चेतना यात्रा (भाग 4)पटना से बिलास पुर (छत्तीसगढ़)

दिल्ली से बिहार की राजधानी पटना पहुंचने के लिए यह ‘चेतना यात्र-10’ हरियाणा, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड, चण्डीगढ़ व उत्तर प्रदेश का दौरा पूर्ण कर चुकी है। जम्मू एंव कश्मीर का दौरा वहां आई भंयकर बाढ़ के कारण नहीं हो सका, लेकिन यात्र सम्पूर्ण भारत के दौरे पर है। यात्र में लिख पाना बहुत कठिन हुआ करता है क्योंकि दिनभर की दिनचर्या बहुत थकाऊ होती है। रात्रि विश्राम के बाद सुबह से फिर आगे के कार्यक्रम तय होते है, वहां समय से पहुंचना और समय की लय को बनाए रखना बहुत कठिन होता है। इलाहाबाद से पटना का लम्बा सफर कर देर रात जब होटल में पहुंचते है तो जरूरी नहीं कि भोजन भी मिले। ऐसी स्थिति के लिए ब्रैड-बटर, खीरा,प्याज,टमाटर भी गाड़ी में रखा जाता है, लेकिन ज्यादा तर पूरा सामान साथ नहीं होता है, क्योंकि ब्रैड और बटर सभी जगह उपलब्ध नहीं होता है और यह दोनो चीजें ज्यादा देर के लिए सफर में साथ रखने से खराब हो जाती है। पटना का प्रबन्ध वहां के एम-एस-ओ- भाई सुशील कुमार द्वारा किया गया था, अतः दिक्कत नहीं आई।


पटना दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग करने के बाद यात्र सीधे लखीसराय पहुंची। लखीसराय के दूरदर्शन केन्द्र में केबल टी-वी- आपरेटर बड़ी सख्ंया में काफी देर से प्रतीक्षा कर रहे थे। उनके साथ मीटिंग मे समय थोड़ा ज्यादा बीत गया, सवाल-जवाब भी कुछ ज्यादा ही हो गए और लखीसराय से आगे बढ़ने का भी समय नहीं रह गया। लखीसराय से आगे जमुई होते हुए देवघर जाना है, मार्ग बहुत बढ़िया नहीं कहा जा सकता है। बात सड़कों की करें तो यह पता ही नहंीं चलता कि सड़को में गडढ़े है या फिर गड्ढ़ों में ही सड़के है। जिस पर नक्सलवादियों ने बन्द भी बुलाया हुआ है। उनकी बन्द की घोषणा का मतलब बन्द ही होता है यहां। अतः अन्धेरा हो जाने के बाद लखीसराय से आगे के सफर के लिए सभी ने मना किया, तो रात्रि विश्राम के लिए लखीसराय में ही रूकना तय किया गया, लेकिन रूका कहां जाए—\ यहां तो ऐसा कोई होटल भी नहीं है जहां रात गुजरे, खाने के लिए तो अभी सोचना भी शुरू नहीं किया था।

समय बहुत बलवान होता है, हर किसी को उसी के अनुसार ही चलना होता है। लखीसराय के ही एक केबल टी-वी- ऑपरेटर ने बताया कि एक होटल है, चलिए मेरे साथ वहां मेरी ही केबल भी लगी हुई है। वहां दूरदर्शन केन्द्र से केवल दूरदर्शन चैनलस का ट्रासमीशन ही किया जाता है, लेकिन केबल टी-वी- ऑपरेटरों के ट्रांसमिशन में दूरदर्शन चैनलों का प्रसारण किया जा रहा है या नहीं उस पर निगरानी भी वह रखते है। विनोद कुमार लखीसराय दूरदर्शन केन्द्र को देखते है। वहां मात्र 35 चैनल का एनॉलाग कन्ट्रोल रूम लगा हुआ है, जिससे कई केबल टी-वी- ऑपरेटर जुडे हुए है।


