चेतना यात्रा-7 के सहभागी बनने का अवसर

मीडिया के अंश के रूप में देश के कोने-कोने में विद्यमान वर्तमान युग के संजय जिन्हें अब केबल टीवी ऑपरेटर कहा जाता है, उनकी पहुंच से कुछ भी बाहर नहीं रह गया है। उनकी क्षमता-प्रतिभा एवं योग्यता जिससे वह स्वयं भी पूरी तरह से वाकिपफ़ नहीं है, उसी का भान करवाने के लिए निरन्तर उनके साथ जुड़े रहना, समय-समय पर उनसे सीधे-सीधे रूबरू होना और उनको सामाजिक कार्यों के प्रति प्रेरित करना भी हर साल की जाने वाली चेतना यात्र का एक अहम हिस्सा है। केबल टीवी सेवा में संलग्न देश की हरेक कड़ी आज देशवासियों की आंख-कान बन गई है। देखना या सुनना क्या है उसका निर्णय उन्हें स्वयं ही करना होता है। केबल टीवी ऑपरेटरों ने हर तरह के चैनलों को आम आदमी तक पहुंचा दिया है।


चौबीसों घन्टों परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए उसकी पसंद का प्रोग्राम उपलबध करवाने वाला केबल टीवी ऑपरेटर स्वयं की उपलब्धि से अभी भी अनजान है, यही कारण है कि मीडिया का मजबूत कंधा माध्यम होने के बावजूद भी वह अपना वह स्थान हांसिल नहीं कर पाया है। जिसका वह हकदार है। मीडिया का कोई हिस्सा भी वह है या नहीं इस सच को स्वयं वह भी अभी जान नहीं पाया है, क्योंकि एक केबल टीवी ऑपरेटर के रूप में उसकी क्षमता क्या है का ज्ञान उसे अभी हो नहीं सका है। विश्व का सबसे बड़ा खजाना उपभोक्ताओं के रूप में जो उसके पास है वैसा किसी और की झोली में नहीं है। उपभोक्ताओं से लबालब भरी झोली के साथ-साथ मीडिया का भी नियन्त्रण उन्हीं के हाथों में है।

चौबीसों घन्टों उपभोक्ताओं तक सीधी पहुंच के लिए भी ऑपरेटर सदैव उनकी पहुंच में है। मुकम्मिल कार्यालय चिर-परिचित कर्मचारी, लेकिन अभी ऑपरेटर सिर्फ केबल टीवी सेवा ही तो अपने उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवा रहा है, जबकि उपभोक्ताओं की जरूरत यहीं पर नहीं निबट जाती है, उसे तमाम सेवाओं सहित भिन्न प्रोडक्ट भी उपलब्ध करवा सकता है केबल टीवी ऑपरेटर। अपने उपभोक्ताओं को केवल एक ही सेवा पहुंचाने वाला केबल टीवी ऑपरेटर इसी कार्य को बहुत बड़ा समझ बैठा है, जैसे थक सा गया हो, जबकि उपभोक्ताओं तक कुछ भी पहुंचाने के लिए उसके पास तकनीशियन्स के रूप में विशिष्ट मैनपावर भी है, इसकी प्रतिभा योग्यता अद्भुत है, जिसका अभी पूरी तरह से इस्तेमाल ही नहीं किया जा सका है।

यह ऐसी पफ़ौज है जिन्होंने सब कुछ अनुभवों से ही सीखा है, किसी शिक्षण/ संस्थान में नहीं, बल्कि ग्राऊण्ड में आवश्यकतानुसार स्वयं प्रैक्टिकल कर करके कड़ा परिश्रम कर ज्ञान हांसिल किया है। इन्होंने उपभोक्ताओं का विश्वास एवं ऑपरेटरों का भान बनाए रखा है। यही वह सीढ़ी है जो देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को ससम्मान ऑपरेटरों के साथ जोडे़ हुए है। अवसर आने पर ऑपरेटरों की यही शक्ति बहुआयामी भूमिका निभाएगी।


जीविकोपार्जन के लिए शुरू किए गए केबल टीवी व्यवसाय से पूर्ण सन्तुष्टि आय अर्जित हुई है, अतः इस व्यवसाय को अपनाने पर पछतावा बिल्कुल नहीं किया जा सकता है आय एवं किए गए कार्य के अनुसार जिस सम्मान के हकदार हैं वह ना मिल पाने के लिए स्वयं ऑपरेटर ही जिम्मेदार भी हैं। इसलिए ऑपरेटरों को अपने कार्य के अनुसार सम्मान भी हांसिल करने के लिए स्वयं प्रयत्न करने होंगे। लेकिन यह तभी सम्भव है जब वह पैसे से आगे निकल कर इसकी जरूरत समझेंगे। यह तभी सम्भव है जब उनकी समझ में यह आ जाएगा कि केबल टीवी सेवा के रूप में बिना किसी सरकारी गैर सरकारी सहायता के उन्होंने जो कर दिया है वह अद्भुद है।

