार्यक्रम भी किया गया। मुरादाबाद बार एसोसिएशन के साथ-साथ केबल टीवी ऑपरेटर पिफ़रासत खां एवं प्रैस क्लब के सदस्यों से भी आग्रह किया गया कि इस अभियान में वह एकजुट होकर प्राथमिकता पर कार्य करें।

मुरादाबाद से विदाई लेकर यात्र नैनीताल की ओर बढ़ी, लेकिन इस क्षेत्र में प्राकृतिक तबाही बाढ़ के रूप में कहर बरपा रही है। मुख्य मार्गों पर बाढ़ का पानी भर गया है। आगे बढ़ते रहना सम्भव नहीं रह गया है, नैनिताल के लिए सभी मार्ग बंद हो चुके हैं, अतः मुरादाबाद से रवाना होकर बाढ़ के पानी को देखने वाले लोगों के हुजूम से निकलते हुए बाजपुर तक ही पहुंच सकी यात्र। बाजपुर में बाढ़ के पानी ने आगे का रास्ता रोक दिया अतः रूद्रपुर के रास्ते यात्र नैनीताल के लिए बढ़ी। रूद्रपुर में भी बाढ़ के पानी ने सड़कों को डुबो लिया अतः आगे बढ़ने की कोई गुंजाईश नहीं रही। रात्रि विश्राम रूद्रपुर में ही किया गया।

मुरादाबाद हरिद्वार,बिजनौर,रामनगर, अल्मोड़ा, हरिद्वार, श्रषिकेश, काशीपुर, नैनीताल, हल्द्वानी आदि सभी क्षेत्रें में निरन्तर बारिस के कारण बाढ़ के पानी ने लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। कोशी-राम गंगा आदि अनेक नदियों ने विकराल रूप धारण किया हुआ है, जबकि अल्मोड़ा में बादल पफ़टने से जानमाल का भारी नुकसान हुआ है। बरेली-रूद्रपुर, रामपुर, मुरादाबाद सहित दिल्ली,लखनऊ राजमार्ग भी बन्द हो गया है। स्थिति पूर्णतया बाढ़ ग्रस्त है, इसलिए रूद्रपुर से आगे की स्थिति का पूर्वानुमान अभी नहीं लगाया जा सकता है।

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