ऑपरेटरों ने बताया कि दूरदर्शन केन्द्र में लाईट फेल हो जाने पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है अतः ट्रांसमिशन कई-कई घण्टों बन्द रहता है। ऐसे में केबल टी-वी- ऑपरेटर क्या करें—\ मात्र 35 चैनलों में दूरदर्शन के सभी चैनलों का प्रसारण कर पाना सम्भव नहीं है। तब ऑपरेटरों को बताया गया कि एनॅालाग मोड में मात्र 5 चैनलों का ही प्रसारण प्राईम बैण्ड पर किया जाना अनिवार्य होता है अतः आपको दूरदर्शन के सभी चैनलों का प्रसारण नहीं करना है। लखीसराय में आपरेटरों द्वारा दूरदर्शन केन्द्र के प्रति तमाम खमियों का जिक्र किया गया जिन्हें सुधारने के लिए उन्होनें मांग की। ऑपरेटरों के केबल कनैक्शन भी बहुत कम है। इनमें से कई ऑपरेटर 50 कनैक्शन के आस-पास वाले भी है, लेकिन डैस के बारे में जानने के लिए वह भी बहुत उत्सुक दिखाई दिए। बारहाल एक केबल टी-वी- ऑपरेटर के साथ जिस होटल में पहुंचे, वहां की प्रशंसा करनी होगी, क्योकि होटल ज्यादा छोटा होने के बावजूद भी बहुत छोटे-छोटे 10ग10 के कमरों के साथ अटैच्ड बाथरूम इंग्लिश एंव भारतीय कमोड दोनो साथ-साथ लगाए गए थे। एयर कन्डीशन वाला रूम हमें दिया गया जिसका पानी पाइप के द्वारा बाथरूम के दरवाजे में ही अटकाया हुआ था।

बाथरूम का दरवाजा बन्द करे तो पानी कमरे में ही बहता था, लेकिन कुल मिलाकर होटल को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करने के लिए काफी प्रयास किया गया था। हालाकि वहां खाने की कोई सुविधा नहीं थी, जबकि राहगीरों के लिए वहां खाटों के रूप में तख्त भी बिछाए हुए थे। खाने के लिए भी ऑपरेटर एक रैस्त्र में लेकर गया जो आर्डर पर ही सब कुछ बनाता था। लखीसराय में सुरक्षित रात्रि विश्राम कर सुबह फिर से यात्र आगे बढ़ी। लखीसराय से जमुई होते हुए देवघर का मार्ग पीछे गुजरे मार्ग से थोड़ा बेहतर है, लेकिन नक्सलियों द्वारा बुलाए गए बन्द का प्रभाव इस क्षेत्र में भी होता है। पूर्व निर्धारित समय से थोड़ा लेट चल रही है यात्र लेकिन बिना रूके लगातार जारी है। अतः देवघर में प्रतीक्षा कर रहे ऑपरेटरों को ज्यादा लम्बी प्रतीक्षा करनी पड़ी। देवघर के प्रमुख केबल टी-वी- ऑपरेटर कार्तिक ठाकुर के पिताजी की मृत्यु हो गई है, अतः उन्होंने उनके संस्कार के लिए जाना है, लेकिन वह हमारी प्रतीक्षा में देवघर में ही रूके हुए है, जबकि पिता जी की मृत्यु उनके परिवार में किसी अन्य शहर में हुई है जहां उन्हें जाना है।

उनसे हमने आग्रह भी किया कि आप हमारी प्रतीक्षा ना करें, चले जाएँ लेकिन वह हमसे मिल लेने के बाद ही वहां से रवाना हुए। देवघर बाबा (शिव)का स्थान है। बैजनाथ धाम की शिवभक्तों में बड़ी मान्यता है। यहां देश के कौने-कौने से शिवभक्तों का आना लगा रहता है। कांवडियों का तो यहां बहुत बड़ा मेला लगता है। देवघर में दूरदर्शन केन्द्र के स्थान पर ही मीटिंग बुलाई जिसमे देवघर के दोनो ऑपरेटर कार्तिक ठाकुर (निजी कन्ट्रोल रूम) एंव भारत ठाकुर (फीड पटना एंव दूरदर्शन अधिकारी संजीव कुमार सहित अनेक अधिकारी व ऑपरेटरों ने भी भाग लिया। देवघर मीटिंग के बाद शीघ्र ही धनबाद दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग ली। छोटी-माटी समस्याओं के लिए दोनों दूरदर्शन कर्मचारी एंव आपरेटरों के बीच सामंजस्य ही आवश्यक था, जो यात्र से किया गया, बाकी समस्याओं का सामाधान तो केवल कन्ट्रोल रूम से ही हो सकता है। धनबाद में भी था। देवघर एक तीर्थ स्थान है तो धनबाद कोयले की खान और बोकारो स्टील। यह क्षेत्र प्राकृतिक सम्प्दा से लबालब भरा हुआ है। कोयला चोरी कुछ लोगो के लिए उनकी दिनचर्या में शामिल है। वह रोजाना अपनी-अपनी साइकिलों पर लादकर जिस तरह से कोयला लाते ले जाते दिखते है, उसे चोरी नहीं बल्कि उनकी एक दिनचर्या एंव धनबाद की संस्कृति भी कहा जा सकता है। कोयला ले जाते साईकिल वालों से सरकारी कर्मचारियों का वसूली रसूक एक अनावश्यक प्रक्रिया प्रतीत होता है।

