(तृतीय भाग)‘चेतना यात्रा-9’जोधपुर से आगे मुम्बई तक

राजस्थान में खासी गर्मी पड़ रही थी, लेकिन यह क्षेत्र पूर्णतया मरूस्थल सा भी बीच-बीच में दिखाई देता है। जोधपुर से आगे बढ़ते ही मौसम में काफी बदलाव आ गया और बारिश शुरू हो गई। कई जगह तेज बारिश भी मिली लेकिन जोधपुर से उदयपुर का रास्ता पहाड़ी घुमावदार एवं फोर लेन वाला होने के कारण समय से उदयपुर पहुंच गई यात्र। उदयपुर में केबल टीवी ऑपरेटरों के साथ मीटिंग रखी हुई थी वहां के प्रमुख ऑपरेटर अजय पोरवाल ने। पोरवाल उदयपुर में नगर निगम सदस्य (काऊन्सलर) भी हैं। उन्होंने यात्र विश्राम के लिए वहां के सर्किटि हाउस में व्यवस्था की हुई थी। उदयपुर का सर्किट बिल्कुल प्राइम लोकेशन पर स्थित है, जहां से उदयपुर की प्रमुख लेक का नजारा बहुत ही खूबसूरत दिखाई देता है। यहां की बॉलकनी में बैठकर पूरा दिन भी गर झील को निहारा जाए तो भी समय गुजरने का पता ही नहीं चलेगा।


उदयपुर के चैम्बर ऑफ कॉमर्स में ऑपरेटरों की मीटिंग रखी गई थी, जहां भारी संख्या में आए थे ऑपरेटर। मीटिंग में यात्र का भव्य मेवाड़ रिवाजनुसार पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया। ऑपरेटरों के साथ इण्डस्ट्री की भावी सम्भावनाओं पर विस्तार से बातें हुई। अभी उदयपुर डैस सिटी नहीं है, जबकि जोधपुर में डैन नेटवर्क के द्वारा ही डैस के अन्तर्गत सर्विस दी जा रही है, लेकिन उदयपुर में मोनोपॉली नहीं है। ऑपरेटरों को आपस में संगठित रहने का संदेश देकर यात्र झीलों के शहर उदयुपर से आगे के लिए रवाना हुई। यहां से आगे गुजरात का सफर शुरू हो जाएगा। बारिश भी यात्र के साथ-साथ राजस्थान से ही आगे-आगे चलने लगी है, अतः उदयपुर से हिम्मतनगर पारकर जैसे ही अहमदाबाद पहुंची यात्र कि जोरदार बारिश भी शुरू हो गई। अहमदाबाद में शाम की ही मीटिंग रखी गई थी। डैस के द्वितीय चरण के अन्तर्गत अहमदाबाद सिटी भी आती है। यहां जीटीपीएल एवं इन केबल डैस सेवा उपलब्ध करवा रहे हैं, लेकिन दोनों ही एमएसओ के साथ जुड़े हुए केबल टीवी ऑपरेटर मीटिंग में शामिल हुए।


ऑपरेटरों की संख्या भारी बारिश के बावजूद भी काफी थी। मीटिंग के बीच लाइट चले जाने के कारण थोड़ी असुविधा अवश्य हुई, लेकिन ऑपरेटरों के होसलों में कोई कमी नहीं दिखाई दी। पूरे जोश में भरे हुए दिखाई दे रहे थे अहमदाबाद के ऑपरेटर। इन केबल टीवी ऑपरेटरों में जोश तो पूरा भरा हुआ दिखाई दे रहा था, लेकिन दिशा की कमी भी साफ दिखाई दे रही थी। सबको जोड़ने व जागने का संदेश देकर मीटिंग सम्पन्न तो हो गई, लेकिन ऑपरेटरों की जिज्ञासा खत्म नहीं हुई, अतः मीटिंग के बाद भी उन्हीं के साथ देर तक बैठना हुआ। गुजरात में वहां के प्रमुख बापू भाई के कनक सिंह राना से आज भेंट के लिए समय ही नहीं मिल सका। अगली सुबह कनक भाई राजकोट रवाना हो गए, जबकि यात्र का रूट भी राजकोट का ही था। अतः राजकोट में बापू के साथ वहां के अन्य ऑपरेटरों के संग मीटिंग कर यात्र जूनागढ़ के लिए रवाना हो गई। राजकोट भी डैस के द्वितीय चरण में शामिल है। यहां भी जीटीपीएल की प्रतिस्पर्धा में डैन नेटवर्क चलता है।