आज सारी दुनिया को चकाचौंध कर देने वाली हजारों करोड़ की एक नई इंडस्ट्री का निर्माण किया है उन्होंने। केबल टीवी के माध्यम से ही कई चैनल दर्शकों तक पहुंचा है, अन्यथा उसके अस्तित्व में आने का कोई सवाल ही नहीं था। एक चैनल से आरम्भ होकर अनेक चैनलों तक पहुंच जाने के बाबजूद भी ऑपरेटरों की गति थमी नहीं है, बल्कि आवश्यकतानुसार निरन्तर विकास की सीढ़िया चढ़े जा रहे हैं ऑपरेटर।

तकनीकी क्रान्ति का एक नया इतिहास रच रहा है केबल टीवी ऑपरेटर लेकिन विडम्बना यह है कि चैनल हों या पिफ़र सरकार सब अपना उल्लू साध रहे हैं, ऑपरेटर की भी कोई जरूरतें हैं उस पर कहीं कोई गम्भीरता नहीं है। उपभोक्ताओं का रवैया भी कुछ अलग नहीं है, बल्कि वहां भी सरकार ने सीमाएं खींच रखी हैं। इस सबके बावजूद भी ऑपरेटर बगैर किसी परेशानी के अपने कार्यक्षेत्र में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा है, वह सरकार का, चैनलों का और उपभोक्ताओं का भी मान रखे हुए है। उसके प्रति भी नजरिया बदलना चाहिए, लेकिन उसके लिए स्वयं ऑपरेटरों को ही प्रयास करने होंगे। कैसे होंगे वह प्रयास\
‘चेतना यात्र-7’ में कुछ इसी तरह के प्रयासों को शुरू किया जाएगा, जिसमें सबसे अहम होगा समाज के प्रति ऑपरेटरों का सामाजिक दायित्व। इसके अन्तर्गत केबल टीवी ऑपरेटर अपने तकनीशियन्स के सहयोग से अपने-अपने कार्यक्षेत्रें में विश्व की सबसे बड़ी समस्या ग्लोबल वार्मिंग के प्रति जागरूकता लाने के प्रयास करेंगे।

भावी पीढ़ियों को स्वच्छ हवा उपलब्ध हो सके उसके लिए वृक्षारोपण करवाएंगे। साथ ही देश को इलैक्ट्रॉनिक कचरे का गटर बनने से भी बचाने का प्रयास करेंगे। इसके लिए लोगों में बस जागरूकता लाने की आवश्यकता है। सरकार ऐसे कार्यों में मोटे-मोटे बजट खपा देती है, लेकिन स्थितियां बद से बद्तर ही होती जाती हैं। गंगा-यमुना की सपफ़ाइयों में देश का कई करोड़ रूपया सरकारी खजाने से बहाया जा चुका है, लेकिन परिणाम—\ ग्लोबल वार्मिंग एवं वृक्षारोपड़ के नाम पर भी अरबों-खरबों खर्च किए जाते हैं, लेकिन परिणाम—\ खेत-खलिहान और पशु धन सिमटता जा रहा है, जंगल कटते जा रहे हैं, पहाड़ नंगे होते जा रहे हैं, जमीन कंक्रीट बनती जा रही है और आबादी मल्टीप्लाई हो रही है, समाधान की दिशा में तो बढ़ ही नहीं पा रहा है वर्तमान। ऐसी विषम स्थितियों में अपनी भावी पीढ़ियों की चिंता स्वयं ही करनी होगी और इसके लिए सिपफ़र् जागरूकता की ही जरूरत है, बाकी काम लोग स्वयं कर लेंगे।


