चेतना यात्रा (भाग-6)मैसूर से जबलपुर

चेतना यात्र 10 देश के बिल्कुल नीचे अथार्त मां भारती के चरणो मे शीश नवा कर वापिसी के रास्ते पर आ चुकी है। यानिकि कन्याकुमारी से केरल होते हुए कर्नाटक पंहुच गई है। केरल में त्रिवेन्द्रम-कोच्ची, त्रिशूर-कोजीकोड से लेकर सुल्तानबतेरी वृतान्त तक आपको पूर्व स्मृतियोें में छोडा था, वंहा से आगे का मार्ग पूरी तरह से जंगल का है। बहुत बड़ा विशाल फारेस्ट वायनाड बान्दीपुर एंव अन्नामलाई रिजर्व फारेस्ट यानिकि केरल का वायनाड, कर्नाटक का प्रसिद्ध बान्दीपुर एंव तमिलनाडू का अन्नामलाई रिजर्व फारेस्ट इसी मार्ग पर है। यही से ऊटी के लिए भी मार्ग जाता है और ऊटी मैंसूर मार्ग भी बहुत खूबसूरत है यह मार्ग जहां प्राकृतिक की विशेष कृपा हैं एंव इस मार्ग पर कही भी आपको जंगली जानवरो हाथी-हिरन भालू-जंगली भैंसे से लेकर टायगर भी मिल सकता हैै।

इस मार्ग से गुजरते हुए यात्र केरल से कर्नाटक में एंट्री कर टीपू सुल्तान के नगर मैंसूर पहुंची। मैंसूर की अपनी खूबसूरती है जोकि आज भी अपनी प्राचीन एतिहासिक पहचान को उसी तरह से बनाए हुए हैै। यंहा का दशहरा विश्व प्रसिद्ध हैं जिसे देखने दुनियाभर से लोग हर साल मैसूर आते है। मैसूर सिल्क का नाम पूरी दुनिया में बड़े अदब के साथ लिया जाता है। अभी कल ही दस दिन से चल रहा दशहरा उत्सव कार्यक्रम सम्पन्न हुआ है, अतः आज केरल-मैसूर से लोग वापिसी कर रहे है, क्योकि कई छुट्टि के बाद कल से सबको अपने- अपने काम पर लग जाना होगा। आज ईद भी निबट जाएगी अतः कल से फिर सबको पूर्वत अपने काम पर लग जाना होगा। मैसूर में ऑपरेटरो के साथ भेट़ कर यात्र के बारे में भाई रंगानाथन के न्यूज चैनल के लिए बाइट दे कर यात्र बंगलोर के लिए बढ़ चली।


मैसूर-बंगलोर का रास्ता यूं तो मात्र एक से डेढ़ घण्टे का ही होता है लेकिन आज ढ़ाई बजे दोपहर को मैसूर से चले तो रात को नौ बजे के बाद बंगलौर पहुंच सकी यात्र बंगलौर पहुंचने वालो की आज बहुत ज्यादा भीड थी क्योकि छुटि् बिताकर आज वापिस जा रहे थे। बंगलौर मेें रखी गई मीटिंग रद्द कर देनी पड़ी लेकिन आज वहा एक विशेष कार्यक्रम में भी हमने पहुचने का वायदा किया हुआ था,अतः इतनी भीड़ को पार करते हुए हम वहा पहुंचने का प्रयास करते रहे जबकि लगातार बारिस भी बीच-बीच में होती रही डा- महेश जोशी के सुपुत्र के वैवाहिक रिशेप्शन कार्यक्रम में आज हमने पहुंचने का उनके साथ प्रोमिस किया था,अतः सारी बाधाओ को पार कर हमने वहां पहुच कर उन्हे बधाई दी, लेकिन शीघ्र ही वहां से विदा लेेकर रात्रि विश्राम के लिए भाई मंजू टी आर के साथ बंगलौर द क्लब में आश्रय लिया जबकि बारिश ने रुकने का नाम नही लिया।

