(चौथा भाग)चेतना यात्रा-9मुम्बई से हैदराबाद तक

डिजीटलाईजेशन के प्रथम चरण में दिल्ली-मुम्बई-कोलकाता व चैन्नई चारों महानगरों में एक नवंबर 2012 से केबल टीवी संशोधित एक्ट 2012 लागू हो गया था, लेकिन पालन केवल दिल्ली व मुम्बई में ही शुरू हुआ था। कोलकाता में त्यौहारों के बाद अमल करने की बात हुई थी, जबकि चैन्नई पर कोई निर्णय ही नहीं हो सका था। अभी भी चैन्नई में डैस के लिए बना कानून लागू नहीं करवाया जा सका है, लेकिन कोलकाता में इम्प्लीमेंट हो रहा है। कोलकाता में भी दिल्ली व मुम्बई की तरह एनालाग प्रसारण बंद करवा दिया गया है।


ट्राई के निर्देशानुसार दिल्ली में सैफ फार्म सहित उपभोक्ताओं से चैनल च्वाईस या निधि उनकी च्वाईस के अनुसार चैनलों के बुके पर भी उपभोक्ताओं से उनकी सहमति ले ली गई है। अर्थात उन्हें किस सैटटॉप बॉक्स पर कितने रुपए वाला चैनलों का पैकेज लेना है यह भी तय किया जा चुका है एवं इसी हिसाब से ही उपभोक्ताओं से मासिक वसूली भी शुरू की जा चुकी है। चैनलों के भिन्न पैकेजों के अनुसार पैसा वसूलने के साथ-साथ सरकार का टैक्स भी वसूला जाने लगा है, जबकि चार मेट्रो सिटी के बाद एक अप्रैल 2013 से देश की 38 सिटी और डैस के कानून के अर्न्तगत आ गई है, वहां भी एनालाग प्रसारण बंद करवा दिया गया है।


स के प्रथम चरण में शामिल महानगरी मुम्बई भी दिल्ली की ही भांति आगे बढ़नी चाहिए थी, लेकिन दिल्ली की तरह वहां अभी चैनलों की च्वाईस पैकेजों की शुरुआत ही नहीं हो सकी है, इसीलिए पूरे महाराष्ट्र में केबल टीवी ऑपरेटरों में एण्टरटेनमेंट टैक्स को लेकर खलबली मची हुई है। महाराष्ट्र में 45 रुपए प्रति सब्स्क्राईबर प्रतिमाह एण्रटेनमैंट लगा हुआ है, जबकि केंद्रीय सरकार का 12ण्36: और द्वितीय चरण में शामिल हो गई है, अतः ऑपरेटरों में डैस के प्रति ज्यादा चुनौतियां दिखाई दे रही हैं। अब वहां एकता संगठन की बातें आवश्यक समझी जा रही है। महाराष्ट्र केबल ऑपरेटर्स फैडरेशन (डब्व्थ्) का नेतृत्व मुम्बई के वरिष्ठ केबल टीवी ऑपरेटर अरविंद प्रभु कर रहे हैं। अरविंद प्रभु से मिले बिना मुम्बई से आग यात्र को ले जाना उचित नहीं लगा, अतः उनकी प्रतीक्षा में शाम तक हाईकोर्ट में थे। हाईकोर्ट में एण्टर टैनमेंट टैक्स को लेकर सरकार की ओर से जवाब दाखिल किया जाना था, लेकिन वहां से आज खाली हाथ ही वापिस आना पड़ा प्रभु को, क्याेंकि सरकार द्वारा जवाब दाखिल नहीं किया गया। शाम को महाराष्ट्र केबल ऑपरेटर्स के सदस्यों से बैठक हुई तब डैस पर जानकारियों का आदान-प्रदान हुआ। दरअसल बहुत सारी समस्याएं अधकचरे ज्ञान के कारण ही हैं इस इण्डस्ट्री में डैस को लेकर ऑपरेटर भ्रमित ज्यादा हैं, जबकि गम्भीरता से देखा जाए तो इसके लाभ ज्यादा हैं। बात ठीक तरह से लागू किए जाने की है।