परन्तु सुबह से शाम तक वहां साईकिल पर कोयला ढ़ोते लोग बाहर वालों के लिए आकर्षण का केन्द्र होते है, जबकि स्थानिय निवासियों के लिए तो उनकी दैनिक दिनचर्या का ही वह भी एक हिस्सा बन चुका है। एक साइकिल पर इतना वजन पूरे फैलाव के साथ लादना ही अपने आप में अद्भुद लगता है और जब उस साईकिल को किसी चढ़ाई पर पूरा जोर लगाकर साईकिल वाला चढ़ाता चला जाता है, तब उस साईकिल को एक मोटर साईकिल सवार का पैर लगाकर धकेलते हुए सहयोंग देना भी भले ही देखने वाले को मदद दिखता हो, लेकिन वह मदद भी उस व्यवसाय का ही एक हिस्सा ही होता है। हमें यह भी मालूम हुआ कि बाकायदा इस कार्य में बड़े-बड़े ठेकेदार सहभागी होते है।

धनबाद से बोकारो पहुंची यात्र का जोरदार स्वागत किया गया। मीटिंग बोकारों दूरदर्शन केन्द्र में रखी गई, जो कि उन्हीं दूरदर्शन कर्मचारी संजीव कुमार ने आयोजित की थी जिन्होने देवघर में भी बुलाई थी। बोकारों के भाई अजय सिंह सोशल मीडिया पर कॉफी सक्रिय रहते है। उन्होंने ही वहां के केबल टी-वी- ऑपरेटरों का प्रतिनिधित्व किया। बड़ी संख्या में केबल टी-वी- ऑपरेटरों का वहां आना इस बात का प्रमाण है कि अब ऑपरेटरों में कुछ जानने और समझने की जिज्ञासा बढ़ती जा रही है, लेकिन समझ कब सकेंगे यह कह पाना बहुत कठिन है। बोकारो मीटिंग के बाद यात्र सीधे रांची पहुंची। राची झारखण्ड की राजधानी होने के साथ-साथ डैस सिटी भी है। रांची भी पूर्णतया डिजीटल पर चला गया है। यहां भी मन्थन जी-टी-पी-एल- एंव डैन के नेटवर्क चल रहें है। डैन व जी-टी-पी-एल- की फीड यहां कोलकाता से आ रही है जबकि मन्थन का कन्ट्रोल रूम लगा हुआ है। दूरदर्शन अधिकारी श्री चन्द्र शेखर द्वारा दूरदर्शन केन्द्र में ही मीटिंग रखी गई। डिजीटल टैक्नॉलाजी में दूरदर्शन के सभी चैनलों को कैरी करने में केबल टी-वी- ऑपरेटरों को कोई परेशानी भी नहीं है।

केबल टी-वी- ऑपरेटरों की ओर से राना अमिताभ सिंह (जी-टी-पी-एल-) इस क्षेत्र को देखते है, डैन के सुरेन्द्र दुबे एंव मथंन के सन्दीप मिश्रा आदि रांची डिजीटाइजेशन में काम कर रहे है। रांची मीटिंग निबटाने के बाद यात्र चान्दील होते हुए सीधे जमशेद पुर की ओर बढ़ी। यह मार्ग पूरी तरह से सामान्य नहीं कहा जा सकता है, क्योंकि बहुत ही ज्यादा संख्या में यहां हैवी वाहनों का आवागमन होता है। जमशेद पुर को टाटा नगर भी कहा जाता है टाटा नगर पूरी तरह से टाटा की जागीर है, वहां के निवायसी भी अधिकांश टाटा के ही कर्मचारी है, लेकिन टाटा नगर की प्रगति निरन्तर जारी है। देर रात यात्र जमशेद पुर पहुंची। भाई गुडडू गुप्ता ने प्रवीण भाई एंव अन्य ऑपरेटरों को एकजुट कर पूरे शहर का एक सांझा कन्ट्रोल रूम वहां लगा लिया है।