बंगलौर से अगले दिन जल्दी ही अगले पडाव की ओर चली यात्र क्योकि यहा रुकने का मतलब आगे तक का कार्यक्रम बिगड जाना था। जबकि दिल्ली से महीनाभर पूर्व यात्र आरम्भ होने के बाद अभी तक अपने पूर्व निर्धारित कार्य क्रमानुसार ही चल रही है। बंगलौर से सीधे टुमकुर होते हुए यात्र तिप्तूर पहुंची जहां सतीश अन्य ऑपरेटरों के साथ यात्र के स्वागत के लिए प्रतीक्षा कर रहे थे।


ऑपरेटरों के साथ मीटिंग के बाद यात्र चिकमगलूर के मार्ग पर आगे बढ़ रही थी, लेकिन जबर्दस्त बारिश थी जैसे तूफान ही आया हुआ हो, सड़को पर पेड़ गिरे पड़े थे ऊपर से हैवी रेन आगे बढ़ने का रास्ता ही रोके दे रही थी। तकरीबन सारे वाहन सड़कों पर खड़े हो गए थे। ऐसे तूफान में कोई आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था, लेकिन रूकने से तो काम नहीं चलेगा, यात्र को तो आगे बढ़ना ही होगा। अतः थोड़ी गति धीरे कर यात्र निरन्तर आगे बढ़ते हुए शिव मोगा पहुंच गई। शिव मोगा दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग रखी हुई थी जहां आस-पास क्षेत्रें से भी काफी ऑपरेटर पहुंचे हुए थे। दूरदर्शन केन्द्र शिव मोगा में एनॉलाग प्रसारण के कारण कुछ समस्याएँ सामने आई, लेकिन शीघ्र ही उन समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा ऐसा आश्वासन सभी ऑपरेटरों से लेकर दूरदर्शन केन्द्र के कर्मचारियों से यात्र ने विदाई ली, जबकि रात इतनी हो चुकी थी कि अब यहां से आगे बढ़ने का कोई लाजिक नहीं था।

नवीन गूजर एंव नागेन्द्र भाई पहले से ही हमारे लिए किसी होटल में ठहरने की व्यवस्था कर चुके थे अतः शिव मोगा से अब कल ही यात्र अगले पड़ाव के लिए रवाना होगी। सुबह नवीन गूजर एंव नागेन्द्र आदि आपरेटरों से विदाई लेकर यात्र दावणगीरी के लिए रवाना हो गई जहां भाई जकीउल्लाह आदि पूरी एसोसिएशन के साथ यात्र के स्वागत की प्रतीक्षा में है। शिवमोगा तक पहुंचते-पहुंचते किस तरह से तूफानी बारिश ने यात्र का स्वागत किया था उसका वर्णन तो हम कर चुके है, लेकिन यह मार्ग भी कुछ ऐसा है कि जिसका जिक्र जरूरी है। सड़क के दोनो ओर इमली के पेड़ खड़े हुए है जिन पर इमली लदी हुई है, जबकि इस क्षेत्र में किसानों को कुछ नया करते देख जानने की उत्सुकता हुई कि आखिर वह कर क्या रहे है। उनके पास जाकर देखा तो वहां सुपारी निकाली जा रही थी। इस क्षेत्र में सुपारी की खेती होती है।