गुजरात में चार सिटी अहमदाबाद, राजकोट, वडोदरा और सूरत डैस के द्वितीय चरण में शामिल है, जबकि राजस्थान की दो ही सिटी जयपुर व जोधपुर डैस के द्वितीय चरण में आती हैं। गुजरात में केबल टीवी ऑपरेटरों में डैस को लेकर बहुत उत्साह तो दिखाई दे रहा है, लेकिन करना क्या हैं\ इस सवाल का जवाब उन्हें भी नहीं मालूम है। उन्हें आपस में संगठित होने एवं नींद से जाग जाने के संदेश से ज्यादा कुछ दिया भी नहीं दिया जा सकता है। ऑपरेटरों को एनालॉग की तरह धींगा मस्ती से बाहर निकल आने का समय अब आ गया है, अतः बिजनेसमैन बनो का भी संदेश उन्हें देने का प्रयास किया जाता है। राजकोट से जूनागढ़ पहुंच कर ऑपरेटरों के साथ भी कनक सिंह राना ने एक मीटिंग करवाई, लेकिन यहां ऑपरेटरों में वह उत्साह नहीं दिखाई दिया। आज बड़े बेटे अनुराग का जन्मदिन भी है, जिसमें मैं शामिल नहीं हो पाता हूं।

लगातार उसका यह 9वां ऐसा जन्मदिन है, जब मैं उसके साथ नहीं होता हूं, साथ ही उसका छोटा भाई अमन भी यात्र में मेरे साथ होने के कारण अनुराग के जन्मदिन में शामिल नहीं हो पता है। सबसे छोटा अकुंश भी न्यूजीलैंड में होने के कारण बीते चार सालों से अनु के जन्मदिन पर साथ नहीं हो पता है। भाईयों की गैर हाजिरी भी अपने जन्मदिन पर अनु को हमेशा खलती ही होगी।
जूनागढ़ में भी भारी बारिश बनी हुई है, अतः आगे का रास्ता और भी कठिन हो सकता है बारिश के कारण। कनक भाई जूनागढ़ तक यात्र में शामिल होने के बाद वापिस अहमदाबाद चले गए। जूनागढ़ में अभी एनालॉग सिस्टम ही चल रहा है, क्योंकि यहां का नम्बर डैस के तृतीय चरण में आयेगा। यह एक हिस्टोरिकल शहर है, यहां की इमारतें अभी भी अपनी कहानियां सुनाती प्रतीत होती हैं। जूनागढ़, सोमनाथ और गीर अपने आप में एक इतिहास हैं। इसी क्षेत्र में एशिया के शेर अर्थात लायन पाए जाते हैं। लायन देखने के लिए जूनागढ़ से यात्र आगे बढ़ते हुए सासणगीर पहुंचती है। रास्तेभर लगातार बारिश होती रही। सासणगीर में वन विभाग के टूरिस्ट कैम्पस में ही विश्राम किया। यहां वन विभाग में नए भर्ती किए गए फॉरेस्ट गार्ड फॉरेस्ट की 5 दिवसीय ट्रेनिंग चल रही है, इनमें लड़के व लड़कियां दोनों ही शामिल हैं। 5 दिनों की ट्रेनिंग में उन्हें वनस्पति, जंगल, जानवरों के साथ-साथ जानवरों के साथ इंसानों के रिलेशन के बारे में भी जानकारी दी जाती है।

