‘चेतना यात्रा-7’ 5 सितम्बर से 25 अक्टूबर 2011

भारतीय ब्रॉडकास्टिंग एण्ड केबल टीवी इंडस्ट्री की बहुप्रतीक्षित ‘चेतना यात्र-7’ का शुभारम्भ देश की राजधानी दिल्ली से 5 सितम्बर को हुआ। यात्र की सपफ़लता और सुरक्षा की शुभकामनाएँ देने के लिए मीडिया इंडस्ट्री के तमाम जाने-माने प्रतिनिधियों ने भााग लिया। गो ग्रीन-गो डिजीटल का स्लोगन लिए यह यात्र देश के सभी राज्यों में ग्लोबल वार्मिंग के प्रति देशवासियों को जागरूक करने के साथ-साथ शहर दर शहर वृक्षारोपण के कार्यक्रम भी आयोजित करवाएगी। भारतीय ब्रॉडकास्टिंग एण्ड केबल टीवी इंडस्ट्री में संलग्न व्यक्तियों सहित प्रिन्ट मीडिया एवं देश के कोने-कोने में विद्यमान विभिन्न चैनलों के रिपोर्ट्स व स्टिंगर्स भी चेतना यात्र के प्रयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया करते हैं।

पूर्व में की जा चुकी छः सपफ़ल यात्रओं में किए गए वृक्षारोपण के परिणाम भी अब नजर आने लगे हैं। तमाम शहरों में रोपे गए उन पौधों ने अपनी जड़ें पकड़ ली हैं और अब वो मजबूत पेड़ बनते जा रहे हैं। इसी प्रकार इलैक्ट्रॉनिक कचरे (ईवेस्ट) पर की गई चर्चाओं के भी अब आंशिक परिणाम कई शहरों में दिखाई देने लगे हैं। केबल टीवी ऑपरेटरों ने अपनी खराब हो गई केबल को उन कबाड़ियों के सुपुर्द न करने का निर्णय लिया है जो इसमें से कॉपर निकालने के लिए केबल को जलाया करते थे, बल्कि अब ऐसी केबल उन्हीं लोगों को दी जाती है जो इसे छील कर इसमें से कॉपर निकालते हैं।

ऑपरेटरों के साथ-साथ उन कबाड़ियों की समझ में भी धीरे-धीरे यह बात आ रही है कि केबल को जलाकर कॉपर निकालने की प्रक्रिया में जितनी जहरीली गैसें हमारे अन्दर चली जाती हैं, उसके मुकाबले में प्राप्त होने वाले कॉपर की कीमत का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता है।


ग्लोबल वार्मिंग के खतरों और उनसे बचाव के उपायों पर लोगों में जागरूकता लाने की जितनी भी कोशिशें की जाएं उतनी ही कम हैं, लेकिन इसके लिए किए जाने वाले वृक्षारोपण कार्यक्रमों में आने वाली भीड़ से भी ज्यादा अहम होता है कि कितने पौधे जीवित रहे। पौधों की बच्चों की तरह से देखभाल करने वाले भी चेतना यात्र के दरमियान अनेक लोग मिलते हैं एवं लगाए गए पौधों को गोद लेने वाले बच्चों का भी उत्साह कार्यक्रम को ऊर्जा प्रदान करता है। ब्रॉडकास्टिंग एण्ड केबल टीवी इंडस्ट्री में संलग्न लोग जिनके प्रयासों से ही ढ़ेर सारे चैनल देश के करोड़ों दर्शकों तक पहुंच रहे हैं, लेकिन पर्दे के पीछे के उन लोगों का उन दर्शकों के साथ बहुत कम ही सम्पर्क का मौका मिल पाता है।

अनेक शहरों व क्षेत्रें में तो दर्शकों को केबल तकनीशियन्स के अलावा किसी और से कोई ताल्लुक ही नहीं होता है व न ही दर्शक यह जानते हैं कि उन्हें ऐसी सेवा उपलब्ध करवाने वाले है कौंन\ केबल वार में संलिप्त विभिन्न ऑपरेटरों की एक-दूसरे पर तनातनी की खबरों का भी दर्शकों में बुरा प्रभाव पड़ता है, लेकिन उन्हीं दर्शकों को जब इंडस्ट्री द्वारा किए जाने वाले ऐसे जनहित कार्यों का पता लगता है तब इंडस्ट्री के लोगों के प्रति आश्चर्य के साथ सम्मान का भी भाव आता है। देश के करोड़ों लोगों तक केबल टीवी सेवा उपलब्ध करवाना एक चुनौतीपूर्ण और बड़ा व्यवसाय है, लेकिन उन करोड़ों देशवासियों की भावी पीढ़ियों को भी दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे पृथ्वी के तापमान के प्रति जागरूक करना एवं इसके खतरों से बचाव के उपाय करने में उनको भी निमन्त्रित करना सम्मान सहित जोड़ता भी है।