इससे पहले यहां कई नेटवर्क चल रहे थे। स्वंय गुड्डू गुप्ता सिटी केबल से जुडे हुए थे, जबकि प्रवीण मन्थन से, हलीम भाई डैन, तो अशोक भडानी जी-टी-पी-एल- एंव गोपाल मन्थन चलाते थे। इन सबके बीच एक इण्डिपैन्डैंट ऑपरेटर अशोक रैन्गोसिया भी टाटानगर में हुआ करते थे, लेकिन इन सबको एक साथ मिलाकर ज्ठच्स् (ट्रस्टलाइन ब्राडबैण्ड सर्विस प्रा-लि-) बना दिया गया है। डिजीटल कन्ट्रोल रूम भी लगा दिया गया है एंव सभी पे चैनल भी चल रहे हैं, अब जरूरत सिर्फ डैस लायसेंस की ही रह गई है। यह बहुत अच्छी बात है कि अलग-अलग एक दूसरे से बिल्कुल भिन्न राय रखने वाले एक-दूसरे के साथ सालों से प्रतिस्पर्धा रखने वाले केबल टी-वी- ऑपरेटर अब आपस में जुड़कर सांझा कन्ट्रोल रूम चलाने पर सहमत हो गए है। जबकि अपने आप में वह सब धुरन्धर ही है।


जमशेरपुर से यात्र पुरूलिया पहुंची, जहां केबल टी-वी- ऑपरेटर यात्र का स्वागत करने के लिए प्रतीक्षा रत थे। मि-अतुनूराय पुरूलिया को सम्भालते है, जबकि डिजीटल फीड वहां सिटी केबल की आसनसोल से आ रही है। तकरीबन 175 आपरेटर पुरूलिया जिले में कार्यरत है, बहुत गरीबी भी है इस क्षेत्र में मात्र 120-130/- रूपए प्रतिमाह केबल टी-वी- सब्स्क्रप्शन यहां लिया जाता है। पुरूलिया से आगे बढ़कर जब बाकुरा पहुंची यात्र तो वहां कई ऑपरेटर यात्र का स्वागत करने के लिए प्रतीक्षा में थे। उनके अतिआग्रह पर उनके अफिस जाना पड़ा, जहां उन्होंने यात्र के स्वागत का इन्तजाम रखा हुआ था। वहां से शुभकामनाएँ लेकर यात्र सीधे दुर्गापुर पहुंची।

भाई स्वप्नेन्दु मुस्तफी दुर्गापुर में ही नैटवर्क चलाते है। दुर्गापुर ऑपरेटरों के साथ मीटिंग के बाद यात्र सीधे कोलकाता के लिए रवाना हो गई, क्योंकि कोलकाता दूरदर्शन केन्द्र में वहां के एम-एस-ओ- के साथ मीटिंग बुलाई गई थी। यात्र थोड़ी लेट चल रही थी, देर रात तक दूरदर्शन केन्द्र मे वहां के अधिकारियों सहित एम-एस-ओ- का ठहरे रहना अपने आप में आश्चर्यजनक था, लेकिन यही सच था, वहां सब यात्र के पहुंचने की प्रतीक्षा कर रहे थें। कोलकाता एक डैस सिटी के साथ-साथ देश के चार महानगरों में से एक है। डैस के प्रथम चरण में देश के चारों महानगरों दिल्ली, मुम्बई, कोलकाता एंव चैन्नई मे एक नवम्बर 2012 से डैस लागू करने की अधिसूचना जारी की गई थी, जिसके अनुसार दिल्ली व मुम्बई में तो एक नवम्बर 2012 से एनॉलाग प्रसारण बन्द हो गया था, लेकिन कोलकाता में त्योहारो का समय होने के कारण एक नवम्बर को नहीं, लेकिन बाद में हो गया था। जबकि चैन्नई अभी भी विवादास्पद है। कोलकाता एक बड़ी आबादी वाला बड़ा शहर है। यहां अण्डरग्राउण्ड मैट्रो भी चलती है और समुन्द्र पर फेरी भी, यहां खूब सारी पुरानी बसें भी चलती हैं, यहाँ अग्रेजो के समय से चलती आ रही ट्राम भी चलती है।