टैक्स के मामले में भी महाराष्ट्र में जो लड़ाई चल रहीं है वह भी लीक से कुछ हटकर ही है। डैस पर आए कानून के अर्न्तगत टैक्स जमा करने की जिम्मेदारी एम एस ओ पर डाली गई है, लेकिन महाराष्ट्र में केबल टीवी ऑपरेटर का मानना है कि उनसे यह अधिकार नहीं छीना जाना चाहिए, अर्थात टैक्स भरने का अधिकार उनहें ही दिया जाना चाहिए। अभी महाराष्ट्र के ऑपरेटर टैक्स मामले पर ही अटके हुए हैं, जबकि दिल्ली पैकेजों के पार पहुंच गई है डैस के अन्तर्गत मुम्बई में अरविंद प्रभु व अन्य आपरेटरों के साथ डैस पर डिसकशन कर चैतना यात्र गोवा के लिए बढ़ चली। मुम्बई से कोंकण हाईवे पर लगातार बारिस साथ-साथ चलने लगी, गोवा बहुत दूर था अतः रात्रि विश्राम के लिए खेड के बाद चिपलूण के निकट रात्रि 3 बजे एक होटल वक्रतुण्ड में ठहरने की जगह तो मिल गई लेकिन खाने के बगैर ही रात काटनी पड़ी। बहुत ही हरियाली से भरा यह क्षेत्र पूर्णतया पोल्यूशन मुक्त प्रतीत हो रहा है। अगली सुबह फिर से गोवा की ओर बढ़ने लगी यात्र। चिपलून-रत्नागिरी-सावंतवाडी होते हुए शाम तक गोवा पहुंच गई यात्र। लगातार बारिस भी सारा रास्ते साथ चली और फिर गोवा में भी जमकर बरसती रही।


गोवा से कर्नाटक के लिए बढ़ते हुए धारवाड़-हुब्बली पहुंची यात्र, वहां आपरेटरों के साथ मीटिंग लेकर यात्र सीधे दावनगिरी पहुंची। लगातार सारे रास्ते बारिस रही दावणगीरी तक। दावणगीरी के आपरेटरों के साथ सुबह मीटिंग हुई तब ऑपरेटरों ने वहां के अन्य ऑपरेटरों को भी मीटिंग में बुलाने के लिए दोपहर बाद एक बड़ी मीटिंग करने के लिए तब तक रुक जाने जाने का आग्रह किया, अतः वहीं रुककर एक और बैठक कर शाम को दावणगीरी से सिमोगा पहुंची यात्र। कर्नाटक का यह क्षेत्र बहुत ही हरा-भरा एवं सम्पन्न है। प्रकृति का सौंदर्य यहां से गुजरने वाले का आकर्षित करता है। मन्दिरों में सजावट हो गई है। वह जगमगा रहे हैं क्योंकि नवरात्रें की धूम यहां भी पूरी दिखाई दे रही है। विजय दशमी पूर्व कर्नाटक में भी उत्साह पूर्वक मनाया जाता है। यहां के कई शहरों में गरबा का भी आयोजन किया जाता है। सिमोगा में हाथियों की फुटबॉल का विशेष आयोजन था। रात्रि विश्राम ज्वैल राक होटल सिमोगा में किया, वहीं सुबह आपरेटरों के साथ मीटिंग ली और यात्र चिकमंगलूर के लिए रवाना हो गई। पोालिटकली देश की पूर्व प्रधानमंत्री रही स्वण् इंदिरा गांधी से चिकमगलूर का नाम जुड़ा हुआ है, क्योकि उन्होंने एक बार यहां से चुनाव लड़ा था।