प्रकृति के साथ मानव संबंधों व प्रभाव के बारे में भी बताया जाता है एवंम ग्रामीण वासियों के साथ वन विभाग के कर्मचारियों का व्यवहार कैसा होना चाहिए उसके लिए भी इन्हें ट्रेनिंग दी जाती है। 5 दिनों की कड़ी ट्रेनिंग व दिनचर्या के बाद सभी ट्रेनर कर्मचारियों की जिम्मेदारी उन्हें सुपुर्द कर दी जाएगी, इस तरह कुछ और वन्य कर्मचारियों की संख्या बढ़ जाएगी। यहां के रेन्जर साहब से भेंट नहीं हो सकी, लेकिन दो दिन के प्रवास में बारिश के बावजूद भी एशिया लायन हमें वहां के एक गांव तलाला के निकट बहती हिरन की नदी के किनारे देखने को मिल ही गए। यहां गाड़ी का एक टायर भी पूर्णतया क्षमिग्रस्त हो गया। बारिश में भीगते-भीगते जब गाड़ी का टायर बदला जा रहा था, तभी एक लायन गाड़ी के पीछे से होकर सड़क पार करके गया एवं एक और लायन थोड़ी देर बाद उसी मार्ग से नदी की दिशा में सड़क पार कर उतर गया। हालांकि लगातार हो रही बारिश में लायन दिखने की संभावनाएं बिल्कुल नहीं थीं, लेकिन यात्र का स्वागत करने जैसे वह भी निकल आये। तलाला गांव के केबल टीवी ऑपरेटरों जितेन्द्र एवं दिनेश के साथ दीव के ऑपरेटर अरूण एवं धर्मेश भी दीव से तलाला आ गए थे। डैस पर जानकारी लेने के लिए ऑपरेटर अब हिलने-डुलने लगे हैं। इसीलिए दीव से आए ऑपरेटरों सहित तलाला के ऑपरेटर दिनेश के फार्म हाउस पर बैठक की गई।

बैठक में डैस पर डिस्कशन एवं इण्डस्ट्री की भावी संभावनाओं पर चर्चा के बाद दीव वाले ऑपरेटर वापिस दीव चले गए और चेतना यात्र मुख्य मार्ग से वापिस जूनागढ़ मार्ग से होते हुए राजकोट, अहमदाबाद एक्सप्रेस वे से वडोदरा पहुंची। यह पूरा क्षेत्र प्रकृति की अद्भूत कृपा का पात्र बना हुआ है। यहां की जमीन बहुत उपजाऊ है। आमों की विशेष प्रकार की केसर आमों का उत्पादन यहीं पर होता है। कपास, गन्ना, नारियल, मूंगफली, गेंहू यहां बहुतायत में होता है। पशूधन की यहां कोई कमी नहीं है। भेड़-बकरियों सहित गाएं व भैंसे भी यहां हर घर में पाली जाती हैं, अतः दिल्ली की तरह मिलावटी दूध की कतई गुंजाइश नहीं होती है। किसान समृ˜ है, उनकी वेशभूषा भी भिन्न है। चाय की दुकानों पर चाय बनते व परोसते देखना अलग सा लगता है, क्योंकि चाय की दुकानों पर जयाेंही ग्राहक पहुंचते हैं उनके हाथों में प्लेट पकड़ा दी जाती है और फिर उनकी प्लेट में केटली से चाय पलट दी जाती है, परन्तु जब हमने चाय रखकर मांगी तब प्लेट में प्लास्टिक के एक छोटे से ग्लास में चाय रखकर दी जाती है।
बेसन का सेवन यहां कुछ ज्यादा ही होते देखा गया। यहां के आटो कुछ विशेष प्रकार के होते हैं, उन पर बैठी सवारियाें भी आकर्षित करती हैं। चाय बनाने बेचने वाले हों या फिर गाय-भैंस-बकरियां चराने वाले उनके कानों में अलग तरह के झूमके देखे जा सकते हैं यहां। ऊंट गाड़ियों के साथ-साथ यहां बैलगाड़ियां भी देश के अन्य क्षेत्रें से अलग दिखाई देती है। लगातार कई दिनों से हो रही बारिश ने यहां का माहौल काफी बिगाड़ कर रख दिया है। सड़कें पानी में डूब गई हैं, नदी, नाले व नहरों सहित डैम भी ओवरफ्लो करने लगे तब हाई अलर्ट की चेतावनी देने के साथ डैम के कपाट भी खोलने पड़ गए हैं।