खेती से हमारा मतलब है कि सुपारी यहां पर कुटीर उद्योग की तरह होती है। दूरतलक सुपारी के पेड़ नारियल के पेड़ों की ही तरह से खड़े है। सुपारी के पेड़ से सुपारी फलों को तोड़कर उन्हें काटकर उनमें से सुपारी निकालना, सुखाना, रंगना आदि का काम यहां जगह-जगह देखने को मिलता है। थोड़ी सी स्मृतिया सुपारी वाली कैमरे में कैद कर वहां खड़े इमली के पेड़ो पर से थोड़ी इमली भी तोड़ी और फिर सीधे दावणगीरी पहुंची यात्र। लेकिन दावणगीरी शहर में धुसते हुए एक नए तरह के फल वहां बीच पटरियों पर खड़े पेड़ों पर लटके दिखाई दिए। रूक कर उन पेड़ों से फलों को जानने की कोशिश की लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी। आश्चर्य की बात तो यह है कि सामान्य तौर पर पाए जाने वाले बड़े-बड़े खीरों से भी बड़े-बड़े यह फल उन पेड़ों पर लम्बी लताओं से लटके हुए है। एक-एक लता से कई-कई फल लटके हैं, जिनका वजन एक का कम से कम ढ़ाई तीन किलो से कम नहीं होगा, यानिकी एक-एक लता पर दस पन्द्रह किलों से भी बहुत ज्यादा वजन लटका हुआ एवं पेड़ पर ऐसी सैकड़ों लताएँ लटक रही हो, वह भी बहुत मजबूती के साथ, क्योंकि उन फलों को हाथ में लेकर जब तोडने का प्रयास किया गया, तब वह टूटे नहीं बल्कि लता को काटा गया। कुदरत के करिश्में भी अजीब होते है। हमने उस पेड़ व फल के फोटो फेसबुक पर भी डाले, लेकिन उनके बारे में जानकारी नहीं मिल सकी।


हमारे सहयोगी इमरान ने इसका नाम बालम खीरा बताया है, इसी जिज्ञासा के साथ यात्र दावणगीरी पहुंच गई। दावणगीरी केबल टी-वी- ऑपरेटर्स एसोसिएशन के जकी उल्लाह भाई यात्र के स्वागत के लिए अन्य ऑ परेटरों के साथ अपने नए शुरू किए गए कन्ट्रोल रूम में प्रतीक्षा कर रहे थे। उन्होंने नया डिजीटल क्न्ट्रोल रूम लगाया है। उनके साथ मीटिंग के बाद वहां से यात्र आगे हुब्बली के लिए बढ़ चली जहां पर भाई शब्बीर आदि यात्र के स्वागत की प्रतीक्षा में है। बारिश लगातार हो रही है, सुना है कि कोई तूफान आने की सम्भावनाएँ है। भारी बारिश में हुब्बली पहुंच कर शब्बीर भाई को फोन किया तब वह हाईवे पर ही लेने आ गए, उन्होंने भी यात्र के स्वागत-सम्मान का कार्यक्रम रखा हुआ था, वहां पहुंच कर भावी सम्भावनाओं पर आपरेटरों के साथ मीटिंग कर शीघ्र ही यात्र कर्नाटक से महाराष्ट्र की ओर बढ़ चली। फिर से यात्र एक्सप्रैस हाईवे पर कोल्हापुर की ओर बढ़ रही थी। अच्छा एक्सप्रैस हाईवे है यह घारवाड होते हुए रात में कोल्हापुर पहुंच ही गई यात्र।

कोल्हापुर मेें रात्रि विश्राम के लिए समय रहते व्यवस्था बना दी गई थी, इसलिए देर रात में पहुंचने पर भी परेशानी नहीं हुई। हमारे लिए इस यात्र में महाराष्ट्र का यह पहला शहर था। महाराष्ट्र में जयललिता की गिरफ्रतारी का कोई फर्क नहीं पड़ा, लेकिन पीछे दावणगीरी में हमे जानकारी मिली कि तमिलनाडू मे कर्नाटक के वाहनों में तोड़फोड़ की जा रही है, क्योंकि जयललिता की जमानत पर आज सुनवाई थी एंव कोर्ट ने उनको जमानत नहीं दी है, ऐसी खबरों का प्रसारण हो जाने के बाद वहां हो रही हिंसा की भी खबरें टी-वी- पर आ रही है। जबकि दावणगीरी से पूर्व शिवमोगा में जयललिता समर्थकों का खुशियां मनाते दिखला रहे थे टी-वी-, क्योंकि उन्हें गलतफहमी हो गई थी कि अम्मा को जमानत दे दी गई है।