यहां आज भी आदमी को ढ़ोता है, क्योंकि कभी अग्रेजो के राज में शुरू की गई आदमियों को बैठाकर सवारी करवाने वाली बग्गियां, जिन्हें आदमी ही खीचते है, वह आज भी प्रचलन में है। उन बग्गियों पर बड़ी शान के साथ सवारियां बैठती है और उन सवारियों को खीचते ले जाते मानव बग्गी को देखकर आश्चर्य भी होता है, लेकिन कोलकाता की संस्कृति में बसा हुआ है वहां का ट्रासर्पोटेशन सिस्टम। अपनी-अपनी गाड़ियों मोटर साइकिलों स्कूटर साइकिलों की तो बात ही अलग है, लेकिन कोलकाता में सार्वजनिक ट्रास्पोर्टेशन की बात सारे देश से निराली है। विजय दशमी का पर्व यहां का एक बहुत बड़ा उत्सव होता है। देश नव दुर्गा देवी पूजा के लिए बड़े-बड़े पण्डाल सजते है।

शायद ही ऐसा कोई शख्स होता होगा जो इस पर्व मे शामिल नहीं होता हो, वर्ना तो पूरा बंगाल ही नहीं बल्कि उड़ीसा व झारखण्ड में भी बगांल की पूजा का पूरा नजारा देखने को मिलता है। महाराष्ट्र-गुजरात जिस तरह से नवरात्रें में गरबा में व्यस्त होता है वैसे ही पूरा बगांल दुर्गा पूजा में व्यस्त होता है। इसके लिए काफी पहले से तैयारियां शुरू हो जाती है। पण्डाल कैसा बनाना है और उसके लिए पैसा कैसे जुटाना है, आर्किस्ट्रा कौन सा व कहां से लाना है सारा इन्जताम बड़े स्तर पर किया जाता है। सब मिलकर सारी व्यवस्था करते है, जैसे कि उत्तर भारत में दशहरा के अवसर पर रामलीलाओं का आयोजन किया जाता है। ऐसे छुट्टी भरे त्यौहार के वातावरण में चेतना यात्र वहां पहुंची उसके लिए समय निकालना किसी के लिए भी सरल नहीं, लेकिन सभी ने पूरा समय दिया।


दूरदर्शन केन्द्र में सिटी मन्थन आदि के प्रतिनिधि मीटिंग में शामिल रहे, जबकि कोलकाता में सिटी मन्थन के अतिरिक्त जी-टी-पी-एल- के सी-बी-एल, डी-जी- केबल डैन, मेघबाला, बसारा, हैथवे, सुष्टी सहित एक-दो और एम-एस-ओ- भी काम कर रहे है। कोलकाता डैस सिटी होने के साथ-साथ डैस एरिया की सीमाओं के विवाद के कारण भी कुछ की समस्याएँ है, लेकिन या=ाा को कोलकाता पहुंचने में देर काफी हो चुकी थी और सभी को त्यौहार की तैयारी में पहुंचने की भी जल्दी थी अतः विस्तार से बाते नहीं हो सकी। हांलाकि इस तरह की एक पहल हुई उसके प्रति दूरदर्शन अधिकारी काफी कृतज्ञ दिखाई दिए। दूरदर्शन मीटिंग से यात्र सीधे एक बर्थडे पार्टी में पहुंची जहां सिटी केबल के सुरेश सेतिया यात्र का स्वागत करने के लिए प्रतीक्षा में थे। वहीं पर मुद्दतो बाद देबाशीष डे से भी भेंट हुई। सिटी के अनुराग भाई के बटे की जन्मदिन पार्टी में आर्शीवाद दे कर कोलकाता में भाई सुरेश सेतिया की मेजबानी में विश्राम किया। अगली सुबह कोलकाता से रवाना होने से पूर्व वहां के एल-सी-ओ- के संगठन पश्चिम बंगाल केबल ऑपरेटर सग्रांम सोसायटी के आफिस में रतन जैयसवाल एंव अन्य ऑपरेटरों से भेंट कर यात्र अगले पड़ाव की ओर बढ़ चली। कोलकाता से यात्र