अतः लोगों को अधिक पानी के कारण थोड़ी परेशानी भी उठानी पड़ी है, लेकिन इस वर्ष इस क्षेत्र में पानी की कमी भी दूर हो गई है। गुजरात की चारों डैस सिटी में से अहमदाबाद व राजकोट को कवर करने के बाद वडोदरा में जे-बी- गांधी सहित अन्य ऑपरेटरों के साथ वार्तालाप कर यात्र देर रात सूरत पहुंच गई। वडोदा-सूरत के बीच एक्सप्रेस वे पर जितना लम्बा जाम लगता है वैसा जाम देश के किसी भी हाईवे पर दिखने को अभी तक हमें नहीं मिल सका है। हरेक बार इस जाम में घण्टों खराब करने के अतिरिक्त कोई अन्य चारा भी नहीं है यहां से गुजरने वाले वाहनों के लिए, लेकिन इस बार भरूच के निकट एक्सप्रेस हाईवे से उतरकर ग्रामीण क्षेत्रें से गुजरते हुए अंकलेश्वर होकर गोल्डन ब्रिज को पार करते हुए काफी आगे निकल कर पुनः हाईवे को पकड़ कर देर रात सूरत पहुंच सकी यात्र।
सूरत भी डैस सिटी में शामिल है, अतः यहां भी डैस की अन्य सिटी की भांति एनालॉग प्रसारण बंद हो चुका है। यहां भी सैट्टॉप बॉक्स के बिना किसी भी टीवी को कोई सिग्नल प्राप्त नहीं हो रहे हैं। जीटीपीएल यहां भी नम्बर वन एमएसओ बना हुआ है, जबकि दूसरे नम्बर पर इन केबल है। सूरत में दो अन्य एमएसओ ने भी हैडेण्ड लगा रखे हैं। इनमें से एक एमएसओ डीएल नेटविजन के साथ तो जीटीपीएल की भागीदारी है, जबकि दूसरा एमएसओ देवश्री नेटवर्क पूर्णतया इण्डिपैंडेट है। इनके साथ-साथ यहां भी डैन ने अपनी मौजूदगी बना रखी है।

डैस पर डिस्कशन के साथ-साथ यहां के केबल टीवी दर्शकों को भी डैस पर विशेष संदेश देकर यात्र गुजरात से महाराष्ट्र के लिए रवाना हो गई। सूरत को मिलाकर कुल ग्यारह डैस सिटी अभी तक कवर की जा चुकी है इस चेतना यात्र में। 5 सितम्बर को दिल्ली से रवाना हुई चेतना यात्र-9 अभी तक कुल दस राज्यों व एक यूनियन टैरिटरी (चण्डीगढ़) का सफर कर चुकी है, जबकि सितम्बर खत्म होने में अभी तक एक दिन और बाकी रह गया है। सूरत से सापूतारा पहुंची यात्र। सापूतारा को यहां की मसूरी या फिर नैनिताल कहा जा सकता है। महाराष्ट्र व गुजरात वालों के लिए यह एक बहुत ही खूबसूरत हिल स्टेशन है। यहां पहुंचने की सड़कें भी खासी घुमावदार पहाड़ी हैं। बड़ी सी झील के चारों ओर बड़े-बड़े होटल बने हुए हैं, वीकेन्ड पर टूरिस्ट की भीड़ यहां बढ़ जाती है। अबेर काफी हो चुकी सापूतारा पहुंचते-पहुंचते, अतः यहीं विश्राम कर अगले दिन नासिक रवाना हुई यात्र। गुजरात का आखिरी पड़ाव था सापूतारा एवं नासिक महाराष्ट्र की प्रथम सिटी है इस यात्र की। नासिक भी डैस सिटी में शामिल है। महाराष्ट्र के नौ शहरों को डैस के द्वितीय चरण की लिस्ट में जगह दी गई है। यहां डैन सब पर हावी है, लेकिन हाथवे-इन की भी मौजूदगी बनी हुई है।


