शिमला से पटना (भाग 3)

प्रकृतिक आपदा से जूझ रहे जम्मू व कश्मीर के हालात काफी खराब है, तमाम मार्ग अवरूद्ध हो गए है, लोग जहां थे वही फंस कर रह गए है, जबकि भारी जानमाल का नुकसान होने की भी खबरें वहां से लगातार आ रही है, लेकिन सेना ने वहां सेवा के लिए मोर्चा सम्भाल लिया है। देश के गृह मन्त्री श्री राजनाथ सिंह के दौरे के बाद तुरन्त ही, माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का वहां जाना बताता है कि स्थितियां बहुत गम्भीर है। ऐसी विषम स्थितियों में चाह कर भी यात्र अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रमानुसार जम्मू व कश्मीर नहीं जा सकी जबकि दिल्ली से रवाना होने के बाद यात्र का 5 सितम्बर को पहला हाल्ट लुधियाना तो 6 सितम्बर को दूसरा हाल्ट जम्मू में था।

जम्मू से ऊधमपुर-किश्तवार अनन्तनाग होते हुए 7 सितम्बर को तीसरा हाल्ट श्रीनगर में था। 8 सितम्बर को श्रीनगर से पुंछ राजोरी नौशेरा से वैष्णो देवी दर्शन कर 9 सितम्बर को वहां से कटरा जम्मू होकर पठानकोट हाल्ट करना था। वहां से नूरपुर, शहपुर धर्मशाला, पालमपुर, हमीर पुर होते हुए बिलासपुर हाल्ट लेना था। बिलासपुर से 11 सितम्बर को शिमला पहुँचनी थी यात्र, लेकिन जम्मू व कश्मीर में ना जाने के कारण हमारे पूर्व निर्धारित यात्र कार्यक्रम बिगड़ गया। लुधियाना से रवाना होने के बाद जम्मू ना जाकर 6 सितम्बर को सीधे पठानकोट हाल्ट मारना पड़ा जबकि 9 सितम्बर को वहां पहुँचनी थी यात्र। पठानकोट में 10 सितम्बर को होने वाली मीटिंग को 7 सितम्बर को बुलाया गया, लेकिन पठानकोट से आगे किस तरह से बढ़ा जाए यह एक बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया, क्योकि यात्र के आगे के कार्यक्रमों के लिए सभी को सूचना दे दी गई है।

पठान कोट से आगे बढ़ने से पूर्व दिल्ली से कुछ जरूरी सामान लेकर पठानकोट पहुंचे तिलकराज को वापिस दिल्ली के लिए विदा कर मीटिंग लेते हुए सीधे धर्मशाला मैक्लोरगंज पहुंची। मैक्लोरगंज दलाईलामा का केन्द्र है, जहां विश्वभर से आने वाले उनके श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मैक्लोरगंज व धर्मशाला दोनो ही विश्वभर के पर्यटकों को आकर्षित करते है अतः यहा होटल्स की कोई कमी नही है। यहां का मौसम और वादियां बहुत खूबसूरत है। प्राकृति की इसी खूबसूरती में मित्र रवि भटनागर जी का एक होटल द बेला हाईटस पठानकोट से अगला पड़ाव बना। द बेला हाईटस पूरी तरह से तमाम आधुनिक सुंविधाओं से सुसज्जित होने के साथ वहां एक बहुत अच्छी लोकेशन पर स्थित था। इस होटल में ऊपर-नीचे आने-जाने के लिए लिफ्रट भी लगी थी एंव इसकी छत पर बने रैस्=ाां से प्राकृति के सौन्दर्य के नजारें हर क्षण बदलते फोटोग्राफी के लिए अद्भुत थे। रात्रि विश्राम कर अगले दिन प्रातः धर्मशाला के दूरदर्शन केन्द्र में मीटिंग से निबट कर सीधे मण्डी के लिए रवाना हुई यात्र लेकिन समय अब अतिरिक्त हो गया था अतः प्राकृतिक सौन्दर्य की गोद में रात्रि विश्राम जोगिन्दर नगर में स्थित हिमाचल टूरिज्म का पर्यटन निवास यूएचएल में किया। हिमाचल टूरिज्म के विश्राम स्थल का नाम यूएचएल एक जिज्ञासा पैदा करता था अतः सुबह जानकारी मिली कि यहां से ऊपर इस नाम से एक नदी निकलती है जो ऊपर ही ऊपर आगे तक चली जाती है उसी नदी के नाम पर यहां के विश्राम स्थल का नाम भी रखा गया।