चिकमगलूर के ऑपरेटर्स के साथ हाइवे पर ही मीटिंग कर यात्र बेलूर होकर सीधे हासन पहुंची। बेलूर के ऑपरेटरों से भी हाईवे पर ही भेंट की एवं हासन के आपरेटरों के साथ मीटिंग कर यात्र सीधो तुमकूर पहुंची। रास्ते में फिर से बारिस शुरू हो गई। पूरा क्षेत्र बड़ी घुमावदार सड़कों के साथ अति प्राचीन वृक्षों से घिरा हुआ है। तुमकुर का भी पोलिटिकली महत्व रहा है लेकिन एजुकेशन सिटी कहा जाता है तुमकुर शहर को। इस क्षेत्र में प्रमुख शहरों को किसी ना किसी रूप में विशिष्ट पहचान दी गई है। चिकमगलूर को कॉफी सिटी कहा जाता है। बंगलोर को गार्डन सिटी के नाम से भी जाना जाता है। कर्नाटक केबल टीवी आपरेटरों में डैस को लेकर चिंता है, वह एम एस ओ के साथ स्वयं को अब सुरक्षित नहीं मान रहे हैं। इसलिए उनमें आजाद होने के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। तुमकुर के आपरेटर सतीष के परिवार से भी भेंट की सतीष अन्य ऑपरेटरों के साथ मिलकर डिजीटल फीड चल रही है एवम् सेटटॉप बॉक्स लगाए जाने लगे हैैं। सतीष एवं सीमा शेखर आदि ने मिलकर बंगलौर में हैडेण्ड लगाया है। बंगलौर से ही फीड तुमकुर सहित अन्य नजदीकी क्षेत्रें को जा रही है। इनका हैडेण्ड ईडिजीटल कहलाता है।

तुमकुर से सीधे बंगलौर पहुंची यात्र बंगलौर में 6-7 एम एस ओ डैस को अर्न्तगत कार्यरत है। हाथवे-डैन अमोध एकट्रीया एवं इन केबल सहित ई-डिजीटल एवं आल डिजीटल भी वहां बड़े नेटवर्क बन गए हैैं, जबकि दो अन्य एम एस ओ ओर बंगलौर में डिजीटल सेवा उपलब्ध करवा रहे हैं। डैस के द्वितीयचरण में घोषित 38 शहरों की लिस्ट में कर्नाटक की कुल दो ही सिटी बैंगलौर एवं मैसूर ही शामिल है। मैसूर में डिजीटल फीड बंगलौर से ही पहुंचाई जा रही है। केबल टीवी ऑपरेटरों का कोआपरेटिव स्टाईल में डैस पर जाने का एक अच्छा नमूना बंगलौर में देखने को मिलता है। फिलहाल दो सौ आपरेटर आल डिजीटल में सहभागी बनकर डैस के अर्न्तगत पूर्णतया निजी नेटवर्क चला रहे हैं।


बंगलौर सबसे भेंट कर यात्र मैसूर पहुंची। हेरिटेज सिटी कहा जाता है मैसूर को। यह टीपू सुल्तान की नगरी है, यहां दशहरा उत्सव बड़ी धूूम-धाम से मनाया जाता है। यहां का दशहरा महोत्सव विश्वविख्यात है। बंगलौर-मैसूर मार्ग पर पड़ने वाली कई सिटी के नाम सिल्कसिटी, शुगर सिटी हिस्टौरिकल सिटी यानिकि हरेक सिटी को अपनी एक अलग पहचान दी गई है। मैसूर में बिजली की साज-सज्जा अलगी ही आकर्षण रखती है। दशहरा महोत्सव के दौरान रात के 10 बजते ही जगमगाती लाइटें बंद कर दी जाती है। दशहरा महोत्सव के आज के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए एक कलाकार के रूप में सिने अभिनेत्री हेमामालिनी आई हुई है। इसी तरह यहां हर रोज देश की जानी मानी हस्तियां शामिल होती है। 5 से 13 अक्टूबर तक चलने वाले इस दशहरा महोत्सव में आज मिका नाईट का कार्यक्रम है, जबकि पहले दिन शुरुआत प्रमुख टीवी कलाकार शान से हुई थी, कल हेमा मालिनी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए हर वर्ष देश के प्रतिष्ठित कलाकरों को बुलाया जाता है।