केबल टीवी ऑपरेटरों को डैस की घुटन आभास होने लगी है, अतः उनकी एक्टिविटीज बढ़ने लगी हैं। अब ऑपरेटरों की नई-नई एसोसिएशन भी बनने लगी हैं या फिर डैड पड़ी हुई एसोसिएशन में हरकत शुरू होने लगी हैं। नूर भाई-अनिल गीटे आदि से भेंटकर यात्र महाराष्ट्र के दूसरे डैस शहर औरंगाबाद के लिए बढ़ चली। देर रात औरंगाबाद पहुंच पंचवटी होटल में विश्राम कर सुबह वहां के एक मात्र एमएसओ देवा दहले से पहले केबल टीवी ऑपरेटरों के साथ भेंट की। औरंगाबाद केबल टीवी ऑपरेटरों के नेता देशमुख सहित नीलकण्ठ एवं अन्य ऑपरेटरों से भेंट करने के बाद एमएसओ से भेंट कर यात्र सीधे अहमदनगर के लिए रवाना हो गई, लेकिन नासिक व औरंगाबाद के ऑपरेटरों का डैस के प्रति रवैया सकारात्मक प्रतीत नहीं हुआ।
औरंगाबाद से सीधे अहमदनगर पहुंची यात्र।

अहमदनगर डैस सिटी के अंतर्गत नहीं आता है, लेकिन यहां अहमदाबाद से आ रही जीटीपीएल की फीड चलती है। औरंगाबाद में एक काला ताजमहल भी टूरिस्ट के लिए बहुत आर्कषण रखता है, जबकि टूरिस्ट को अजन्ता-अलोरा की गुफाएं भी यहां आने के लिए आकर्षित करती हैं। अहमदनगर से पूना मार्ग पर ही अन्ना जी का गांव रालेगण सिद्धी पड़ता है, अतः अन्ना जी का आर्शीवाद प्राप्त करने के लिए यात्र अहमदनगर से सीधे रालेगण सिद्धी पहुंची। अन्ना जी के गुरूकुल आश्रम पहुंचे ही थे कि आश्रम से अन्ना जी की गाड़ी बाहर आ रही थी, उन्हें इस यात्र के बारे में बताते हुए उनके साथ कुछ पल भेंट की आग्रह किया तब उन्होंने अपने पीछे-पीछे आने के लिए हमें निर्देश दिया। उनकी गाड़ी के पीछे की गाड़ी में उनकी सिक्योरिटी वाले थे एवं उसके पीछे अपनी गाड़ी चल पड़ी। आश्रम से निकल कर अन्ना जी वहां स्थित अपने मीडिया सेन्टर पहुंच कर एक कुर्सी पर बैठकर बोले कि यहां ठीक है, हमने कहां कि ठीक है और अपने कैमरे-ट्राई पोर्ट लगा लिए।

अन्ना जी को चेतना यात्र-8 की प्रति भेंट करते हुए ग्लोबल वार्मिंग पर के प्रति लोगों को जागरूक करने की देशभर के केबल टीवी ऑपरेटरों की मुहिम के बारे में जानकारी देने के साथ-साथ एनालॉग से डिजीटल पर जाने के बारे में भी बताया गया। अन्ना जी ने पर्यावरण के प्रति किए जा रहे इस योगदान पर अपनी शुभकामनाएं भी लिखीं। उनका आर्शीवाद-शुभकामनाएं प्राप्त कर यात्र रालेगण सिद्धी से सीधे पूना के लिए रवाना हो गई।