इसके लिए विभिन्न शहरों में स्कूलों, अदालत परिसरों, अस्पतालों व थानों सहित प्रमुख सार्वजनिक संस्थानों पर वृक्षारोपण कार्यक्रमों का आयोजन कर सबको शामिल किया जाता है। पृथ्वी को बचाने की मुहिम में जनसहयोग के साथ-साथ आपस में भी तालमेल बढ़ता है। केबल टीवी व्यवसाय में संलग्न हर किसी के लिए आवश्यक है कि वह सार्वजनिक जीवन में सम्मान भी पाए। पर्यावरण के बिगड़ते सन्तुलन के कारण दिन ब दिन प्रकृति में भारी बदलाव आ रहे हैं। निरन्तर प्रकृति हमें संकेत दे रही है कि हम कैसे भयानक भविष्य की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। अपनी ही दुनिया में मशगूल हम तमाम शानोशौकत के सामान तो बटोरने में लगे हुए हैं, लेकिन कुदरत के कहर से हम कतई नहीं डर रहे हैं।

निरन्तर बढ़ता जा रहा जनसंख्या का सैलाब पृथ्वी पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों को नोचता-खसोटता जा रहा है। पीने के पानी से लेकर शुद्ध हवा के भी अब टोटे पड़ते जा रहे हैं। इन्सानों के बढ़ते जा रहे जन सैलाब के जीवित रहने में प्राकृतिक संसाधनों का सबसे बड़ा योगदान है। उसे सब कुछ प्रकृति से ही लेना होता है, इसीलिए पेड़ों का कटान बढ़ता गया और अब पहाड़ नंगे होते जा रहे हैं। खेत बड़ी तेजी के साथ कंक्रीट में बदलते जा रहे हैं। आदमी की जरूरत की पूर्ति के लिए बड़े-बड़े कारखाने लगते जा रहे हैं, रोजाना नई-नई गाड़ियों की खेप आ रही है, एयरकण्डीशन्स की संख्या में दिनों-दिन वृद्धि होती जा रही है, अर्थात हर तरीके से वायुमण्डल का तापमान लगातार बढ़ाया ही जा रहा है।

पेड़-पौधों को लगाने की जगह ही मिलनी मुश्किल होती जा रही है, यही कारण है कि कई बीमारी नवजात शिशु साथ ही लेकर आ रहे हैं। वायुमण्डल के तापमान का प्रभाव सीधे-सीधे ग्लेशियर्स पर दिखाई दे रहा है, वह तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे कि समुंद्र का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। समूची पृथ्वी पर प्राकृतिक बदलाव का बड़ा खतरा मण्डरा रहा है, लेकिन मानव जाति बगैर किसी परवाह के वर्तमान को ही हर तरह से भोग लेने तक ही सिमटी हुई है। हालांकि बदलते मौसम के मिजाज डर और कोतुहल तो पैदा किए हुए है इन्सानों में, लेकिन पृथ्वी के प्रति भी उनकी कोई जिम्मेदारी बनती है या पिफ़र वह ऐसा कुछ कर सकते हैं क्या कोई जिसका प्रभाव पृथ्वी पर पड़े के प्रति वह अनभिज्ञ है।

आवश्यकता है कि अधिकाधिक लोगों को इस समस्या के प्रति जागरूक किया जाए। उनकी जागरूकता से ही उपाय सम्भव है। उन्हें पृथ्वी के निरन्तर बढ़ते जा रहे तापमान में उनकी भूमिका का भी ज्ञान कराया जाना चाहिए, तभी स्वयं से सुधार की कोशिशें भी हो सकती हैं अन्यथा पर उपदेश—। मीडिया व्यवसाय में संलग्न देश की हरेक कड़ी जब स्वयं इस समस्या को समझ जाएगी एवं इस समस्या के समाधान का बीड़ा अपने हाथों में उठा लेगी तब करोड़ों लोगों को जागरूक करना और उन्हें भी इस अभियान में जोड़ लेना मुश्किल नहीं रह जाएगा। इसीलिए मीडिया व्यवसाय पर केन्द्रित ‘चेतना यात्र’ की शुरूआत की गई थी।

सर्वप्रथम तो देश के समस्त मीडिया कार्मियों सेे मिलना व उन्हें जोड़ना ही प्राथमिकता रही, लेकिन इनसे मिलना और जोड़ना ही पर्याप्त नहीं था। इनकी परेशानियों-समस्याओं को समझना-सुलझाना भी प्राथमिकता में रहा। एक-एक करके लगातार छः सपफ़ल यात्रओं में देश के गांव-गांव तक पहुंचाने की कोशिशें की गई हैं चेतना यात्रओं में। मीडिया व्यवसाय में संलग्न हरेक कड़ी को मिलने एवं जोड़ने का प्रयास किया गया है हरेक चेतना यात्र में। देशभर के केबल टीवी ऑपरेटरों सहित हॉर्डवेयर व्यवसाय में संलग्न व्यवसायी भी यात्र के साथ सहभागी बन लाभ उठाते हैं।