मैसूर के आपरेटर भी दशहरा महोत्सव में व्यस्त रहते है। रमा नाथन भी अति व्यस्त है, थोड़ी फुर्सत गाड़ी की सर्विस करवाने के लिए यहां निकाली और कपड़े भी लाण्ड्री करवाए। रमांनाथन के साथ मैसूर के सांसद श्री ए एच विश्वनाथन से भी भेंट हुई, उनकी शुभकामनाएं लेकर यात्र बांद्रीपुर टाईगर रिजर्व पार्क के लिए रवाना हो गई। जंगल में बने फारेस्ट हट््स में ही रात्रि विश्राम किया एवं सुबह-सुबह जंगलात की सवारी कैन्ट में जंगल की सैर की। यह जंगल बहुत विशाल है एवं तीन राज्यों कर्नाटक-तमिलनाडु व केरल में फैला हुआ है। वीरप्पन के मारे जाने के बाद अब जानवर भी पूरी आजादी के साथ यहां विचरण करते है। इस टाईगर रिर्जव पार्क में टाइगर, लेपार्ड, भालू जंगली भैंसे, जंगली कुत्ते, हाथियों के झुण्ड, हिरन, साम्भर, सूअर-बिज्जू आदि की भरमार है। बांस व लैन्टिना की झाड़ियों से हरा-भरा यह जंगल मैसूर से ऊटी मार्ग पर स्थित है। जंगल के अंदर सैर करने के लिए जंगलात के कैन्टर उपलब्ध हैं। हमने आज दो बार जंगल की सैर की एवं टाइगर-भालू के अतिरिक्त सभी कुछ देखने को मिला।


जंगल से निकलकर यात्र मुधुमलई टाइगर रिजर्व पार्क (तमिलनाडु) होते हुए सीधे सुल्तानबतेरी (केरल) पहुंची, जहां केरल की आपरेटर एसोसिएशन यात्र के स्वागत के लिए प्रतीक्षा में थी। केरल के तृतीय चरण में है लेकिन यहां डिजीटल की तैयारी पूरी जोरों पर है। सेटटॉप बॉक्स लगाए जा रहे हैं। केरल केबल टीवी ऑपरेटर एसो स्वयं यहां अपना डिजीटल हेडेण्ड आपरेटर कर रही है। जबकि अन्य एम एस ओ भी मौजूद है। केरल मीटिंग कर यात्र तमिलनाड़ु के ऊटी शहर के लिए रवाना हो गई। चारों ओर चाय, घूमती सर्पाकार सकरी सड़कों से गुजरते हुए रात का अंधेरा पूरी तरहस से धुंध से बदल चुका था। कोहरा इतना गहरा गया कि रास्ता दिखना ही बंद होता जा रहा था, यानिकि फोग के कारण विजीबिल्टी ना के बराबर रह गई। सड़कों पर बनी सफेद पट्टियों पर नजर गड़ाए किसी तरह गडूलूर तक ही पहुंच सकी आज यात्र। ऊटी कुल 50 किलोमीटर दूर रह गया था, अतः यहीं गुडूलूर में ठहरकर अगली सुबह आगे बढ़ने का निर्णय लिया गया।


एक छोटा सा कस्बा गुडूलूर तमिलनाडू का हिस्सा है। इस पूरे क्षेत्र में चाय-कॉफी के बागान, क्रिश्चन स्कूल व मस्जिदें बहुतायत में दिखाई देेते हैं बाजरों की रौनक भी अलग सा आकर्षण रखती हैं। गुडूलूर से यात्र के मार्ग को थोड़ा सा बदलना पड़ा, क्योंकि पहुुंचना पाण्डीचेरी है जो अभी बहुत दूर है। ऊंची मार्ग से कोयम्बटूर होते हुए सेलम जाने की अपेक्षा यहां से वापिस बान्दीपुर होकर गुण्डलपेट चामराज नगर मार्ग से सत्यमंग्लम भवानी होते हुए यात्र सेलम पहुंची। गडूलूर बिल्कुल केरल के निकट लेकिन तमिलनाडू में था जहां से आज यात्र रवाना हुई। वहां से बांदीपुर चामराज नगर कर्नाटक का हिस्सा है और सत्यमंग्लम से पुनः तमिलनाडू में प्रवेश कर गई यात्र। सेलम से अत्तूर होकर हाईवे 68 से होकर हाईवे 45 पर विल्लेपुरम से हाईवे 45 ए से सीधो पाण्डीचेरी पहुंच गई यात्र।