पूना में आईसीसी प्रमुख एजाज ईनामदार के साथ सबसे पहले भेंट हुई। डैस पर उन्होंने अपनी प्रोग्रेस बताई, जबकि डैस से पूर्व भी उनका नेटवर्क हर मामले में नम्बर वन चल रहा है। बेसिल से ऑडिट करवाकर एवन क्वािलटी का सर्टिफिकेट भी उन्होंने प्राप्त किया हुआ है। टैक्नोलॉजी में एचडी के साथ-साथ अब वह थोड़ी भी अपने उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवा रहे हैं। इनके साथ जुड़े लास्टमाइल ऑपरेटरों में 10 हजार कनेक्शन वाला ऑपरेटर भी हैं तो मात्र 75 कनेक्शन वाला भी शामिल है। उनसे डैस पर डिस्कशन के बाद यात्र का स्वागत बाबा शेख ने किया। पूने में आईसीसी के साथ-साथ बाबा शेख इण्डिपैन्डेंट एमएसओ हैं। हाथवे-डैन-इन-जीटीपीएल के अतिरिक्त साईं केबल एवं एक क्फि़्रस्टल केबल भी यहां एमएसओ के रूप में मौजूद है। केबल टीवी ऑपरेटरों की संख्या भी तकरीबन 600 से अधिक है यहां। पूने-मुम्बई के बिल्कुल निकट होने के कारण डैस सिटी के रूप में अति महत्वपूर्ण हो जाता है। महाराष्ट्र में एण्टरटेनमेंट टैक्स एक बड़ी समस्या बन गया है, जिसको लेकर ऑपरेटर ज्यादा परेशान हैं। हालांकि सैफ फॉर्म तो तकरीबन भरवाए ही जा चुके हैं, लेकिन चैनल च्वॉईस के लिए पैकेजों का काम की अभी शुरूआत भी नहीं हुई है।

चेतना यात्र-9 का गर्मजोशी के साथ स्वागत कर भाई बाबा शेख ने कुरान शरीफ की एक हिन्दी प्रति भेंट की। बाबा शेख ने मृत्युंजय एवं सम्भाजी पुस्तक की हिन्दी प्रति भी भेंट की। बाबा शेख यहां की एक सहकारी बैंक के चेयरमैन बनाए गए हैं, इसके लिए उन्हें बधाई देने वालों का तांता लगा होने के बावजूद भी उन्होंने यात्र के स्वागत के लिए पूरा समय निकाला। बाबा शेख के यहां मीडिया प्रो के प्रतिनिधियों से भी भेट हुई एवं लेटना के विकास कंवर भी मिले। इन सबके साथ डैस पर बात कर यात्र पूने से पिम्परी के लिए रवाना हो गई। पूना में भेंट करने वालों में सबसे पहला शख्स पूर्व मित्र एक्टिविस्ट केबल टीवी ऑपरेटरों के लिए लम्बी लड़ाई लड़कर थक चुका वसंत पटवर्धन था। वसंत को जैसे ही पता लगा कि यात्र पूने पहुंच रही है, वह मुम्बई से सीधे पूना पहुंचे और सुबह सबसे पहले भेंट की। वसंत भाई ने महाराष्ट्र के केबल टीवी ऑपरेटरों के लिए एक लम्बी लड़ाई लड़ी है और उस संघर्ष में काफी कुछ गंवाना भी पड़ा है। अब वह इण्डस्ट्री से बाहर है, लेकिन इण्डस्ट्री से लगाव में कोई कमी नहीं है।