कोल्हापुर में जी-टी-पी-एल- का भी नैटवर्क चलता है, उनसे सुबह मीटिंग कर एक राऊण्ड इस एतिहासिक शहर का लेकर शीघ्र ही यहां से आगे के लिए बढ़ चली यात्र क्योंकि सफर आज का भी बहुत लम्बा है, आज पूने में थोड़ा रूकने के बाद सीधे मुम्बई पहुंचनी है यात्र, जबकि कल भी शिवमोगा से आरम्भ हुई थी यात्र और लम्बी दूरी तय कर हैवी रेन के बावजूद भी कोल्हापुर पहुंची। इस बीच सभी मीटिंग भी ली गई। दूरदर्शन केन्द्र पूने द्वारा चेतना यात्र पर एक कार्यक्रम बनाया जाता है, अतः उन्होने यात्र की शूटिंग का कार्यक्रम पूने में रखा है। पूने मुम्बई हाईवे पर चढ़ने से पूर्व पूने में दूरदर्शन केन्द्र के कैमरा मैन को चेतना यात्र के बारे में बताते हुए फुटेज देकर यात्र पूने से मुम्बई के लिए रवाना हो गई। मुम्बई में दिल्ली से अनुराग पहुंचा हुआ है। यात्र भी टाइमली ही मुम्बई पहुंच गई। जुहू बीच पर ही एक साफ सुथरे होटल दे बीच गार्डन में मुम्बई विश्राम का प्रबन्ध अनुराग ने किया हुआ है। मुम्बई में इण्डष्ट्री पर प्रत्येक वर्ष होने वाली प्रदर्शनी का भी आयोजन इस बीच ही है। अतः अगला पूरा दिन सुबह से शाम तक वहीं कपडे में एक्ज़ीबीशन स्थान पर सभी से भेंट और चर्चा होती रही। अगले दिन सुबह पहली मीटिंग टाटा स्काई प्रमुख श्री हरित नागपाल जी के आफिस में लंच पर हुई, वहीं पर दूरदर्शन केन्द्र मुम्बई के अधिकारी भी बुला लिए गए थे। दूरदर्शन चैनलों को डीटीएच पर पूरी तरह से कानून के अनुसार नहीं चलाया जा रहा है, ऐसी शिकायत दूरदर्शन अधिकारियों की ओर से लगातार की जा रही थी अतः डीटीएच के क्षेत्र मे सबसे ज्यादा प्रचलित टाटा स्काई के श्री हरित नागपाल के साथ हुई बैठक विशेष महत्व रखती थी। श्री नागपाल जी ने लंच की भी व्यवस्था मीटिंग के साथ-साथ की हुई थी। बहुत ही सकारात्मक रही यह डीटीएच व दूरदर्शन मीटिंग।


टाटा स्काई के आफिस में हुई मीटिंग से दूरदर्शन केन्द्र मुम्बई के अधिकारी पूर्णतया सन्तुष्ट थे, इसके बाद एक मीटिंग मुम्बई के प्रमुख एम-एस-ओ- के साथ दूरदर्शन केन्द्र में रखी गई थी। मुम्बई के सभी एम-एस-ओ- तो नहीं लेकिन वहां के प्रमुख एम-एस-ओ- इन केबल व हैथवे के प्रतिनिधी मीटिंग में उपस्थित रहे। इस मीटिंग मे टैक्नॉलाजी पर भी कुछ विशेष चर्चा हुई जबकि मुम्बई तो पूरी तरह से डैस सिटी है अतः दूरदर्शन के चैनलों को प्रसारित करने में मुम्बई के ऑ परेटरों को कोई परेशानी नहीं है। परेशानी है तो पांच सितारा होटलों में चल रहे निजी नैटवर्क के कारण है। इनमें होटलों मे अपने एनॉलाग कन्ट्रोल रूम चल रहे है, जहां दूरदर्शन के सभी चैनल देखने को नहीं मिलते है। बारहाल दूरदर्शन केन्द्र मुम्बई की मीटिंग के बाद मुम्बई अन्धेरी के द क्लब पहुंच कर बी-सी-एस- रत्ना अवाडर््स के लिए उसको देखा।