आज की यात्र कुछ विशिष्ट है, क्योकि आगे बढ़ने की अपेक्षा पीछे आकर मार्ग में परिवर्तन हुआ। तीन राज्यों को पार कर यू टी पाण्डीचेरी पहुंचा। पाण्डीचेरी में 12 अक्टूबर को मीटिंग का प्रोग्राम पूर्व निर्धारित था। तमिलनाडू में अभी डैस शुरू नहीं हो सका है, जबकि चैन्नई डैस के प्रथम चरण में था एवं कोयम्बटूर डैस के दूसरे चरण में लिस्टेड है। रात्रि विश्राम होटल जयराम पाण्डीचेरी में किया, जहां समुद्री तूफान फैलिन की खबरे लोगों को डराने का काम कर रहीे है। कई हिन्दी समाचार चैनलों पर तूफान की खबरे प्रसारित हो रही है। इस समुद्री तूफान को फैलिन नाम दिया गया है। इसका फोकस उड़ीसा व आंध्र प्रदेश के समुद्री किनारे हैं। इसी मार्ग पर या=रा ने बढ़ते हुए आगे निकलना है। हिन्दी समाचारों चैनलों को कई दिनों बाद पाण्डीचेरी में देखने का अवसर मिला, लेकिन समुद्री तूफान के साथ-साथ श्री मति सोनिया गांधी रिटायर्डमेंट नहीं लेंगी की खबरें ही दोनों दिनों में देखने को मिली। अयोध्या में सोमनाथ मंदिर की तरह ही मंदिर बनाए जाने के लिए होने वाली मीटिंग पर तीसरी खबर शुरू हो गई। इसके अलावा देश-दुनिया कहां हैण्ण्ण्कुछ नहीं मालूम। तूफान आने की समय सीमा एवं तूफान की दूरी भी चैनलों पर घटती जा रही है। क्या-क्या नुकसान हो सकता है अथवा क्या-क्या बचाव किए जा सकते हैं, पर पूर एक इ्र्रवेन्ट के तौर पर ले लिया गया है खबर्ची चैनलों ने।

पाण्डीचेरी के सभी एम एस ओ ने संयुक्त रूप से पूरी गर्म जोशी से यात्र को स्वागत किया। उनके साथ डैस पर भी लम्बी चर्चा हुई एवं पूरी जानकारी उन्हें दी गई, तत्पश्चात पाण्डीचेरी से चैन्नई के लिए रवाना हो गई यात्र। चैन्नई के मरीना बीच का दृश्य शायं पांच बजे अन्य दिनों से कुछ अलग नहीं प्रतीत हुआ। जबकि मीडिया द्वारा फैलिन तूफान की छह बजे भारतीय समुद्री तट से टकराने की घोषणा हुई है। तूफान की खबरों ने दशहरा उत्सव को भी फीका करके रख दिया है, जबकि आंध्रप्रदेश का ज्वलंत मुद्रा तेलगाना भी किसी कौने में सरका दिया गया है। तूफान की खबरों से इस पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है। त्यौहार और तूफान के कारण यात्र चैन्नई में सीधे आगे आंध्रप्रदेश की और बढ़ चली। आंध्रप्रदेश में भी दशहरा उत्सव बड़ी जोर-शोर से मनाया जाता है। दशहरा उत्सव के देश में अलग-अलग रूप हैं।