चेतना यात्र के दौरान तमाम शहरों में होने वाली बैठकों एवं विभिन्न आयोजनों में इंडस्ट्री के विभिन्न पक्ष तो शामिल होते ही हैं, बल्कि साथ में प्रिन्ट मीडिया सहित विभिन्न-चैनलों के रिपोर्टर-ब्यूरो व स्टिंगर्स भी सहभागिता किया करते हैं। अर्थात् समूचा मीडिया जगत मिलकर ग्लोबल वार्मिंग के प्रति आम जनमानस को जागरूक करने के लिए चेतना यात्र में सहभागी बन जाते हैं।
‘चेतना यात्र-7’ देश की राजधानी दिल्ली से आरम्भ होकर हरियाणा व पंजाब से होकर जम्मू-कश्मीर पहुंचेगी। वहां से हिमाचल-चण्डीगढ़ होते हुए उत्तराखण्ड के बाद उत्तरप्रदेश में प्रवेश करेगी। इस दरमियान कई शहरों के स्कूलों, अदालत परिसरों सहित प्रमुख सरकारी संस्थानाें में वृक्षारोपण कार्यक्रमों का आयोजन होगा।

उत्तरप्रदेश से यात्र मध्यप्रदेश होकर पुनः उत्तरप्रदेश के मार्ग से बिहार में प्रवेश करेगी। बिहार-झारखण्ड से होकर यात्र वेस्ट बंगाल के रास्ते उड़ीसा पहुंचेगी। उड़ीसा से छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र के रास्ते आन्ध्रप्रदेश में प्रवेश करेगी। आन्ध्रप्रदेश में तिरूपति बालाजी का आशीर्वाद प्राप्त कर तमिलनाडु के रास्ते पांडिचेरी होकर पुनः तमिलनाडु होते हुए केेरल जाएगी। केरल से यात्र कर्नाटक होते हुए गोवा पहुंचेगी। गोवा से पुनः महाराष्ट्र में मुम्बई होते हुए यात्र गुजरात का दौरा करेगी। गुजरात से राजस्थान होकर यात्र पुनः उत्तरप्रदेश के रास्ते वापिस दिल्ली पहुंचेगी।


5 सितम्बर 2011 को आरम्भ होकर ‘चेतना यात्र-7’ देश के विभिन्न राज्याें के तमाम शहरों-कस्बों व गांवों में मीडिया कर्मियों की सहभागिता के साथ देशभर में ग्लोबल वार्मिंग के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए वृक्षारोपण के भी अनेक कार्यक्रमों में भाग लेगी। इसी के साथ-साथ भारतीय ब्रॉडकास्टिंग एण्ड केबल टीवी व्यवसाय में संलग्न लोगों की समस्याओं के समाधान पर भी चर्चाएं हाेंगी। इंडस्ट्री की भावी सम्भावनाओं पर तकनीकी एवं कानूनी तैयारियों पर भी विस्तृत चर्चाएं होंगी। एनालॉग से डिजीटल टैक्नोलॉजी पर जाने की जरूरत के साथ-साथ डिजीटल तकनीक अपनाने के तरीकों पर भी चर्चाएं होंगी।

‘चेतना यात्र-7’ का गो ग्रीन-गो डिजीटल के अन्तर्गत इंडस्ट्री की भावी सम्भावनाओं में भी अहम महत्व होगा, क्योंकि वर्तमान हालातों में यह समूची इंडस्ट्री अपनी सही दिशा तलाशने पर लगी हुई है, जबकि इंडस्ट्री के विभिन्न पक्ष इसे अपने-अपने तरीके से हांकने पर उतारू हैं। समूची इंडस्ट्री के हित में संयुक्त प्रयासों का अभाव ही इस इंडस्ट्री को सही दिशा नहीं दे सका है।
वही सिलसिला बीते बीस वर्षों से चलते-चलते इंडस्ट्री को आज तक ले आया है, लेकिन यहां से आगे का रास्ता भी अभी उसी ढ़र्रे से होता हुआ अभी कितना समय और जाया करेगा, यह कहना कठिन है। बहरहाल! चेतना यात्र-7 देश के कोने-कोने तक विद्यमान इंडस्ट्री की हरेक कड़ी तक पहुंच सके एवं उन को आपस में जोड़ सके, साथ ही सबकी सहभागिता में पृथ्वी के बढ़ते जा रहे तापमान एवं उससे होने वाले खतरों के प्रति आम जनमानुष को जागरूक कर सके इन्हीं आशाओं के साथ गो ग्रीन-गो डिजीटल की यह ‘चेतना यात्र-7’ निर्विघ्न सकुशल सम्पन्न हो की आशा सहित आरम्भ हुई।

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