सीधे भुवनेश्वर पहुंची। भुवनेश्वर में ओरटैल नैटवर्क की प्रमुख श्रीमति जग्गी पाण्डा के साथ इण्डष्ट्री की भावी सम्भावनाओं एंव माननीय प्रधानमन्त्री जी के ड्रीम प्रोजेक्ट डिजीटल इण्डिया पर विचार विमर्श के साथ-साथ माननीय मन्त्री सूचना व प्रसारण श्री प्रकाश जावडेकर जी का सन्देश भी सुनाया गया। ओर टैल मीटिंग के बाद दूरदर्शन केन्द्र भुवनेश्वर में मीटिंग हुई, जहां ओरटैल प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। भुवनेश्वर से प्रसारित डी-डी- उड़िया चैनल पर एक कार्यक्रम दर्शक फोरम का भी प्रसारण किया जाता है जिसमें केबल टी-वी- ऑपरेटरों को भी दर्शक के सवालों के जवाब देने के लिए निमन्त्रित किया जाता है। इसी तरह से एक कार्यक्रम बीवर्स लैटर भी प्रसारित किया जाता है।

जिसमें केबल टी-वी- ऑपरेटरों को भी शामिल किया जाता है। भुबनेश्वर में ही उदय भान (पूर्व हिन्दी सह सम्पादक) से भी भेंट हुई क्योंकि अब वह सरकारी सेवा में भुवनेश्वर में ही रहते है। भुवनेश्वर मीटिंग के बाद यात्र सम्बलपुर के लिए रवाना हो गई, लेकिन इसी मार्ग पर राधा रवोल दूरदर्शन केन्द्र में भी वहां के केबल टी-वी- ऑपरेटरों को बुलाया हुआ था अतः उनके साथ भी केबल एक्ट के अनुसार दूरदर्शन चैनलों का प्रसारण एंव कोई भी ऐसा चैनल जिसको भारत सरकार से डाऊनलिंक परमीशन ना मिली हो नहीं चलाया जाना चाहिए के बारे में विस्तार से जानकारी दे कर यात्र सीधे सम्बलपुर पहुंची। सम्बलपुर दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग बुलाई गई थी, वहां सभी यात्र की प्रतीक्षा कर रहे थे। सम्बलपुर में औरटैल के साथ सलंग्न होकर केबल टी-वी- चल रहा है। यहां की शिकायतें भी दूसरे एनॉलाग कन्ट्रोल रूम जैसी ही है।

दूरदर्शन चैनलों को एनॉलाग प्रसारण करने वाले नैटर्वक पर शिकायतें अधिकांश शहरों में देखने को मिली, क्योंकि एनॉलाग में चैनलों को प्रसारित करने के लिए लिमिटेशन होती है जबकि डिजीटाईजेशन में वह सारी कमिया स्वंय ही दूर हो जाती है। सम्बलपुर से पूर्व राधाखोल के बाद बौद में भी दूरदर्शन केन्द्र में एक मीटिंग हुई थी, जहां अभी एनॉलाग कन्ट्रोल रूम ही लगा हुआ है। सम्बलपुर से आज एक विशेष दिन की शुरूआत है अपने देश के लिए जबकि मेरे लिए आज दो-दो खुशियों का दिन है। आज 24 सितम्बर है जो बेटे अनुराग का जन्मदिन होता है, लेकिन देश के लिए आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण हो गया है क्योकि आज हमने मंगल मिशन पर सफलता प्राप्त कर ली है।

मंगल ग्रह पर मंगलयान भेजने की शुरूआत तो काफी दिन पहले की जा चुकी थी, लेकिन लाखों मील दूरी तय कर आज उस यान को निर्विघ्न पूर्ण सफलता के साथ मंगल ग्रह में प्रवेश करवाया गया। यह हमारे देश के लिए विज्ञान की दुनिया में बहुत बड़ी एतिहासिक उपलब्धि है, जिसके लिए स्वंय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी वैज्ञानिकों के साथ मौजूद रहे। सारी दुनिया ने हमारी इस सफलता को नतमस्तक होकर स्वीकारा। आज के इस शुभदिन पर पूरा देश गर्व से खुशियां मना रहा है। माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने इस सफलता पर अपने बधाई भाषण मे देशवासियों को यह सन्देश भी दिया है कि जिस तरह आप क्रिकेट मैच के जीत पर खुशियां मनाते हो उससे भी कहीं बहुत बड़ी उपलब्धि है यह जो हमारे वैज्ञानिकों ने हमे दी है, अतः देशवासियों को पूरे हर्षोल्लास के साथ देशभर में इस सफलता के लिए खुशियां मनानी चाहिए। नवरात्रें की भी आज शुरूआत हुई है, पहला नवरात्र है आज और पुत्र अनुराग का जन्मदिन भी, मेरे लिए तो कई गुना अधिक खुशी मनाने का दिन है आज।