क्योंकि हर वर्ष इण्डष्ट्री पर किए जाने वाला बी-सी-एस- रत्ना अवार्ड्स इस बार दिल्ली से बाहर यदि मुम्बई किया जाए तब उसके लिए कोई बेहतर वैन्यु की तलाश तो अभी से ही शुरू करनी होगी। यात्र मुम्बई से आगे निकलने से पूर्व नागेश छाबड़िया के ऑफिस पहुंची जहां इण्डष्ट्री की भावी सम्भावनाओं पर लम्बी डिस्कशन के चलते काफी देर हो गई। नागेश भाई हिन्दुजा ग्रुप परिवार के दामाद होने के साथ-साथ केबल टी-वी- में एक बड़ा नाम भी है। पूर्व में इन केबल को वही सम्भालते थे, लेकिन इन केबल छोड़ने के बाद उन्होंने अपनी शुरू की है। महाराष्ट्र में उनके निजी कनैक्शन काफी हैं व कई शहरों में उनके नैटवर्क है। नागेश के साथ मीटिंग के बाद यात्र मुम्बई से अगले पड़ाव की ओर रवाना हुई। हालांकि मुम्बई में ही रात हो चुकी थी, लेकिन रात की सोचकर आगे नहीं बढ़ेगे तो पूर्वनिर्धारित कार्यक्रमानुसार नहीं पहुंचा जा सकेगा। नागेश के साथ मीटिंग से पूर्व अमन की रवानगी दिल्ली के लिए हुई, क्योकि अभी पिछले दिनों ही उसकी शादी हुई थी, यात्र पर तो वह हर साल होता ही है, लेकिन करवा चौथ उसकी पहली थी, अतः अनुराग ने अमन के स्थान पर यात्र की जिम्मेदारी को सम्भाला और अमन को दो दिनों के लिए दिल्ली भेजा गया, वह अहमदाबाद आकर यात्र को ज्वाइन करेगा एवं अनुराग अहमदाबाद से फ्रलाइट लेकर दिल्ली चला जाएगा। इस प्रकार पारिवारिक परम्पराएँ भी यात्र के साथ बनी रह जाएंगी।

मुम्बई से निकलते-निकलते यात्र को देर हो गई थी अतः वहां से नाशिक पहुंचने में भी काफी रात हो गई। नासिक में अनुराग की सुसराल में सब प्रतीक्षा कर रहे थे। रात्रि विश्राम के बाद शीघ्र ही यात्र नासिक में सबसे विदा लेकर आगे के लिए बढ़ चली। नासिक से सापूतारा होते हुए यात्र सूरत पहुंची। सापूतारा यहां के लिए एक अच्छा हिल स्टेशन है। यहां का मार्ग अपना विशेष आकर्षण रखता है। दोनो ओर प्याज, टमाटर एंव अंगूर की फसल दिखाई देती है, लेकिन सड़क का हाल बढ़िया नहीं है। महाराष्ट्र में चुनाव का प्रचार अभी भी चल रहा है, अतः चुनावी सभाएँ, बैनर, होर्डिग, पोस्टर आदि की रंगत भी अपना ध्यान खींचती है। सापूतारा की अपनी खूबसूरती है और यह बिल्कुल महाराष्ट्र व गुजरात के बार्डर पर स्थित है। लेकिन गुजरात हिस्सा है। पूरा मार्ग हरियाली से हरा-भरा है एवं गुजरात में इसी मार्ग पर वहां के पिछडे़ व आदिवासी भी बसते है। यहां से होते हुए सूरत पहुंचने का गुजरात को लेकर एक अलग अनुभव होता है।