जोगिन्दर नगर से पहले पालमपुर के ऑपरेटर संजीव जी से भी भेंट की गई, क्योंकि इण्डष्ट्री के बदलते दौर में हिमाचल में अभी भी वह हैथवे की मौजूदगी बनाए हुए है। पेशे से संजीव जी चार्टेड अकाउनटेन्ट हैं, लेकिन केबल टी-वी- में वह नए नहीं है। पालमपुर से सीधे मण्डी पहुंची यात्र, जहां मण्डी के ऑपरेटर शरद मल्होत्र द्वारा यात्र का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। मण्डी मीटिंग के बाद यात्र मनाली की और रवाना हुई। मण्डी की ओर से होते हुए खूबसूरत वैली कुल्लू पहुंची यात्र। कुल्लू के आपरेटरों से मिलकर तकलीपुल में अजय शर्मा द्वारा यात्र का जोरदार स्वागत किया गया, उन्होंने ही मनाली में यात्र विश्राम की तैयारी की। मनाली के एक खूब सूरत होटल स्नोक्रस्ट में आरामदायक विश्राम किया। यह होटल वहां के बाजारों की किच-किच से बहुत दूर था। इस होटल में पहुंचना आम टूरिस्ट के लिए बहुत ही कठिन है, लेकिन जिसकी वहां पहले से ही बुकिंग है वह भी बिना वाहन के वहां नहीं पहुंचना चाहेगा।

बहुत ही खूब सूरत बादियों से घिरा हुआ काफी खड़ी चढ़ाई के बाद ऊपर स्थित है। होटल स्नोक्रस्ट प्राकृति के बहुत खूबसूरत नजारे यहां से दिखाई देते है। मनाली स्वंय में बहुत खूबसूरत प्राकृतिक सौन्दर्य से भरा हुआ है। यहां के लोग भी उतना ही आकर्षण रखते है। यहां के एक पुराने केबल टी-वी- ऑपरेटर इक्बाल सिंह शर्मा से हुई मुलाकात भी इस यात्र के लिए विशेष स्मृतियों में शामिल है। इकबाल भाई एक ब्राहमण परिवार के सदस्य है वह एडवैंचर स्वभाव के है। उनके एडवैंचर किस्से आपके समय के बीतने का आभास भी नहीं होने देगे। शिमला के लिए उन्होंने हमारे एडवैचर स्वभाव के हिसाब से एक नया मार्ग नागर, बंजार, सोझा, अनि, लुहरी, सोंज, नरकण्डा के रास्ते थियोग होते हुए कुफरी से शिमला सुझाया।
इकबाल सिंह शर्मा द्वारा सुझाए गए मार्ग पर मनाली से शिमला के लिए शुरू हुई यात्र का हरेक पल, हरेक किलोमीटर नए एडवैंचर से ढैर सारी यादों के साथ सदैव हमारे साथ रहेगा। हम कोशिश करेंगे कि भविष्य में केबल टी-वी- व्यवसाय में संलग्न अपने अन्य मित्रें को भी ऐसे एडवैंचर टूर का हिस्सा बनाएँ। देवदार के घने व्यावान जंगल के बीच से होकर गुजरता हुआ यह मार्ग वाकई साहसिक धुमक्कड़ों के लिए ही बना हुआ है।

वहां की यादें अदृभुद है, लेकिन ड्राईविंग में पूर्ण निपुण एंव अनुभवी ही इस मार्ग से सफलता पूर्वक सफर कर सकते है। मनाली से रवाना होने पर मार्ग के दोनो ओर लगे सेबों के वृक्ष बार-बार आकर्षित कर रहे थें एंव सेब से लदे वृक्षों से तोड़कर किस तरह से इन्हें दूरदराज बैठे उपभोंक्ताओं तक पहुंचाया जाता है, यह देखना व जानना भी इस यात्र का सुखद हिस्सा बना। भाई इकबाल सिंह शर्मा एक ब्राहमण परिवार से है, उन्होंने बताया कि यहां (मनाली) हिडम्बा का मन्दिर है जो कि हिडम्ब राक्षस कुल की थी। हिडम्बा-भीम के बारे में महाभारत में पूरा वर्णन है, उनका पुत्र घटोत्कच था जिसने महाभारत के दौरान कौरवों पर कहर ढ़ाया था। कुल्लू के महाराजा ने यह मन्दिर बनवाया था। दशहरा पर हिडम्बा रथ की सवारी निकाली जाती है, और बलि चढ़ाई जाती है। यहां पूर्व में भैसे की बलि चढ़ाई जाति थी, लेकिन अब बकरे की बलि दी जाती है।