पूना से पिम्परी पहुंचने पर गोपी भाई ने यात्र का जोरदार स्वागत किया। गोपी पिम्परी में डैन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, लेकिन पिम्परी में भी डैन-ईन-हाथवे एवं पीसीएस कुल चार एमएसओ हैं। डैन का कंट्रोल रूम पिम्परी में ही लगा हुआ है। यहीं से सोलापुर, पूना व पिम्परी चिंचवाड़ कवर होते हैं। यहां ढ़ाई लाख के लगभग सैट्टॉप बॉक्स केबल टीवी के लगे होंगे तो तकरीबन चार लाख डीटीएच भी लगा हुआ है। यह स्थिति केबल टीवी के लिए ठीक नहीं कही जा सकती है। इसी तरह से औरंगाबाद में भी एक ही एमएसओ (हाथवे) है, लेकिन दो सौ केबल टीवी ऑपरेटर होने के बावजूद केबल व डीटीएच के बॉक्स बराबर संख्या में लगे हुए हैं, परन्तु औरंगाबाद में वीडियोकॉन की फैक्ट्री होने के कारण उनके ही एम्प्लाई की संख्या 20-25 हजार है, जिन्हें वीडियोकॉन का डीटीएच लगाना मजबूरी होती है, क्याेंकि उनकी सैलरी से डीटीएच का पैसा कट जाता है, परन्तु पिम्परी में ऐसी कोई वजह नहीं है। 2 अक्टूबर को गोपी भाई ने पिम्परी में एक राऊण्ड टेबल डिस्कशन का कार्यक्फ़्रम रखा जिसकी विशेषता यह रही कि एक-दूसरे के कम्प्टीटर एमएसओ के साथ-साथ सभी एमएसओ के प्रमुख केबल टीवी ऑपरेटरों को भी बुलाया गया। जानकारियों के अभाव में बहुत सारी गलतफहमियां इस गोल मेज सम्मेलन में दूर की गईं। बहुत ही पॉजीटिव रही यह डिस्कशन ऑन डैस। पिम्परी से मुम्बई मार्ग पर थाने के एमएसओ जेवी मंगेश के साथ भेंटकर नवी मुम्बई-कल्याण होकर मुम्बई पहुंच गई यात्र। सितम्बर पूरा बीत चुका और अब अक्टूबर का दूसरा दिन यानिकि 2 अक्टूबर पूर्ण छुट्टी के दिन काम करते हुए यात्र महानगरी मुम्बई पहुंच गई है। चेतना यात्र-9 के तृतीय भाग को यही विराम देते हैं, यहां से आगे चौथे भाग को मुम्बई से ही शुरू किया जाएगा, अतः पाठक गण अगले अंक की प्रतीक्षा करें।

पूना में आईसीसी प्रमुख एजाज ईनामदार के साथ सबसे पहले भेंट हुई। डैस पर उन्होंने अपनी प्रोग्रेस बताई, जबकि डैस से पूर्व भी उनका नेटवर्क हर मामले में नम्बर वन चल रहा है। बेसिल से ऑडिट करवाकर एवन क्वालिटी का सर्टिफिकेट भी उन्होंने प्राप्त किया हुआ है। टैक्नोलॉजी में एचडी के साथ-साथ अब वह थोड़ी भी अपने उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवा रहे हैं। इनके साथ जुड़े लास्टमाइल ऑपरेटरों में 10 हजार कनेक्शन वाला ऑपरेटर भी हैं तो मात्र 75 कनेक्शन वाला भी शामिल है।

2 अक्टूबर को गोपी भाई ने पिम्परी में एक राऊण्ड टेबल डिस्कशन का कार्यक्फ़्रम रखा जिसकी विशेषता यह रही कि एक-दूसरे के कम्प्टीटर एमएसओ के साथ-साथ सभी एमएसओ के प्रमुख केबल टीवी ऑपरेटरों को भी बुलाया गया। जानकारियों के अभाव में बहुत सारी गलतफहमियां इस गोल मेज सम्मेलन में दूर की गईं। बहुत ही पॉजीटिव रही यह डिस्कशन ऑन डैस।

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