लोगों में जागरूकता के लिए देशभर के केबल टीवी ऑपरेटर एक महत्वपूर्ण और बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इसी के लिए हर वर्ष ‘चेतना यात्र’ का आयोजन किया जाता है। बीती छः यात्रओं में देश के कोने-कोने तक पहुंच कर अधिकाधिक ऑपरेटरों को इस मुहिम में जोड़ने का प्रयास किया गया है, लेकिन लक्ष्य बड़ा है और देश भी, अतः छः यात्रएँ पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि ऐसे प्रयासों की निरन्तर जरूरत है। लगातार छः यात्रओं की सपफ़लता के बाद अब ‘चेतना यात्र-7’ की समूची इंडस्ट्री को प्रतीक्षा है। चेतना यात्र के अन्तर्गत देश के दूरदराज क्षेत्रें में स्थित केबल टीवी ऑपरेटरों के साथ इंडस्ट्री की भावी सम्भावनाओं पर विशिष्ट मन्त्रणाओं में तकनीकी एवं कानूनी जानकारियों का आदान-प्रदान तो होता ही है, साथ ही केबल टीवी सेवा के साथ-साथ उपभोक्ताओं को अन्य सेवाएं उपलब्ध करवाने एवं अतिरिक्त आय के नए-नए मार्ग खोलने पर भी विचार विमर्श होते हैं। इसी यात्र में ऑपरेटरों को आपस में एक-दूसरे से जुड़ने एवं राष्ट्रीय स्तर पर समस्त कड़ियों को जोड़ने का भी प्रयास किया जाता है।


भारतीय ब्रॉडकास्टिंग एण्ड केबल टीवी व्यवसाय में अहम् भूमिका निभा रहे देशभर के केबल टीवी ऑपरेटरों को इंडस्ट्री में वह स्थान नहीं मिला जिसके वह हकदार थे, उनका सिपफ़र् और सिपफ़र् इस्तेमाल ही किया गया है, जबकि उन्हीं की कड़ी मेहनत और सूझ-बूझ का परिणाम आज विश्वभर के धनकुबेरों को चका-चौंध किए है। उपभोक्ताओं का इतना विशाल जखीरा देश के इन्हीं केबल टी-वी- ऑपरेटरों की झोली में है। मात्र 20 वर्ष के अल्प समय में बगैर किसी की मदद के स्वयं की ही सूझ-बूझ से हजारों करोड़ की इतनी विशाल इंडस्ट्री का निर्माण कर इन्होेंने जो काम किया है उसका सम्मान पाने का भी अब समय आ गया है, अतः चेतना यात्र-7 में ऑपरेटरों की तमाम कड़ियों को राष्ट्रीय स्तर पर एक-दूसरे में गूंथ कर एक नए समाज की संरचना का भी प्रयास किया जाएगा। एक ऐसा समाज जो समाज के प्रति पूर्णतया समर्पित हो। समाज को अच्छे-बुरे का आईना दिखलाते हुए श्रेष्ठ भविष्य के मार्ग पर ले जा सके। एक ऐसा समाज जिसका दायरा किसी शहर अथवा राज्य या देश तक ही ना सिमटा हो अपितु वसुधैव कुटुम्बकम् की भांति समूची मानव जाति के हित में पृथ्वी की सुरक्षा के लिए पूर्णतया समर्पित है।

‘चेतना यात्र-7’ के अन्तर्गत देशभर के केबल टीवी ऑपरेटरों की सहभागिता में ग्लोबल वार्मिंग के प्रति लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ तमाम शहरों में भारी संख्या में वृक्षारोपण भी किया जाएगा। इसके लिए स्कूल-अदालती परिसर, पुलिस-प्रशासनिक कार्यालयों सहित तमाम निजी व सरकारी प्रतिष्ठानों का चयन किया जाएगा, जहां सबको एकत्रित कर ग्लोबल वार्मिंग के प्रति उनकी जिम्मेदारी का अहसास एवं वृक्षारोपण का कार्य किया जाएगा। ग्लोबल वर्मिंग के साथ-साथ अब ईकचरे (इलैक्ट्रॉनिक कचरे) के प्रति भी लोगों को चेतना बहुत जरूरी हो गया है।

हर घर परिसर में ई कचरा बढ़ता जा रहा है, जिसका समाधान भी तुरन्त ही करना होगा, अन्यथा दुनिया की आबादी के लिए इलैक्ट्रानिक वेस्ट भी कभी ना खत्म होने वाली एक बड़ी समस्या बन जाएगी। समस्याएं भले ही कितनी भी विकराल क्यों ना हो उनका समाधान हो सकता है। लेकिन आवश्यकता जागरूकता की है। जागरूकता स्वयं नहीं आती बल्कि उसे लाना पड़ता है। एक बार लोगों में जब जागरूकता आ जाती है तब समस्या का स्वयं ही समाधान होने लगता है। यही जागरूकता लाने का दायित्व केबल टीवी ऑपरेटर उठा सकते हैं। इन्होंने ही समाज को मीडिया का एक नया संसार दिया है, नई चेतना, नई उमंग एक नई संस्कृति के रचयिता बन गए हैं, यही अब समाज को जन कल्याण की भी एक नई दिशा दिखा सकते हैं, आशाएं सदैव जीवित रहनी चाहिए, मंजिल स्वयं मिल जाती हैं।

Add a Comment

Your email address will not be published.