इसी मार्ग पर रास्ते में एक जगह रूक कर साथ लेकर आए लंच को भी किया, उसके बाद सीधे सूरत पहुंची यात्र सूरत दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग रखी गई थी अतः सीधे मीटिंग में पहुंची सूरत के प्रमुख आपरेटरों व दूरदर्शन अधिकारियों के साथ मीटिंग के बाद यात्र सीधे बड़ोदरा पहुंची। बड़ोदरा पहुंचते-पहुंचते काफी देर हो चुकी थी अतः वहीं रात्रि विश्राम कर सुबह दूरदर्शन केन्द्र वड़ोदरा में मीटिंग कर जी-टी-पी-एल- के ऑफिस पहुंचकर यात्र के सन्दर्भ में ‘गो ग्रीन गो डिजीटल’ पर एक इन्टर्व्यू रिकार्ड करवाया। जी-टी-पी-एल- प्रमुख श्री कनक सिंह राणा के साथ भेंट वार्ता कर यात्र वडोदरा से अहमदाबाद के लिए रवाना हो गई। अहमदाबाद एयर पोर्ट से अमन को रिसीव किया, बाद में दूरदर्शन केन्द्र अहमदाबाद में मीटिंग लेकर वहां के अन्य आपरेटरों के साथ स्वागत-सत्कार मीटिंग के बाद अनुराग को एयरपोर्ट पहुंचा कर यात्र अहमदाबाद से आगे के लिए बढ़ चली। अहमदाबाद से निकलते हुए काफी देर हो चुकी थी, लेकिन फिर भी आज रात राजकोट पहुंच गई यात्र।

राजकोट में रात्रि विश्राम के बाद सुबह दूरदर्शन केन्द्र राजकोट में मीटिंग लेकर यात्र जी-टी-पी-एल के राजकोट आफिस में स्वागत-सत्कार एंव सबसे भेंट वार्ता कर सीधे जूनागढ़ होते हुए सासनगीर की ओर बढ़ चली। जूनागढ़ के प्रवेश द्वार में एण्ट्री करने से ही यह पता लग जाता है कि आप किसी ऐतिहासिक शहर में जा रहे है। यहां हिन्दु, जैन, मुस्लिम एवं बौद्ध सभी के धार्मिक स्थल बने हुए है। सासण गीर पहुंचने के लिए इस मार्ग में जूनागढ़ गीर के पास वाला एक बड़ा शहर है। गीर वन के शेर तो पूरी दुनिया के लिए आकषर्ण का केन्द्र है। एशिया में शेर सिर्फ यहीं पाए जाते है। प्राकृतिक दृष्टिकोण से यह क्षेत्र अपनी विशेष पहचान रखता है। यहां इन दिनों भारी बारिश होकर चुकी है।

आमों में केसर यहीं होता है, कपास, सोयाबीन, चावल की भरपूर्ण खेती होती है। यहां शेरों के साथ-साथ एक अफ्रीकन प्रजाति के लोग भी गीर की धरोहर बन गए है, जिन्हें अंग्रजो के राज में यहां लाया गया था। सासनगीर एक रिजर्व नेशनल पार्क है, लेकिन यहां के शेर गावों में धुसकर मवेशियों को मार लेते है। इन्हें अपने खाने के लिए बहुत ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है। गाँव वालों को मारे गए मवेशी का मुआवजा मिल जाता है, अतः उनका व्यवहार शेरों के प्रति शत्रुता पूर्ण नहीं होता है। सासणगीर के गाँवों में रहने वालों के साथ जंगलात कर्मचारियों का तालमेल बहुत बढ़िया होता है, बल्कि वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा ग्रामीण वासियों को उनके जीवन में जानवरों के महत्व को लेकर भी जानकारियां दी जाती है।