यहीं गुरू वशिष्ट का कुण्ड (गर्म पानी का) है एंव गौतम ऋषि का मन्दिर है। ऋषि व्यासमुनि कुण्ड भी यहीं है। यहां का नाम मनु ऋषि से मनाली पड़ा था। यहां साण्डिल ऋषि मन्दिर भी है एवं जमदग्नि ऋषि (परशुराम पुत्र) मन्दिर, भृगु ऋषि लेक, ऋषि पराशर मन्दिर व लेक (क्लोटिंग आयरलैण्ड जो सदैव तैरता रहता है) यहीं भगवान शिव पुत्र कार्तिकेय मन्दिर भी है एवं मां गायत्री का मन्दिर भी है। मां रेनु का (परशुराम की मां) का स्थान भी हिमाचल में ही है इसीलिए देव स्थान कहा जाता है। मनाली में भाई इकबाल से बहुत सारी जानकारियां समेट कर उनके सुझाए मार्ग का आनन्द लेते हुए यात्र विश्राम स्थल ‘हाटो’ हमें मिल गया। ‘हाटो’ एक अच्छी लोकेशन पर स्थित है, लेकिन यह विभाग यदि प्राइवेट सैक्टर के सुपुर्द हो जाए तो बहुत कुछ बदल सकता है। बारहाल नारकण्डा से यात्र सीधे दूरदर्शन केन्द्र शिमला पहुंची, जहां सभी प्रतीक्षारत थे।

शिमला दूरदर्शन केन्द्र में वहां के दोनो एम-एस-ओ- को निमन्त्रित किया गया था, लेकिन वहां केवल एक एम-एस-ओ- किशन सिंह चन्देल ही बिलास पुर से पहुंचे हुए थे। शिमला के प्रमुख एम-एस-ओ- मुकेश मल्होत्र जी को हमने मीटिंग में आने के लिए फोन किया तो वह शीघ्र ही स्वंय आ गए जबकि दूसरे एम-एस-ओ- खन्ना जी की फीड़ पंजाब के फास्टवे नैटवर्क से ही चलती है। दूरदर्शन अधिकारियों में श्री अमित टण्डन सहित अन्य अधिकारी भी मीटिंग में उपस्थित थे। माननीय मन्त्री श्री प्रकाश जावडेकर जी का सन्देश सुनने के बाद दोनो पक्षों के बीच बड़े सोहार्दपूर्ण माहौल में मीटिंग हुई। एक दूसरे की समस्याओं को समझने व सुलझाने पर सकारात्मक शुरूआत हुई। दूरदर्शन प्रोग्रामिंग हैड शिमला द्वारा रखी गई समस्याओं पर हिमाचल के एम-एस-ओ- श्री मुकेश मल्होत्र ने ट्रांसमिशन पर आने वाली समस्याओं को बड़े विस्तार से दूरदर्शन अधिकारियों के सम्मुख अपनी बात रखी। कुछ ऐसी समस्याएँ भी शिमला मीटिंग में सामने आई जिनका समाधान दिल्ली से ही हो सकेगा, लेकिन पहली बार एक अच्छी शुरूआत वहां उस मीटिंग से हो गई।