मैसूर के दशहरा उत्सव को देखने के लिए दुनियाभर से टूरिस्ट आते हैं। उसी तरह से महाराष्ट्र, गुजरात में दशहरा के अवसर पर पूरे नौ दिन डाण्डिया चलता है। जिसका इंतजार सभी को होता है। बंगाल-उड़ीसा में नौ देवी पूजा की जाती है, जिसका विसर्जन देखने के लिए भी भीड़ की कमी नहीं होती है। तमिलनाडूु में बाजारों की रौनक वहां से गुजरने वालों को आकर्षित करती है। पेठा, फलों के जगह-जगह ढ़ेर लगे हुए है, साथ में केले के पेड़ों को भी बेचने के िलए रखा गया है। यहां दशहरा पर केले के पेड़ों व पत्तों से वाहनों व घरों को सजाया जाता है एवं पेठा नजर ना लगे के लिए सिंदूर आदि लगाकर फोड़ा जाता है।
दशहरा के अवसर पर तमिलनाडू से आंध्रप्रदेश में प्रवेश किया यात्र ने। केबल टीवी ऑपरेटरों के साथ मीटिंग से भी ज्यादा इस समय दशहरा एवं तूफान महत्वपूर्ण हो गया है, जबकि यात्र समुद्र के उसी किनारे-किनारे चल रही है। जिस ओर ऊपर तूफान ने भारतीय समुद्री किनारे से टकराना हैै। तूफान के आने का आंखों देखा हाल जिस तरह से भिन्न समाचार चैनलों द्वारा बखान किया जा रहा है, शाम के 5 बजे चैन्नई के मरीना बीच पहुंच कर तो कतई सच नहीं प्रतीत हुआ, क्योंकि वहां समुद्री लहरों में रोजाना की तरह ही हलचल थी, जबकि चैनलों द्वारा तूफान के समुद्री तट से टकराने का समय शाम के छह बजे तय किया गया हुआ था।


चैन्नई के मरीन बीच को देखकर यात्र सीधे आंध्रप्रदेश की ओर बढ़ चली। आंध्रप्रदेश में इसी समुद्र किनारे पर बसे नैल्लौर शहर में विश्राम कर अलगी सुबह यात्र आगे बढ़ी। नैल्लौर के ऑपरेटरों से सुबह भेंट हो सकी, यहां एनालाग ही चल रहा है, लेकिन ऑपरेटरों को अगले साल 2014 में डिजीटल पर जाना होगा, यह उन्हें मालूम भी है और तैयारी भी कर रहे है। नैल्लौर सिटी में सभी मकान सफेद रंग के दिखाई देते हैं, एक प्रकार सारा शहर ही सफेद सा नजर आता है, जबकि देश के अन्य शहरों में आस-पास बने दो मकान भी एक रंग के मुश्किल से ही देखने को मिलते हैं। नैल्लौर से कावली-औंगल होकर हाइवे से गुण्टूर तक पहुंच कर यात्र का रूट आगे अंदरूनी रास्तों से तय करने का निर्णय लिया गया, क्योंकि आज दशहरा का पर्व है अतः हाईवे पर वह सब नहीं दिखाई देता है जो गांवों के रास्तों पर देखा जा सकता है। वैसे भी चैन्नई से चला एन एच 5 सीधे विशाखापट्नम तक समुद्र के किनारे-किनारे सुपरफास्ट यात्र के लिए बना हुआ है।


इस हाइवे से शहर साईड में ही रह जाते हैं, इसीलिए शहरों की रौनक विशेष तौर से दशहरा पर्व के अवसर पर बिल्कुल नजर नहीं आती है। इसीलिए इस एक्सप्रेस हाईवे को गुण्टूर से छोड़कर मृनालगोडा वाला मार्ग को पकड़ा गया। थोड़ी दूर जाने के बाद ही समझ में आने लगा कि एक गलत निर्णय ले लिया गया है, क्योंकि एक्सप्रेस वे से ग्रामीण रास्ते पर सड़क खराब मिली, जिसे स्वाभाविक मानते हुए यात्र आगे बढ़ने लगी, आगे और ज्यादा खराब होती गई सड़कें। सड़के आगे जाकर ठीक मिल जाएगी इसी उम्मीद पर इतना आग बढ़ चुके थे कि इतनी बड़ी बात नहीं थी, लेकिन जिस मार्ग से हम जा रहे हैं, वह सही मार्ग भी है या न हीं यह समझ पाना बहुत ही कठिन था, क्योकि उस मार्ग पर लोग ग्रामीण तेलगू भाषी थे वह अंग्रेजी भी नहीं समझते थे एवं शब्दों के उच्चारण भी बिल्कुल भिन्न थे।