ऐसा सुनने को भी नहीं मिलता है कि यहां के शेरो ंको ग्रामीण वासियाेंं से कोई खतरा हो या फिर कोई शेर आदम खोर हुआ हो। गीर प्रवास के दौरान दीव से भी ऑपरेटर अरूण धर्मेश एंव वहां के अन्य ऑपरेटर भी यात्र के स्वागत के लिए सासण पहुंचे। गीर से यात्र सीधे मेहसाना के लिए रवाना हुई, क्योंकि वहां दूरदर्शन केन्द्र के कर्मचारियों की समस्याओं को सुनकर व समझ कर समाधान का प्रयास करना है। सासणगीर से मेहसाना का सफर काफी लम्बा है, लेकिन देर रात यात्र ठीक-ठाक मेहसाना पहुंच ही गई। मेहसाना-अहमदाबाद हाईवे पर स्थित एक रिसोर्ट में रात्रि विश्राम का प्रबन्ध मेहसाना के ऑपरेटर आशीष द्वारा किया गया था जबकि वह स्वंय मेंहसाना से कहीं बाहर गए हुए थे। वहां की दूरदर्शन अधिकारी श्रीमति आशा के अनुरोध पर विशेष तौर पर गीर से मेहसाना पहुंचना पड़ा, क्योंकि इस बार की जा रही चेतना यात्र को प्रसार भारती की ओर से यह जिम्मेदारी भी सुपुर्द की गई है कि दूरदर्शन चैनलों को लेकर केबल टी-वी- एक्ट का पालन करने के लिए भी ऑपरेटरों एंव दूरदर्शन कर्मचारियों के बीच ‘सम्वाद’ स्थापित करने का प्रयत्न करें। इसीलिए देशभर में यात्र के रूट में जो भी दूरदर्शन केन्द्र आते है, वहां पधारने के लिए आग्रह आता है।


मेहसाना में जी-टी-पी-एल- के ऑफिस में ऑपरेटरों एंव दूरदर्शन कर्मचारियों की मीटिंग रखी गई, जहां श्रीमति आशा की दूरदर्शन चैनलों पर परेशानी को समझते हुए समाधान हेतु जी-टी-पी-एल- कार्यालय अहमदाबाद भी बात की गई। सुधार के लिए उनका आश्वासन मिल जाने के बाद मेहसाना से यात्र राजस्थान के लिए रवाना हो गई। हाइवे बहुत बढ़िया बना हुआ है अतः उदयपुर पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगा। अजय पोरवाला द्वारा अन्य ऑपरेटरों सहित यात्र का गर्मजोशी से स्वागत-सत्कार किया गया। उदयपुर ऑपरेटरों के साथ इण्डष्ट्री की भावी सम्भावनाओं पर मीटिंग के बाद यात्र सीधे कोटा पहुंची, लेकिन कोटा के कपिल भाई ने यात्र के रणथम्बौर विजि के लिए सवाई माधोपुर मे पूरा प्रबन्ध किया हुआ था। सवाईमाधोपुर अपने आप में एक ऐतिहासिक शहर है। यहां विश्व भर से वन्य प्राणी प्रेमी आते है। रणथम्बोर टाईगर रिजर्व पार्क विश्व विख्यात है। यहां के टाईगर बहुत शान्त स्वभाव के और जरा हैल्दी होते है। अगले दिन राथम्बौर का भी दो बार विजिट किया एंव टाईगर देखने काभी अवसर मिला। हमारा प्रयास है कि रणथम्बोर के शेरो पर एक डाक्यूमेंटरी बनाई जाए।


रणथम्बोर के बाद सवाईमा धोपुर में ही शाम हो गई है, जबकि यात्र अब आगे राजस्थान से मध्य प्रदेश जाएगी। मध्य प्रदेश के शिवपुरी होकर गुना के रास्ते भोपाल होते हुए जबलपुर पहुंचनी है, क्योंकि जबलपुर में ईमान इण्डिया सम्मान कार्यक्रम का कल आयोजन होना है। केबल टी-वी- समुदाय का भारतीय समाज में सम्मान भी हो इसीलिए यह कार्यक्रम ईमान इण्डिया सम्मान दिल्ली से शुरू किया गया है। कोशिश की जा रही है कि देश के भिन्न शहरों में भी केबल टी-वी- आपरेटर ऐसा कार्यक्रम आयोजित करें, जिससे कि देशभर में केबल टी-वी- कम्युनिटी का समाज में सम्मान भी हो जबलपुर में पप्पू चौक्से द्वारा कार्यक्रम की शुरूआत की गई है। अतः उनके द्वारा इस वर्ष दूसरी बार यह प्रयास किया जा रहा है।