मीटिंग के बाद वहां के दूसरे एम-एस-ओ- खन्ना जी से भेंट कर यात्र सोलन पहुंची जहां कसौली से आए दूरदर्शन अधिकारी प्रतीक्षा कर रहे थे। कसौली दूरदर्शन अधिकारी श्री राजेश कुमार ने बताया कि यहां के केबल टी-वी- ऑपरेटर पूर्णतया एक्ट का पालन करते हुए दूरदर्शन चैनलों का प्रसारण कर रहें है, नोप्रोब्लम। वहां के ऑपरेटरों का धन्यवाद कर यात्र सीधे चण्ड़ीगढ़ पहुंची।
हमेशा की ही तरह इस बार भी चण्डीगढ़ में रात्रि विश्राम हिमाचल भवन में हुआ। रात्रि में यात्र का स्वागत दिव्या व टशन चैनल के मालिक भाई सन्दीप बंसल ने किया। सन्दीप भाई के साथ चण्डीगढ़ में यात्र विश्राम का अधिक समय व्यतीत कर अगली सुबह एक नए पड़ाव की और यात्र बढ़ी। चण्डीगढ़ से आगे पंचकुला में भाई राजेश मलिक यात्र की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे थे, लेकिन दूरदर्शन केन्द्र चण्डीगढ़ में दूरदर्शन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एम-एस-ओ- भी विशेष मीटिंग के लिए यात्र की प्रतीक्षा में थे। हिमाचल भवन से सीधे दूरदर्शन केन्द्र चण्डीगढ़ पहुंची यात्र वहां सुमित गोयल एंव अन्य दूरदर्शन अधिकारियों द्वारा यात्र का स्वागत किया गया। सभी के साथ बहुत ही सौहार्द पूर्ण वातावरण में एक सकारात्मक मीटिंग वहां हुई, जिसमें प्रोडकशन (कन्टेट्स) वालों ने भी भाग लिया।

चण्डीगढ़ भी फास्टवे के ही सिग्नल टैलिकास्ट किए जाते है अतः फास्टवे नैटवर्क पहले से ही केबल टी-वी- एक्ट के अनुसार दूरदर्शन के चैनलों का भी प्रसारण कर रहा है। दोनो पक्षों के बीच हुई यह मीटिंग आपसी सम्बन्धों को मजबूत रखने की दिशा में एक बड़ी पहल साबित होगी जिसके भविष्य में बेहतर परिणाम आंएगे, जिसका लाभ दूरदर्शन चैनलों को प्राप्त होगा इसके साथ चण्डीगढ़ में इकोप्लान्टेशन भी की गई यह जानकर बहुत अच्छा लगा। चण्डीगढ़ दूरदर्शन केन्द्र में चण्डीगढ़ के मनमोहन सिंह बाजवा जी ने फास्ट वे का प्रतिनिधित्व किया। दूरदर्शन अधिकारियों से शुभकामनाएँ प्राप्त कर यात्र पंचकुला पहुंची जहां राजेश मलिक (नम्रता इण्डष्ट्री) अन्य साथियों के साथ प्रतीक्षा कर रहे थे। पंचकुला मीटिंग के बाद यात्र सीधे देहरादून के लिए रवाना हो गई। इस मार्ग पर कोई मीटिंग नहीं रखी गई, लेकिन बीच-बीच में केबल टी-वी- ऑपरेटरों द्वारा यात्र का स्वागत किया गया।

यात्र की प्रतीक्षा देहरादून दूरदर्शन केन्द्र में भी की जा रही है। वहां भी एम-एस-ओ- के साथ मीटिंग बुलाई गई है दूरदर्शन अधिकारियों के द्वारा। देहरादून दूरदर्शन केन्द्र में देहरादून के एम-एस-ओ- शामिल हुए। मीटिंग आयोजन आज छुट्टी होने के बावजूद भी किया गया, वहां दूरदर्शन अधिकारी मनमोहन सिंह ने यात्र का स्वागत किया एंव ऑपरेटरों के साथ विशेष बैठक में भाग लिया। दूरदर्शन केन्द्र देहरादून में मीटिंग निबट जाने के बाद भी तकरीबन ढ़ाई-तीन घण्टे वहां बेकार हो गए, क्योंकि गाड़ी की चाबी गाड़ी के अन्दर रह गई और गाड़ी लोक हो गई। गाड़ी को अनलाक करवाना भी अब सरल कार्य नही रह गया है। पहले एक मैकेनिक को लाया गया जो स्वंय हार मानकर चला गया। बाद में दो और मास्टर आए उन्होंने बामुश्किल किसी तरह से एक नई चाबी तैयार की तब कहीं जाकर गाड़ी का लाक खोला जा सका लेकिन इस बीच सभी एम-एस-ओ- सहित दूरदर्शन अधिकारी श्री मनमोहन जी भी वहीं साथ रहे और सहयोग देते रहे।