सम्बलपुर से आगे का मार्ग उड़ीसा, छत्तीसगढ़ का बार्डर क्षेत्र हो जाता है। इस क्षेत्र में भी अक्सर नक्सलवादी घटनाएँ होती रहती है। बिलासपुर दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग के बाद यात्र सीधे छत्तीसगढ़ में रायपुर पहुंची जहां छत्तीसगढ़ के प्रमुख आपरेटर श्री अशोक अग्रवाल द्वारा स्वागत किया गया। अग्रवाल जी का नैटवर्क रायपुर के साथ-साथ कोरबा, जगदलपुर, बिलासपुर, दुर्ग मिलाई, मनेन्द्रगढ़, मन्जेजी, तिल्ला, बलोदाबजार, झाटापाड़ा, सूरजपुर एंव राजनन्द गांव में भी है। छत्तीसगढ़ के बड़े ऑपरेटर के साथ-साथ कई चैनलों की डिष्ट्रीब्यूशन भी वह सम्भालते है। मीडिया के क्षेत्र में उनकी भूमिका वहां खासा वजन रखती है। इसके अलावा कई अन्य व्यवसाय में भी वह संलग्न है।


रीरायपुर में मीटिंग के बाद यात्र बिलासपुर पहुंची। बिलासपुर के प्रैस क्लब में सभी ऑपरेटरों एंव पत्रकारों के साथ यात्र पर चर्चा हुई, वहीं बिलासपुर दूरदर्शन केन्द्र के अधिकारियों के साथ भी मीटिंग की, लेकिन यहां तक पहुंचते-पहुंचते गाड़ी का वही पहिया जो कि मनाली से पहले बिगड़ा था, जिसे बाद में इलाहाबाद में भी ठीक करवाना पड़ा था, वही पहिया यहां भी अपनी वही प्रोब्लम के साथ अड़ गया है।


एक टायर में पंचर भी हो गया है, अतः पहले पंचर लगवा कर फिर उस बिगड़ैल पहिए के इलाज के लिए योग्य मिस्त्री को तलाशा। भाई अशोक अग्रवाल जी के सहयोग से एक सही मिस्त्री मिला और इस पहिए का सही इलाज किया गया, ब्रेकशू भी बदले गए एंव मिस्त्री ने हमे यह आवश्वासन भी दिया कि अब इस पहिए में आपकी यात्र में प्रोब्लम नही आएगी। गाड़ी ठीक करवाने के बाद आगे का सफर रात में करने वाला नहीं है, अतः बिलासपुर में ही रात्रि विश्राम किया। यहां सिटी केबल के प्रमुख ऑपरेटर बबलू भाटिया से भी भेंट की एंव अन्य ऑपरेटरों के साथ भी भावी सम्भावनाओं पर चर्चा हुई। यहीं पर कमल दुबे भी दूरदर्शन की रिपोर्टिग देखते है एंव कई अन्य चैनलों के भी वही स्टिंगर है। यहां पर उनसे भी लम्बी चर्चा हुई। दशहरा के अवसर पर यहां भी बड़े-बड़े भव्य पण्डाल झंकिया सजती है, खूब भीड़ सब जगह उमड़ी हुई है।

कोरबा से आए केबल टी-वी- ऑपरेटर गुरमीत सिंह सिंधू से भी भेंट हुई। उन्होंने सिटी केबल के तरूण बंसल एंव डीजी केबल के नितिन गुम्बर सहित सुबोध कटिहार (बिलासपुर ऑपरेटर एसों प्रेजीडेंट) से भी बिलासपुर में भेंट हुई। सभी के साथ मोदी जी ड्रीम प्रोजेक्ट ‘डिजीटल इण्डिया’ पर विस्तार से चर्चा हुई। यहां से आगे का रास्ता थोड़ा और कठिन हो जाता है, क्योंकि आगे छत्तीसगढ़ से मध्य प्रदेश बार्डर आदिवासियों का क्षेत्र है। वहां की सड़के और बाकी स्थितियां कैसी होगी यह वही से गुजरने पर ही जान पड़ेगा, अतः आगे का वृतान्त जानने के लिए अगामी अंक की प्रतीक्षा कीजिए, फिलहाल यात्र बिलासपुर में ही है।

Add a Comment

Your email address will not be published.