उनके द्वारा आयोजित किए जाने वाले ईमान इण्डिया सम्मान जबलपुर के आयोजन में चीफ गैस्ट के रूप में हमें वहां पहुंचना है। अतः सवाई माधोपुर से आज शिवपुरी पहुंचने के लिए सबने नेगेटिव रिपोर्ट दी है। स्वंय शिवपुरी के केबल टी-वी- ऑपरेटरों ने भी यही सलाह दी है कि दिन छिपने के बाद यह रूट सुरक्षा की दृष्टि से ठीक नहीं रहेगा। इसलिए शिवपुरी ना जाकर पुनः वापिस कोटा जाना तय किया गया। रात्रि विश्राम कोटा में कर वहां से सुबह बारन होते हुए गुना के रास्ते सीधे सागर होकर जबलपुर पहुंची यात्र। वाकई यह मार्ग सबसे ज्यादा खराब वाला मार्ग कहा जाएगा। ना जाने क्यों यहां की सड़को का इतना बुरा हाल है। जबलपुर पहुंचते ही हमें सीधे दो टायर बदलबाने पड़े। इस मार्ग पर बीच-बीच में सड़के ही गायब है या फिर सड़क बीच मे से इस तरह कटी हुई है कि उसे पार ही नहीं किया जा सकता है, आपको मुख्य मार्ग छोड़कर सड़क को आगे जाकर फिर से पकड़ने के लिए खेतो मे उतरना पड़ता है। कहीं-कहीं सड़को के बीच पत्थरों को इस तरह से सजाया गया है कि आपकी ड्राइविंग और गाड़ी की नीचे की मजबूती दोनो की परीक्षा हो जाती है।


ऐसी सेड़को के लिए मध्य प्रदेश के निवासियों की सराहना की जानी चाहिए कि इतनी खराब सड़कों को बर्दास्त करते है। सड़को की बदत्तर स्थिती के चलते रात बीना में काटनी पड़ी, क्योंकि बीना पहुंचते-पहुंचते ही अच्छा खासा अन्धेरा हो चुका था, जबकि आगे का मार्ग कैसा होगा का कुछ मालूम नहीं था। गाड़ी बगैर स्टैपनी के चल रही थी और दूसरा टायर कभी भी जवाब दे सकता था, जबकि इस मार्ग पर टायर बदलवाना भी बहुत मुश्किल था। अतः रात्रि विश्राम बीना में करने का निर्णय लेना पड़ा।
यहां दो कन्ट्राेल रूम चल रहे है, दोनो ऑपरेटरों से भेंट की। बीना के जिस होटल में हाल्ट किया वह यहां का एक प्रकार से टाप होटल माना जाता है। कम से कम रेट में तो वह स्वंय को 5 स्टार से कम नहीं समझता है, लेकिन उसकी वास्तविकता बिल्कुल अलग है। एक रात गुजारना वहां मजबूरी थी, लेकिन सुबह होटल के मालिकों के लिए 30-35 शिकायतो का एक मुलिन्दा बांध कर जरूर हम छोड़ आए कि वह सुधार कर सकें नाम था मीलानी। बीना से आगे जबलपुर का रास्ता चकाचक था अतः समय रहते जबलपुर पहुंच गई यात्र, जाते ही सबसे पहले दो टायर बदलवाए। नए टायर बदलने के बाद टायरों को आगे-पीछे भी करवाया। गाड़ी के सायलेंसर की डोलची में भी किसी पत्थर ने अपना निशान छोड़ा है, लेकिन उसे दिल्ली पहुंचकर ही ठीक करवाएगें। जबलपुर में आगे की यात्र अभी ओर रोचक होने वाली है, उसके लिए आपको अगले अंक की प्रतीक्षा करनी होगी इस भाग में यात्र जबलपुर पहुंच गई है।

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