देहरादून से आगे बढ़ना पहले से ही लेट हो चुका था, अतः बीच में स्वागत कार्यक्रमों को रद करना पड़ा, क्योंकि रास्ता आज का अभी काफी लम्बा था। देहरादून से सीधे हरिद्वार दूरदर्शन केन्द्र पहुंची यात्र, जहां छुट्टी होने के बावजूद भी दूरदर्शन आधिकारी श्री आर-के- सिंह अन्य साथियों सहित उपस्थित थे। केबल टी-वी- ऑपरेटर एम-एस-ओ- के साथ दूरदर्शन अधिकारियों की मीटिंग के बाद यात्र सीधे नजीबाबाद,धामपुर, अफजलगढ़ होते हुए सीधे राम नगर पहुंची। राम नगर में एक दिन परिवार पोते आरव एंव पोती माही के साथ व्यतीत किए जाने का भी पहले से ही इस यात्र के हिस्से के रूप में तय किया गया था। अनुराग सपरिवार सबको साथ लेकर दिल्ली से राम नगर आ रहा था, जबकि हमें देहरादून से रामनगर पहुंचना था। हम देहरादून व हरिद्वार की मीटिंग निबटाकर रूद्रपुर में दिल्ली से आने वालों की प्रतीक्षा कर रहें थे, लेकिन अनुराग की गाड़ी रूद्रपुर पहुंचने से पूर्व ही पंचर हो गई थी,अतः हम भी उनके पास पहुंचे और सबके साथ यात्र रामनगर की एक खूबसूरत रिसोर्ट में पहुंची।

परिवार के साथ एक दिन मौजमस्ती के बाद अमन भी आगे की लम्बी-कठिन यात्र के लिए पूर्णरूप से ताजा हो गया था। आरव-माही ने अब तक की थकावट को छूमन्तर कर दिया था। अगले ही दिन रामनगर से आगे की और चल पड़ी यात्र। नैनीताल में भाई नदीम खान (बाबी भाई) के साथ गहन चर्चा के बाद रूद्रपुर होते हुए सीधे मुरादाबाद पहुंची यात्र। मुरादाबाद में रात्रि भोज के बाद दिल्ली वाले दिल्ली के लिए रवाना हो गए और चेतना यात्र अपने गतंव्य की ओर। मुरादाबाद में ऑपरेटरों के साथ मीटिंग के बाद वहां के प्रमुख एम-एस-ओ- फिरासत रवान के द्वारा यात्र का भव्य स्वागत किया गया। वहां से सबकी शुभकामनाएँ समेटकर यात्र लखनऊ के लिए बढ़ चली। लखनऊ में दूरदर्शन अधिकारियों के साथ मीटिंग डैन एन्जाय आफिस बुलाई गई थी। तय समय पर दूरदर्शन अधिकारी (लखनऊ) श्रीमति सुरजीत, श्री वास्तव एंव श्री आर-के-द्विवेदी के-एस-चौहान एंव विकास कटियार डैन एन्डाय सहित मीटिंग में उपस्थित रहे। दोनो पक्षों ने बड़ी गम्भीरता के साथ मीटिंग के महत्व को समझा एंव दूरदर्शन चैनलों को एक्ट के अनुसार ही वह प्रसारित कर रहे है। औमेश्वर सिंह का कहना था कि डिजीटल हो जाने के बाद दूरदर्शन के 24 चैनल ना चलाए जाने का कोई कारण ही नहीं बनता है। एनॉलाग में जरूर थोड़ी परेशानियां कही-2 हो सकती है, लेकिन डिजीटल में स्पेस की कोई कमी नहीं रही। लखनऊ डैन एन्जाय की मीटिंग में उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों के एम-एस-ओ- व ऑपरेटरों को भी भाई औमेश्वर सिंह ने बुलाया हुआ था।

दूरदर्शन अधिकारियों द्वारा इस प्रयास का खूब सराहा गया एंव अगली बार मीटिंग दूरदर्शन केन्द्र में रखने के लिए आग्रह किया लखनऊ मीटिंग के बाद यात्र कानपुर होते हुए सीधे इलाहाबाद पहुंची। इलाहाबाद में गाड़ी का एक व्हील प्रोब्लम बन गया। लगातार लम्बी दूरी की ड्राईविंग से एक व्हील दूसरी बार प्रोब्लम बन गया, जबकि दिल्ली के ट्रोयटा सर्विस सैन्टर से ही गाड़ी का हरेक काम करवाकर यात्र पर निकला गया था। बाकायदा ब्रैकशू ड्रम भी टोयटा के सर्विस सैन्टर में डाला गया था, लेकिन मनाली पहुंचने से पूर्व ही एक व्हील गर्म हो गया। मैकैनिक को दिखलाया तब उसने बताया कि सैटिंग ठीक तरह से नहीं की गई थी, अतः उस मैकेनिक ने सिर्फ सैटिंग ठीक की और यात्र चलती रहीं वही व्हील इलाहाबाद पहुंच कर बहुत ज्यादा गर्म हो जाने के कारण पूरी तरह से अड़ गया। रात्रि विश्राम के बाद सुबह ठण्डा हो जाने पर व्हील गाड़ी के साथ चलने तो लगा लेकिन बिना प्रोब्लम को सोल्व किए यात्र को आगे नहीं बढ़ाया जा सकता था।