इतना ही काफी नहीं था, बल्कि जिस मार्ग से यात्र गुजर रही थी, यह मार्ग नैक्सलैइट्स के लिए भी बहुत अनुकूल था। इसी मार्ग को पार करते-करते अंधेरा भी घना होता जा रहा था जबकि हमें कितना दूर किस दिशा में बढ़ना है यह भी ठीक से मालूम नहीं हो पा रहा था, फिर भी बढ़ते ही रहने के अतिरिक्त नैल्लौर से आरंभ हुई थी, नैल्लौर में आपरेटरों के साथ मीटिंग के बाद हल्का सा नाश्ता कर यात्र एन एच 5 से होकर बड़ी तेजी के साथ हाईवे पर गुण्टूर तक पहुंच गई थी, लेकिन गुण्टूर से सूर्यापेट पहुंचना इतना कठिन हो जाएगा अनुमान नहीं था। सूर्यापेट के लिए यूं तो विजियवाडा होकर एन एच 9 पकड़कर सीधे हैदराबाद वाला हाइवे मिल जाना था, लेकिन आंध्रप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रें में दशहरा पर्व को देखने की चाहत हमारे लिए अब एक चुनौती बन गई थी। सूर्यापट में यात्र के स्वागत की भव्य तैयारियों वहां के ऑपरेटरों ने की हुई थीं, वहां से राजेंद्र वी उपाला बार-बार फोन पर यात्र की जानकारी ले रहे थे, लेकिन फोन के सिग्नल भी सभी जगह नहीं मिल पा रहे थे। इन्ही दुविधाओं से निबटते हुए किसी तरह से अर्धरात्रि में सूर्यापेट पहुंच पाई यात्र।

दशहरा की भीड़ वापिस अपने घरों को लौट रही थी, अब भोजन व रात्रि विश्राम के अलावा किसी स्वागत-सत्कार की चाहत नहीं रह गई थी। सूर्यापेट में अच्छा कहे जाने वाला होटल स्टाफ छुट्टी पर होने के कारण उपलब्ध नहीं था और जो मिला वह वहां ठहरने लायक नहीं था, बहरहाल दशहरा की यह रात्रि कुछ लम्बी जरूर हो गई लेकिन यह रात भी कि गई। सुबह सूर्यापेट मीटिंग के बाद यात्र सीधे मेन हाईवे से हैदराबाद के लिए रवाना हो गई। हैदराबाद में दशहरा उत्सव मनाया जा रहा था, यहां झांकियों की धूम थी, विसर्जन की तैयारियों चल रही थीं, सभी लोग पूरी छुट्टी पर थे। बाजार भी जल्दी ही बंद होने लगे थे, लेकिन दशहरा की झांकियों की भीड़ बढ़ती ही जा रही थी, लोग एक-दूसरे पर गुलाल फेंक रहे थे, नाचते-गाते बहुत ही आकर्षक झांकियों को विसर्जन करने के लिए लोग निकल पड़े थे। हैदराबाद में सेवा सिंह जी के परिवार के साथ लंच कर यात्र चारमिनार होकर हैदराबाद शहर से बाहर मैडचल पहुंचकर विश्राम कर अगली सुबह वहां से आगे नागपुर के लिए रवाना हुई। हैदराबाद भी डैस सिटी है, लेकिन आपरेटरों से फोन पर ही सारी बातें हो सकी दशहरा उत्सव के कारण। यहां से आगे की यात्र अगले भाग में पढ़ियेगा तब तक के लिए दशहरा की शुभकामनाएं!!!

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