इलाहाबाद में आज विश्वकर्मा पूजा के कारण कोई भी वर्कशाप खुली नहीं थी व ना ही कोई मैकेनिक उपलब्ध था। वाराणसी के आलोक भाई से सहयोंग की अपील की तो इलाहाबाद स्थित टोयटा कम्पनी के सर्विस सैन्टर से हमारी बात तो हो पाई लेकिन विश्वकर्मा पूजा के कारण प्रोब्लम सोल्व होने के आसार नहीं दिखें। इसी प्रोब्लम को साथ लिए-लिए आपरेटरों की मीटिंग सन्तोष भाई के आफिस में हुई। मीटिंग के साथ-2 किसी मिस्त्री की खोज भी इलाहाबाद में जारी थी, क्योंकि इलाहाबाद के टोयटा सर्विस सेंटर से स्पष्ट कह दिया गया था कि आज विश्वकर्मा पूजा के कारण किसी मैकेनिक को टूल उठाने के लिए कहना ठीक नहीं होगा। टोयटा कम्पनी के सर्विस सैन्टर द्वारा दिया गया यह जवाब बता रहा था कि समस्या बड़ी गम्भीर और जटिल है। इसे सोल्व किए बिना यात्र इलाहाबाद से आगे नहीं बढ़ाई जा सकती थी अतः इलाहाबाद में किसी मुस्लिम मैकेनिक की तलाश की गई तब एक केबल टी-वी- ऑपरेटर लालू खान द्वारा एक मैकेनिक को लाया गया, जिसने ठीक वही बात की जो इससे पूर्व मनाली के पास सुनने को मिली थी कि सैटिंग ठीक नहीं की गई और उस मैकेनिक ने सैटिंग ठीक कर दी अतः यात्र इलाहाबाद से अब आगे बढ़ने के लिए तैयार हो चुकी थी।

इलाहाबाद में एम-एस-ओ- सन्तोष गुप्ता का डैस लायसैंस भी कैसिल किया गया है। इसके पीछे का सच अलग से लिखने वाला है अतः फिर कभी फिलहाल इलाहाबाद के सभी ऑपरेटरों से यात्र के लिए शुभकामनाएँ लेकर उत्तर प्रदेश से बिहार के लिए रवाना हो गई यात्र। गाड़ी की व्हील प्रोब्लम के कारण तकरीबन पूरा दिन ही इलाहाबाद में आज का बीत गया अतः इलाहाबाद से वाराणसी के रास्ते सीधे पटना पहुंची यात्र। वाराणसी के आपरेटरों के साथ केवल फोन के माध्यम से ही मीटिंग हो पाई। पटना पहुंचते-पहुंचते देर रात हो चुकी थी। अगली सुबह दूरदर्शन केन्द्र पटना में आपरेटरों की मीटिंग बुलाई हुई थी। पटना में तो कोई शिकायत अब दूरदर्शन चैनलों के लिए नहीं रह गई है, क्योंकि पटना डिजीटाईजेशन पर चला गया है, लेकिन बिहार के अन्य क्षेत्रें मे एनॉलाग प्रसारण ही हो रहा है, वहां दूरदर्शन चैनलों के लिए केबल आपरेटर पूर्णतया एक्ट का पालन नहीं कर रहे है, ऐसा पटना दूरदर्शन अधिकारी श्री दीपक कुमार व अन्य अधिकारियों ने बताया। बहुत ही सकारात्मक रही पटना की मीटिंग सभी एम-एस-ओ- के प्रतिनिधि मीटिंग में शामिल हुए एंव सबकी शुभाकामनाएँ लिए यात्र पटना से आगे के लिए बढ़ चली। आगे वृतान्त के लिए अगले अंक की प्रतीक्षा करें।

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